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भरुहाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भरुहाना † ^१ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ भार या भारी + आना या हरना (प्रत्य॰)] घमंड करना । अभिमान करना । उ॰— (क) अब वे भरुहाने फिरै कहुँ डरत न माई । सूरज प्रभु मुँह पार कै भए ढीठ बजाई ।— सूर (शब्द॰) । (ख) नीच एहि बीच पति पाइ भरुहाइगो बिहाइ प्रभु भजन बचन मन काय को ।— तुलसी (शब्द॰) । (ग) गे भरुहाय तनिक सुख पाए ।—जग॰ बानी, पृ॰ ६७ ।

भरुहाना ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ भ्रम]

२. बहकाना । धोखा देना । भ्रम में डालना । उ॰— तुमको नंद महर भरुहाए । माता गर्भ नहीं उपजे तौ कहौ कहाँ ते आए ।— सूर (शब्द॰) ।

२. उत्तेजित करना । बढ़ावा देना । उ॰— भरुहाए नट भाट के चपरि चढ़ै संग्राम । कै वे भाजे आइहैं कैं बाँधे परिनाम ।— (शब्द॰) ।