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ब्रह्मरन्ध्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ब्रह्मरंध्र संज्ञा पुं॰ [सं॰ ब्रह्मरन्ध्र] मुर्धा का छेद । ब्रह्मांडद्वार । मस्तक के मध्य में माना हुआ गुप्त छेद जिससे होकर प्राण निकलने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है । कहते हैं, योगियों के प्राण इसी रध्र से निकलते हैं । उ॰—ब्रह्मरंध्र फोरि जीव यों मिल्यौ बिलोक जाइ । गेह चुरि ज्यो चकोर चंद्र में मिलै उड़ाई ।—केशव (शब्द॰) ।