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भाँड़ा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भाँड़ा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ भाण्ड]

१. बरतन । बासन । पात्र ।

२. बड़ा बरतन । जैसे, हंडा, कुंडा इत्यादि । मुहा॰—भाँड़े में जी देना = किसी पर दिल लगा होना । उ॰— को तुम उतर देय हो पाँड़े । सो बोलै जाको जिव भाँड़े ।— जायसी (शब्द॰) । भाँड़े भरना = पश्चात्ताप करना । पछताना । उ॰— तब तू मारिबोई करति । रिसनि आगे कहि जो आवनि अब लै भाँड़े भरति ।— सूर (शब्द॰) ।

भाँड़ा ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ भाँड़]

१. भाँड़पन ।

२. भाँड़ का काम । उ॰— कहूँ भाँड़ भाँड़यो करैं मान पावै ।— केशव (शब्द॰) ।