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बोलनिहारा

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शब्दसागर

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बोलनिहारा संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'बोलनहार' । उ॰—पराधीन देव हौं स्वाधीन गुसाई । बोलनिहारे सो करै बलि बिनय कि भाई ।—तुलसी (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—उठना । उ॰—आप ही कुंज के भीतर पैठि सुधारि कै सुंदर सेज बिछाई । बातै बनाय सटा के नटा करि, माधो सो आय कै राधा मिलाई । आली कहा कहों हाँसी की बात बिदूषक जैसी करी निठुराई । जाय रह्यो पिछवारे उतै पुनि बोलि उठ्यों वृषभानु की नाई ।—(शब्द॰) । यौ॰—बोलना चालना = बात चीत करना ।