बृहती
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बृहती संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. कटाई । बरहट । बनभंटा ।
२. विश्वावसु गधर्व की वीणा का नाम ।
३. उत्तरीय वस्त्र । उपरना ।
४. कंटकारी । भटकटैया ।
५. सुश्रुत के अनुसार एक मर्मस्थान जो रीढ़ के दोनों ओर पीठ के बीच में है । यदि इस मर्मस्थान में चोट लगे तो बहुत अधिक रक्त जाता हे और अंत में मृत्यु हो जाती है ।
६. एक वर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में नो अक्षर होते हैं ।
७. वाक्य ।