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ब्य़ोँतना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ब्य़ोँतना क्रि॰ सं॰ [हिं॰ ब्योंत]

१. कोई पहनावा बनाने के लिये कपड़े को नापकर काटना छाटना । नाम से कतरना । उ॰—(क) मोटा एक थान आय़ो राख्यों है बिछाइ के । लावो बेगि यहि क्षण मन की प्रवीन जानी, लायो दुख आनि ब्य़ोंति लई है सियाइ के —प्रिय़ा (शब्द॰) । (ख) कह्यो न पछारयो । सूर स्वामी अति रिस भीम कि भुजा कै मिस ब्योंतत बसन जिमि तन फारयो ।— सुर॰, १० । ४२१७ । (ग) दरजी किते तिते धन गरजी । ब्योंतहि पटु पट जिमि नृप मरजी —गोपाल (शब्द॰) । (२) मारना । काटना । मार ड़ालना । (बाजारी) ।