बीरा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बीरा पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ वीटक, हिं॰ बीड़ा]
१. पान का बीड़ा । वि॰ दे॰ 'बीड़ा' । उ॰—(क) जब तू आपनी स्त्री के पास जाय तब यह बीरा खोलि कै आधो लीजो आधी स्त्री को दीजो ।—दो सौ बावन॰, भा॰ २, पृ॰ ६७ । (ख) उन हँस कै बीरा दई हरषि लुई सुखदान । होन लगी अब दुहुन की मग मधुरी मुसकान ।—स॰ सप्तक, पृ॰ ३७७ ।
२. वह फूल फल आदि जो देवता के प्रसाद स्वरूप भक्तों आदि को मिलता है ।—कत अपनी परतती नसावत मैं पायो हरि हीरा । सूर पतित तबहीं लै उठिहै जब हँसि दैहै बीरा ।—सूर (शब्द॰) ।