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बीरी

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बीरी † संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वीरी वा हिं॰ बीड़ा]

१. चूना, कत्था ओर सुपारी पड़ा हुआ पान का बीड़ा । उ॰—निरषत द्रप्पन नैन वदन बीरी रद खंडित ।—पृ॰ रा॰, १४ । १६१ । (ख) तरिवन श्रवण नैन दोउ आँजति नासा बेसरि साजत । बीरी मुख भरि चिबुक डिठोना निरखि कपोलनि लाजत ।—सूर (सब्द॰) ।—ढरकी के बीच में लंबाई के बल वह छेद जिसमें से नरी भरकर तागा निकाला जाता है ।

३. लोहे का वह छेददार टुकड़ा जिसपर कोई दूसरा लोहा रखकर लोहार छेद करते हैं ।

४. कान में पहनने का एक प्रकार का गहना जिसे 'तरना' बी कहते हैं । उ॰—बीरी न होई बिराजत कान न जानन को मन लावत धंबै ।—(शब्द॰) ।

५. एक दंतमंजन । मिस्सी । दाँत रँगने का मंजन । उ॰—कोइ बीरा कोइ लीन्हे बीरी ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ १२७ ।