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बिहाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिहाना ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ वि + हा (= छोड़ना)] छोड़ना । त्यागना । उ॰—सुनु खगेस हरि भगति बिहाई । जे सुख चाहहिं आन उपाई ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) सहज सनेह स्वामि सेवकाई । स्वारथ छल फल चारि बिहाई ।—तुलसी (शब्द॰) ।

बिहाना ^२ क्रि॰ अ॰ व्यतीत होना । गुजरना । बीतना । उ॰— (क) चेतना है तो चेत ले निस दिन में प्रानी । छिन छिन अवधि बिहात है, फूटै घट ज्यों पानी ।—संतबानी॰ भा॰ २, पृ॰ ४७ । (ख) बड़ी बिरह की रैनि यह क्योहूँ कै न बिहाय ।—रसनिधि (शब्द॰) । (ग) निमिष बिहात कल्प सम तेही ।—तुलसी (शब्द॰) ।