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बोरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बोरना † क्रि॰ स॰ [सं॰, हिं॰ ब्रुड बूड़ना]

१. जल या किसी और द्रव पदार्थ में निमग्न कर देना । पानी या पानी सी चीज में इस प्रकार डालना कि चारों पानी ही पानी ही जाय । डुबाना ।

२. डुबाकर भिगोना । पानी आदि में डालकर तर करना । जैसे,—कई बार बोरने से रंग चढ़ेगा । उ॰—मानो मजीठ की माठ ढुरी इक ओर ते चाँदनी बोरति आवति ।—नृपसंभु (शब्द॰) ।

५. कलंकित करना । बदनाम कर देना । जैसे, कुल बोरना, नाम बोरना । उ॰— (क) तासु दूत ह्वै हम कुल बोरा ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) गावहिं पचरा मूड़ कँपावहिँ बोरहिँ सकल कमाई हो ।—गुलाल॰, पृ॰ २२ ।

४. युक्त या आवेष्टित करना । योग देना या मिलाना । उ॰—कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत ।—तुलसी (शब्द॰) ।

५. धुले रंग में डुबाकर रँगना । उ॰—लागी जबै ललिता पहिरावन कान्ह को कंचुकी केसर बोरी ।—पद्माकर (शब्द॰) ।