बेह
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बेह पु † ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ वेध]
१. छेद । छिद्र । सूराख । उ॰— (क) भुज उपमा पौनारि न पूजी, खीन भई तेहि चिंत । ठावहि ठाँव वह भे हिरदै ऊभि साँस लेई निंत ।—जायसी—ग्रं॰, (गुप्त), पृ॰ १९५ ।
२. चोट । घाव । (ख) अनिंख चढ़े अनोखी चित चढ़ि उतरै न, मन मग मुँद जाको वह सब और तें ।—घनानंद, पृ॰ १२ ।
बेह पु ^२ संज्ञा स्त्री॰ [?] बाँह । भुजा । उ॰—संकट मै हरि बेह उबारी । निस दिन सिमरो नाम मुरारी ।—रामानंद॰, पृ॰ ७ ।
बेह ^३ वि॰ [फा़॰] अच्छा । भला । सुंदर [को॰] ।