बृन्दा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बृंदा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वृन्दा] दे॰ 'वृंदा' । उ॰—जहाँ बृंदा अति भली विधि रची बनक बनाय ।—घनानंद, पृं॰ ३०१ । यौ॰— वृंदारण्य । वृंदाबन ।
बृंदा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वृन्दा] दे॰ 'वृंदा' । उ॰—जहाँ बृंदा अति भली विधि रची बनक बनाय ।—घनानंद, पृं॰ ३०१ । यौ॰— वृंदारण्य । वृंदाबन ।