भटक्कना
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क्रिया
[सम्पादित करें]भटक्कना
- लक्ष्य या मार्ग का पता न होने के कारण इधर-उधर भटकते रहना।
- मानसिक रूप से अस्थिर या भ्रमित होकर इधर-उधर विचरण करना।
- उद्देश्यहीन रूप से यहाँ-वहाँ घूमते रहना।
उच्चारण
[सम्पादित करें]उदाहरण वाक्य
[सम्पादित करें]- वह नौकरी की तलाश में शहरों में भटक्कता रहा।
- बिना दिशा के जीवन भटक्कते रहने जैसा है।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भटक्कना क्रि॰ अ॰ [देश॰] भड़क उठना । भड़कना । उ॰—नव- हत्थो मत्थो बड़ो रीस भटक्कै रार ।—बाँकी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ११ ।