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बैसना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बैसना पु † क्रि॰ स॰ [सं॰ वैशन] बैठना । उ॰—(क) देखा कपिन जाइ सो बैसा । आहुति देत रुधिर अरु भैसा ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) ऐसी को ठाली बैसी है तो सो मूंड़ खवावै । झूठी बात तुसी सी बिन कन फटकत हाथ न आवै ।—सूर (शब्द॰) । (ग) मन मौज करि बैसब हो, भुलब बहोरि बहोरि ।—गुलाल॰, पृ॰ ७८ ।