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ब्रह्मस्तेय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ब्रह्मस्तेय संज्ञा पुं॰ [सं॰] गुरू की अनुमतकि के बिना अन्य को पढाया हुआ पाठ सुनकर अध्ययन करना । (मनु॰) ।