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भरहरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भरहरना क्रि॰ अ॰ [अनु॰] दे॰ 'भरभराना' । उ॰— (क) जाको सुयश सुनत अरु गावत पाप वृंद जैहैं भजि भरहरि ।— सूर (शब्द॰) । (ख) दानौ दल छल प्रबल सुपेमि करि भजै सूर सकल भ्रमित भर भरहरि ।—अकबरी॰ पृ॰ ३२७ ।

२. दे॰ 'भहराना' ।—फूटयो पहार मत रंक ह्वै अग्ध खंड गढ़ भरहरयो ।— हम्मीर॰, पृ॰ ४३ ।