भण्डारा
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संज्ञा
[सम्पादित करें]भण्डारा
- किसी धार्मिक या सामाजिक अवसर पर सामूहिक रूप से निःशुल्क भोजन करवाने की व्यवस्था।
- मंदिर या आश्रम में श्रद्धालुओं के लिए आयोजित भोजन प्रसाद।
- भोजन के अलावा दान में दी गई वस्तुओं का सामूहिक वितरण।
उच्चारण
[सम्पादित करें]उदाहरण वाक्य
[सम्पादित करें]- मंदिर में आज प्रसाद और भण्डारे का आयोजन है।
- संत की पुण्यतिथि पर भण्डारा करवाया गया।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भंडारा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ भंडार]
१. दे॰ 'भंडार' ।
२. समूह । झुंड । क्रि॰ प्र॰—जुड़ना वा जुटना ।—जोडना ।
३. साधुओं का भोज । वह भोज । जिसमें संन्यासी ओर साधु आदि खिलाए जाते है । उ॰—विजय कियो भरि आनंद भारा । होय नाथ इत ही भंडारा ।—रघुराज (शब्द॰) । कि॰ प्र॰—करना ।—देना ।—होना ।—जुड़ना ।—खाना ।
४. पेट । उ॰—उक्त पुरुष ने अपने स्थान से उचककर चाहा कि एक हाथ कटार का ऐसा लगाए कि भंडार खुल जाय, पर पथिक ने झपटकर उसके हाथ से कटार छिन लिया ।— अयोध्यासिंह (शब्द॰) । मुहा॰—भंडारा खुल जाना = पेट फटने से आँतों का निकल पड़ना । उ॰—और बाँक बनौट से वाकिफ न होते तो भंडारा खुल जाता ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ १३६ ।