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भाँड़ना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भाँड़ना पु † ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ भण्ड] व्यर्थ इधर उधर घूमना । मारे मारे फिरना । उ॰— सकल भुक्त भाँड़े घने चतुर चलावन हार । दादू सो सूझइ नहीं तिसका वार न पार ।— दादू (शब्द॰) ।

भाँड़ना ^२ क्रि॰ स॰

१. किसी की चारों ओर निंदा करते फिरना । किसी को बुहत बदनाम करते फिरना ।

२. नष्ट भ्रष्ट करना । बिगाड़ना । खराब करना । उ॰— कहे की न लाज अजहूँ न आयो बाज पिय सहित समाज गढ़ राँड़ कैसो भाँड़िगो ।— तुलसी (शब्द॰) ।

३. भँड़ैती करना । मजाक करना । प्रेम से अपमानित करना । उ॰— जीत्यों लड़ैती को संग गुपाल सो गारी दई भँड़वा कहि भाँड़यो ।—ब्रज॰ ग्रं॰, पृ॰ २९ ।