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भरभराना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भरभराना क्रि॰ अ॰ [अनु॰]

१. (रोआँ) खड़ा होना । रोमांच होना । (इस अर्थ में इसका प्रयोग केवल 'रोआँ' शब्द के साथ होता है ।)

२. व्याकुल होना । घबराना । उ॰— भर- भराय देखे बिना देखे पल न अघार्य । रसनिधि नेही नैन ये क्यों समुझाए जायँ ।—रसनिधि (शब्द॰) ।