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भाथ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भाथ पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ भस्त्रा, पा॰ भत्था] धौंकनी । उ॰— (क) नृप चल्यो बान भरि भाथ में । लिए सरासन हाथ में ।— गोपाल (शब्द॰) । (ख) इनके बिनु जे जीवत जग में ते सब श्वास लेत जिमि भाथ ।— भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ४५३ ।