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बूड़ना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बूड़ना क्रि॰ स॰ [सं॰ वुडा(= डूबना)]

१. डूबना । निमज्जित होना । गर्क होना । उ॰—(क) बूडे सकल समाज चढ़े जो प्रथमहि मोह बस ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) बूड़त भव निधि नाव निबाहक । निगुणिन के तुमही गुणगाहक ।— रघुराज सिंह (शब्द॰) ।

२. लीन होना । निमग्न होना । गूढ़ विचार करना । उ॰— दशा गुनि गोरि की बिलोकि गेह वारे लो एरी सखी रोग ठहराय राख्यो सबहू । बूड़ि बूड़ि बैदन सों एक ते सरस एक हारें नाहिं उपचार करत हैं अबहूँ ।—रघुनाथ (शब्द॰) । सयो॰ क्रि॰—जाना ।