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भरभ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भरभ पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ भ्रम]

१. भ्राति संशय । संदेह । धोखा ।

२. भेद । रहस्य । उ॰— उधरि परैगी बात भरम की लखि लैहैंगी सब री ।—घनानंद॰, पृ॰ ५३३ । मुहा॰—भरम गँवाना =अपना भेद खोलना । अपनी थाह देना । भरम बिगाड़ना = भंड़ा फोडना । रहस्य खोलना ।