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भस्मक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भस्मक संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. भावप्रकाश के अनुसार एक रोग जिसमें भाजन तुरंत पच जाता है । भस्माग्नि । विशेष— कहते हैं, बहुत अधिक और रूखा भोजन करने से मनुष्य का कफ क्षीण हो जाता है और वायु तथा पित्त बढ़कर जठराग्नि को बहुत तीव्र कर देता है; और तब जो कुछ खाया जाता है, वह तुरत भस्म हो जाता है, परंतु शौच बिलकुल नहीं होता । इसमें रोगी को प्यास, पसीना, दाह और मूर्छा होती है और वह शीघ्र मर जाता है । इस रोग को भस्मकीट भी कहते हैं ।

२. बहुत अधिक भूख ।

३. सोना ।

४. रजत । चाँदी ।

५. विडंग ।

५. एक नेत्ररोग । आँखों की एक व्याधि (को॰) ।