बृप
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बृप संज्ञा पुं॰ [सं॰ वृप]
१. साँड़ । बेल । यौ॰—बृपकेतु । बृपध्वज ।
२. मोरपंख ।
३. इंद्र । उ॰— हमरे आवत रिस करत अस तुम गए मुटाइ । पठइ पत्रिका बान कर लखि वृष रहे चुपाइ ।—विश्राम (शब्द॰) ।
४. बारह राशियों में से दूसरी राशि । दे॰ 'वृष' । उ॰—दुसह बिरह वृष सूर सम चलन कहत अब आप । तिय को कोमल प्रेम तरु क्यों सहिहै संताप ।— स॰ सप्तक, पृ॰ ३६५ ।