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भरथर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भरथर ‡ भरथरी संज्ञा पुं॰ [सं॰ भर्तृहरि] दे॰ 'भर्तृहरि' । उ॰— (क) सुणि भरथर नानक एह बाणि । जित पावहि ं सो निरवाणि ।—प्राण॰, पृ॰ ७८ । (ख) मिले भरथरी अरु पिंगला ।—हिंदी प्रेमगाथा॰, पृ॰ २२६ ।