बीन्द
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बींद † ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ विन्दु] दे॰ 'विंदु' । उ॰—डटे सींध षीसे बींद, कांचा गुरु जे गम्य न देही ।—रामानंद॰, पृ॰ ३४ ।
बींद ^२ संज्ञा पुं॰ [देशज्ञ अथवा सं॰ √विदु>विन्द =दूढ़ँना, चुनना, वरण करना] [स्त्री॰ बींदणी] वर । दूल्हा । उ॰— (क) लै चलै बींद ननकरि बिलँब दिन तुच्छै साहौ सु पुनि ।—पृ॰ रा॰, २५ ।१९० । (ख) सब जग सूना नींद भरि, संत न आवै नींद । काल खड़ा सिर ऊपरै ज्यों तोरणि आया बोंद ।—कबीर ग्रं॰, पृ॰ ४६ ।