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भाँवना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भाँवना † क्रि॰ स॰ [सं॰ भ्रमण]

१. किसी चीज को खराद या चक्कर आदि पर घुसाना । खरादना । कुनना ।

२. बहुत अच्छी तरह गढ़कर और सुंदरतापूर्वक बनाना । उ॰— (क) साँचे की सी ढारी अति सूछम सुधारि काढ़ी केशोदास अंग अँग भाँइ के उतारी है ।— केशव (शब्द॰) । (ख) गढ़ि गुढ़ि ग्रीवा छोलि छोलि कूँद की सी भाँई बातें जैसी मुख कहौ तैसी उर जब आनिहौ ।— तुलसी (शब्द॰) । (ग) भाँई ऐसी ग्रीवा भुज पान सों उदर अरु पंकज सो पाँइ गति हंस ऐसी जासु है ।— केशव (शब्द॰) ।