ब्रह्मचरज
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]ब्रह्मचरज पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ ब्रह्मचर्य] दे॰ 'ब्रह्मचर्य' । उ॰—ब्रह्म- चरज ब्रत रत मतिधीरा । तुम्हहि कि करइ मनोभव पीरा ।—मानस, १ ।१२९ ।
ब्रह्मचरज पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ ब्रह्मचर्य] दे॰ 'ब्रह्मचर्य' । उ॰—ब्रह्म- चरज ब्रत रत मतिधीरा । तुम्हहि कि करइ मनोभव पीरा ।—मानस, १ ।१२९ ।