बींड़ा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बींड़ा ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'बीड़ा' ।
बींड़ा ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ बींड़ी + आ (प्रत्य॰)] पेड़ की पतली टहनियों से बुनकर बनाया हुआ मेंडरे के आकार का लंबा नाल जो कच्चे कुएँ या चोड में इसलिये दिया जाता है कि उसका भगाड़ न गिरे । बींड ।
२. धान की पयाल को बुन और लपेटकर बनाया हुआ गोल आसन जिसपर गाँव के लोग आग के किनारे बैठकर तापते हैं । विशेष—पहले पयाल को बुनकर उसका लंबा फीता बनाते हैं । फिर उस फीते कोवतुं लाकार लपेटकर ऊपर से रस्सी से कसकर बाँध देते हैं । यह गोल होता है और बैठने के काम आता है ।
३. घास आदि को लपेटकर बनाई हुई गेंडुरी जिसपर घड़े रखे जाते हैं ।
४. वह गेंडुरी जिसे सिर पर रखकर घड़े, टोकरे आदि का भार उठाते हैं ।
५. बड़ी बींड़ी । लुंडा ।
६. जलाने की लकड़ी या बाँस आदि का बाँधकर बनाया हुआ बोझ ।
७. पिंडी । पिंड ।