बुलाक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बुलाक संज्ञा पुं॰ [तु॰ बुलाक़]
१. वह लंबोतरा या सुराहीदार मोती जिसे स्त्रियाँ प्रायः नथ में या दोनों नथनों के बीच के परदे में पहनती हैं । उ॰— श्याम सरूप में सोहै बुलाक सखी सत भाव सोहाग जो लीजै ।— पजनेस॰, पृ॰ १३ ।
२. नथनों के बीच का परदा । नाक के बीच की सीधी हड्डी (को॰) ।