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बेलन्द

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बेलंद † वि॰ [फा॰ बलंद]

१. उँचा । उ॰—(क) पद बेलद परे जो पाऊँ । तो लाकौ घर लोक न ठाऊँ ।—विश्राम (शब्द॰) ।(ख) रघुराज ब्याह होत ह्वै गईँ बेलंद आँखें मिथिला निवासिन मिताई नई कीन्हें हैं ।—रघुराज (शब्द॰) ।

२. जो बुरी तरह परास्त या बिफलमनोरथ हुआ हो । (व्यंग्य) ।