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बैतलमाल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बैतलमाल संज्ञा पुं॰ [अ॰ बैत उल माला] वह व्यंक्ति जिसका कोई वारिस न हो । लावारिस । उ॰—एक लखनऊ का मित्र यों बावला या बेहाल घूमता बैतलमाल बन राहा है ।—प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰ ११२ ।