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ब्रह्मसमाज

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ब्रह्मसमाज संज्ञा पुं॰ [सं॰ ब्रह्म + समाज] एक नया संप्रदाय जिसके प्रवर्तक बंगाल के राजा राममोहन राय थे । विशेष—इसमें उपनिषदों में निरूपित एक ब्रह्म की उपासना और मनुष्यमात्र के प्रति भ्रातृभाव का उपदेश मुख्य है । बंग देश के नवशिक्षितों में एक समय इसका बहुत प्रचार हो चला था ।