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विक्षनरी:भारतीय भाषा कोश १०

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2701वहसर्वनाम----बात चीत में दूर स्थित या परोक्ष व्यक्ति या पदार्थ को संकेत का शब्द।----ओह----वोह----सु----हू, हूअ----तो, ती, तें----ते--------सि, तेंओ, ताइ----से----आतडु (पुं.) आमॆ (स्त्री.) आ (वि.)----अवन्, अदु, अवळ्, अन्द----आ, अवन्, अवळ् अतु----अदु, अवनु, अवळु, आ----
2702वहाँअव्यय----उस स्थान में, उस जगह।----ओथे----वहां----तति----हुते----तेथे----त्यां, ते जगह----ओखाने----तात----सेठि, से स्थान रे से जागा रे----अक्कड----अंगे----अविटॆ----अल्लि----
2703वांछनीयविशेषण----जिसकी वांछा या कामना की गई हो या की जाने वाली हो।----चाहुण योग----मत्लूब----ज़रूरी, मतलूब----चाहिणजोगु----वांछनीय----वांछनीय----वाञ्छनीय----बांछनीय, बांछित----बांछनीय----वांछनीयमु, अभिलषणीयमु----विरुंबत्तक्क----अभिलषणीयं----वांछनीय----
2704वांछितविशेषण----चाहा हुआ, इच्छित।----मन चिंदिआ, इच्छित----मत्लूबा----यॊछ़मुत----चाह्यलु----वांछित, इच्छित----वांछित, चाहेलुं----वांछित----बांछित, बिचरा----बांछित----बांछितमु----बिरुंबिय----आग्रहिच्च----बयसिद, अपेक्षिसिद----
2705वाङ्मयपुंलिंग----लिपिबद्ध विचारों का समस्त संग्रह या समूह, साहित्य।----साहित्त----अदब----साहत्य, अदब----साहित्यु----वाङ्मय----वाङ्गमय, साहित्य----वाङ्मय----साहित्य, लिखित साहित्य----बाङ्मय----वाङ्मयमु----इलक्कियम्----साहित्यं, वाङ्मयं----साहित्य----
2706वाणिज्यपुंलिंग----बहुत बड़े पैमाने पर होने वाला व्यापार।----वणज----तिजारत----कारु॑बार----वणिजु----वाणिज्य, व्यापार----वाणिज्य, वेपार----वाणि॒ज्य (न)----बाणिज्य, बणिज----बाणिज्य----वाणिज्यमु----वणिगम्----वाणिज्यं, व्यापारं----बाणिज्य----
2707वाणीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--मुँह से निकलने वाली सार्थक बात, वचन, स्वर ;जिह्वा, जीभ ;सरस्वती।--बाणीजीभवाणी--लफ़्ज़ (कलाम)ज़बान---आवाज़ज़्यवसरु॑स्वती--वाणीजिभ॒सरस्वती--वाचा, वाणीजिव्हा, जीभसरस्वती--वाणी, बोली, वाचाजीभसरस्वती--वाणी॒, वचन, स्वर (न)जिह्वा, जीभसरस्वती--बाणी, कथाजिभासरस्वती--बाणी----वाणिवाणिवाणि--शॊल, कुरल्नाक्कुकलैमगळ्, सरस्वति--वचनं, स्वरंनाक्कु, जिह्वसरस्वति--नुडिनालिगॆसरस्वति--
2708वातानुकूलनपुंलिंग----यांत्रिक या वैज्ञानिक प्रक्रिया से ऐसी व्यवस्था करना कि किसी घिरे हुए स्थान के तापमान पर उसके बाहर के तापमान का प्रभाव न पड़ने पाए अर्थात् उस स्थान के अंदर की गर्मी या सर्दी नियंत्रित और नियमित रहे (एयर कंडिशनिंग)।----एअर कंडीशन, वातानुकूलन----एयर कंडिशनिंग----मुताबिकि मूसिम, एयर कंडिशनिंग----एयर कंडीशनिंग वातानुकूलन----वातानुकूलन----वातानुकूलन----वातानुकूलन----शीत-ताप नियंन्त्रण, बातानुकूलन----बातानुकूळन----समशीतोष्णमु----कुळ्रि पदप् पडुत्तल्----वातानुकूलनं, ऎयर॒ कंडिशनिंग----वातानुकूलनतॆ----
2709वातावारणपुंलिंगपुंलिंग---वायु की वह राशि जो पृथ्वी, ग्रह आदि पिंडों को चारो ओर से घेरे रहती है, वायुमंडल ;परिस्थिति, पर्यावरण।---वा मंडल, वातावरन्वा मंडल, वातावरन्---फ़ज़ामाहौल (फ़ज़ा)---फिज़ामाहा॑ल---वातावरणु, वायुमंडलु----वातावरण, वायुमंडलवातावरण, परिस्थिति---वाताबरण, वायुमंडलपरिस्थिति---वायुमण्डलपरिस्थिति, वाताबरण---बायुमंडलपरिस्थिति, बाताबरण---बाताबरण, बायुमंडळ----वातावरणमु, शीतोष्ण स्थितिवातावरणमु, शीतोष्ण स्थिति---वायु मण्डलम् काट॒ट॒ मण्डलम्सूळ्रनिलै---अन्तरीक्षंचाट॒ट॒पाटु---वायुमंडलसन्निवेश---
2710वात्सल्यपुंलिंग----माता-पिता के हृदय में होने वाला अपने बच्चों के प्रति नैसर्गिक प्रेम।----ममता----मुहब्बत----टठिन्यार----माउ-पीउ जो बा॒र लाइ प्यारु----वात्सल्य----बात्सल्य, प्रेम----वात्सल्य----बात्सल्य, सन्तान-प्रीति----बात्सल्य----वात्सल्यमु----कुऴन्दैगळिडम्, काट्टुम अन्बु----वात्सल्यं----वात्सल्य----
2711वाद-विवादपुंलिंग----खंडन-मंडन, तर्क-वितर्क, वाद-विवाद।----वाद-विवाद----बहसो मुबाहसा----बहसु॑-ब॑ह॑स----वाद-विवादु, बहिसु-मुबाहिसो----वादविवाद----वादविवाद, तकरार----वाद-विवाद, तर्क-वितर्क----वाद-बिबाद, तर्क-बितर्क----बाद-बिबाद----वाग्वादमु, वादन----वाक्कुवादम्----चर्च, वाद विवादं----वाद-प्रतिवाद----
2712वादीपुंलिंग----वह जो न्यायालय में किसी के विरुद्ध कोई अभियोग उपस्थित करे, फरियादी।----वादी----मुद्दई़ (फ़र्यादी)----मुदयी----मुद्दई----वादी----वादी, फरियादी----वादी, फरियादी----बादी----बादी----वादि----वादि----वादि----फिर्यादि, वादि----
2713वायुस्त्रीलिंग----हवा, वात।----वा, हवा----हवा----हवा, वाव----हवा, वाउ----वायु----वायु, वात, हवा----हाओया, वायु, वात----बायु, बताह----बायु----वायुवु----काट॒ट॒----वायु----गळि----
2714वायुमार्गपुंलिंग----हवाई मार्ग, विमान मार्ग।----हवाई रसता----फ़ज़ाई रास्ता----हवाई वथ----हवाई रस्तो----वायुमार्ग----वायुमार्ग----वायुमार्ग----बायु मार्ग, बिमानपथ----आकाशमार्ग, बिमानमार्ग----वायुमार्गमु----विण् वऴि, आगाय विमान वऴि----विमान मार्गं----वायुमार्ग----
2715वायु सेनास्त्रीलिंग----देश के वायुमार्गों की रक्षा करने वाली सेना, हवाई सेना।----हवाई सैना----फ़िज़ाइया----हवाई फोज----हवाई फौज----वायुसेना----हवाई दल----विमान वाहिनी----बायु सेना----बायुसेना----वायुसैन्यमु----विमानप्पडै----व्योमसेन----वायुसेनॆ----
2716वार्तालापपुंलिंग----बातचीत, कथोपकथन, संवाद।----गल्ल बात, गल्ल कत्त्थ----गुफ़्तगू----कथ-बाथ----गुफ़्तगू, गा॒ल्हि-बो॒ल्हि----वार्तालाप, संभाषण, संवाद----वार्तालाप, संवाद----कथावार्ता, वार्तालाप----कथोपकथन, बार्तालाप----बार्ताळाप----संभाषण----उरैयाडल्----संभाषणं----मातुकतॆ, संभाषणॆ----
2717वार्षिकविशेषणविशेषण---प्रतिवर्ष होने वाला, एक वर्ष के बाद होने वाला ;एक वर्ष तक चलता रहने वाला।---सालानासालाना---सालाना----व॑रियुकवहरुक---सालियानो----वार्षिकवार्षिक---वार्षिकवार्षिक---वार्षिक, वात्सरिकवर्षव्यापी---वार्षिक, बछेरेकीयाएबछरीया---बार्षिक----वार्षिकमुवार्षिकमु---वरुडान्दिरवरुडम् मुळुदुम नडक्किर॒---वार्षिकं, उण्टोटाण्टुवार्षिकं---वार्षिकवार्षिक---
2718वाष्पपुंलिंग----भाप।----भाफ----भाप----बाहु॑----बाष्प, बाफ----बाष्प, वाफ----वराळ----भाप, वाष्प----बाष्प, भाप----बाष्प----बाष्पमु, आविरि----नीरावि----बाष्पं, नीरावि----आवि----
2719वास्तविकविशेषण----जो वास्तव में हो, यथार्थ, सत्य।----वासतविक----हक़ीक़ी----प॑ज़िपा॑ह्य, असली----हकीकी, असुली----वास्तविक----वास्तविक, खरेखरुं, यथार्थ----वास्तविक, यथार्थ----बास्तविक, यथार्थ, सत्य----बास्तबिक----वास्तवमु----वास्तवमान् उण्मैयान----वास्तवं, यथार्थं----निजवाद, यथार्थ----
2720वाहनपुंलिंग----ऐसा साधन जिस पर चढ़कर लोग कहीं आते जाते हों।----वाहन----सवारी----सवार्य----वाहणु----वाहन----वाहन----वाहन----बाहन, यान----बाहन----वाहनमु----वाहनम्, सवारि, वण्डि----वाहनं----वाहन, गाडि----
2721विकरालविशेषण----भीषण आकृति वाला, डरावना।----डराउणा----मुहीब----खतरनाक, व्यकु॑राल्य----ख़ौफ़नाकु----विक्राळ----विकराळ, डरामणुं----विकराल, भीषण----भीषण, भयानक----बिकराळ----विकृत्तमु, विकटमु----बयंगरमान----भयंकरं----विकराळ----
2722विकलविशेषण----बेचैन, व्याकुल।----विआकुल, बैचैन----बेकल (बेचैन)----गमगीन----बेचैनु, व्याकुलु----विकल, व्याकुळ----विकळ, व्याकुल----विकल, आकुल----ब्याकुल----बिकळ----विकलमु, व्याकुलमु----मन अमैदियट॒ट॒----व्याकुलन्----व्याकुल----
2723विकासपुंलिंग----प्रसार, अभिवृद्धि, उन्नति।----विकास----तरक़्क़ी (फ़रोग़)----फ॑लाव----विकासु----विकास, उन्नति----विकास उत्कांति----विकास, प्रसार, उन्नति----बिकाश, प्रसार----बिकास----विकासमु----मलीर्च यळर्चि, मुन्नेट॒ट॒म्----विकासं----विकास----
2724विक्रमपुंलिंग----पौरुष, बल, वीरता, पराक्रम।----बल----मर्दानगी (शुजाअ़त)----बल, ताकथ----बहादुरी, पराक्रमु----विक्रम, पराक्रम----विक्रम, पराक्रम, बळ----पौरुष, बल, वीरता----बिक्रम, बल----बिक्रम----विक्रममु----पराक्किरमम्, वीरम्----पराक्रमं----पराक्रम----
2725विख्यातविशेषण----प्रसिद्ध, मशहूर।----प्रसिद्ध----मशहूर----मशहूर----मशहुरु----विख्यात, प्रसिद्ध----विख्यात, मशहूर----विख्यात, प्रसिद्ध----विख्यात, प्रख्यात, प्रसिद्ध----बिख्यात----विख्यातमु----पिरसिद्दि पॆट॒ट॒, पुगऴ् पॆट॒ट॒----विख्यातन्, विख्यातं----विख्यात----
2726विचारपुंलिंगपुंलिंग---मन ही मन तर्क-वितर्क करके कुछ सोचने या समझने की क्रिया या भाव, मनन, चिंतन ;मत, राय, धारणा।---विचारविचार---ख़्याल----ख़याल----वीचारु----विचारमत---विचारअभिप्राय, उद्देश---विचार, मननमत, धारणा---बिचार, चिन्ता बिबेचनामत, अभिमत, धारणा---बिचारबिचार---आलोचनअभिप्रायमु---ऎण्णम्करुत्तु---विचारंअभिप्रायं---आलोचनॆअभिप्राय---
2727विचार-विमर्शपुंलिंग----किसी समस्या पर विचारों का आदान-प्रदान, सलाह-मशवरा।----सलाह-मशवरा----तबादलए ख़्याल----सोच-समु॑ज----सलाह-मस्लिहत----विचार-विमर्श----विचार-विमर्श, सलाह----विचार-विमर्श----बिचार-बिलोचना, बिचार-परामर्श----बिचार-बिमर्श----परामर्श, संप्रतिंपु----करुत्तुप-परिमाट॒ट॒म् आलोचनै----आशय विनिमयम्----विचार विमर्श, सळहॆ----
2728विचित्रविशेषण----साधारण से भिन्न, अद्भुत, अनोखा।----बचित्तर----अ़जीब----अजीब----विचित्रु, अजीबु----विचित्र----विचित्र, अद्भुत----विचित्र, अद्भुत----बिचित्र, अभिनव----बिचित्र----विचित्रमु----विचित्तिरमान, अदिशयमान----विचित्रं, अद्भुतं----विचित्र----
2729विजयस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---शत्रु या प्रतिस्पर्धी को हराने का भाव, जीत;सफलता, कामयाबी।---जित्तजित्त---फ़तह (ज़फ़र)कामयाबी (जीत)---फतह----विजय, जीतकामयाबी---विजययश---विजय, जीतसफलता, फतेह---विजय, जितसफलता, विजय---जय, विजयसफलता, कृत कार्यता---बिजय----विजयमुविजयमु---वेट॒टि॒जयम्---विजयंसाफल्यं---गॆलुवुसाफल्य---
2730विजेतापुंलिंग----जीतने वाला, विजयी।----जेतू----फ़ातेह----जेनन वा॑ल, फातेह, फतह हासिल करन वा॑ल----विजयी, जीतींदड़ु----विजयी----विजेता, विजयी----विजयी----बिजेता----बिजेता----विजेत----जयित्तवन् वॆट॒टि॒ पॆट॒टि॒वन्----विजेतावु----गॆद्दव, विजयि----
2731विज्ञानपुंलिंग----आविष्कृत सत्यों तथा प्राकृतिक नियमों पर आधारित क्रमबद्ध तथा व्यवस्थित ज्ञान।----बिगिआन----साईंस (इ़ल्म)----साइनस----विज्ञानु, साइन्स----विज्ञान----विज्ञान----विज्ञा॒न (ग्ग)----बिज्ञान----बिज्ञान----विज्ञानमु, शास्त्रमु----विञ्ञानम्----सयन्स्, शास्त्रं----विज्ञान----
2732विज्ञापनपुंलिंगपुंलिंग---प्रचार तथा बिक्री आदि के उद्देश्य से पत्रिकाओं आदि में प्रकाशित कराई जाने वाली सूचना।प्रचार आदि के उद्देश्य से बांटी जाने वाली सामग्री, इश्तहार।---इशतिहारइशतिहार---इश्तिहार (ऐ़लान)----इश्तिहारइश्तिहार---एधिराईइश्तिहारु---जाहिरातविज्ञापन---विज्ञापन, जाहेर खबर----विज्ञा॒पन (ग्ग)इस्तिहार, विज्ञप्ति---बिज्ञापन, जाननीजाननी, प्रचारपत्र---बिज्ञापन----प्रकटनप्रकटन---विळंबरम्विञ्ञापनम्---परस्यंनोट्टीस्---प्रकटनॆजाहीरातु---
2733विडंबनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---क्रूर परिहास ;असंगति।---मखौलमखौल---हैअत कज़ाईसितमज़रीफ़ी---बदन॑सीबी, करमु॑खुरकरमुखुर---डुखाईदंड़ च़थर, मखौलबाज़ीगैर मुनासिबत---विडंबनविसंगति---विडंबना, उपहास, मश्करीविसंगति---विडम्बनाअसङ्गति---विड़ंबनाबिसंगति, असंगति---विड़ंबना----विड्डूरमु----केलि, परिहासमपॊरुन्दामै---क्रूर विनोदंवैलक्षण्यं---विडंवनॆअसंगति---
2734वितरणपुंलिंग----बांटना, देना।----वंड, वंडाई----तक़्सीम----बा॑गरुन----विर्छ, विराहसत----वितरण----वितरण, दान----वितरण॒ विलि (न)----बितरण----बितरण----पंपिणी, वितरणमु----पंगीडु, पगिर्न्दु कोडुत्तल्----वितरणं----हंचुविकॆ, वितरणॆ----
2735विदूषकपुंलिंग----अपने वेश, चेष्टा, बातचीत आदि से अथवा ढोंग रचकर और दूसरों की नकल उतार कर लोगों को हंसाने वाला, मसखरा, नाटकों में इस प्रकार का पात्र।----भंड, मसखरा----मस्खरा (नक़्क़ाल)----मसखरु॑ विदूशक, जा॑कर----मस्खिरो चर्चाई----विदूषक----विदूषक, मश्करो----विदूषक, भाँड----बिदुषक, बहुवा----बिदूषक----विदूषकुडु----विदूषकन् कोमाळि----विदूषकन्----विदूषक----
2736विदेशपुंलिंग----स्वदेश से भिन्न कोई दूसरा देश।----परदेस----ग़ैर मुल्क (परदेस)----परदेस----विदेशु, परदेसु----परदेश----विदेश, परदेश----विदेश----बिदेश----बिदेश----विदेशमु, परदेशमु----वॆळिनाडु----विदेशं----परदेश----
2737विद्यास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---अध्ययन, शिक्षा आदि से अर्जित किया जाने वाला ज्ञान;किसी तथ्य या विषय का विशिष्ट और व्यवस्थित ज्ञान।---विदिआविदिआ---इल्म----आ॑लिमआ॑लिम---विद्या----विद्याविद्या---विद्या, ज्ञान----विद्या॒ (द्द)----बिद्याबिद्या, तत्त्व---बिद्या----विद्याविद्या---कल्वि, अरि॒वुआऴ्न्द अरि॒वु पुलमै---विद्या, ज्ञानंविज्ञानं---विद्यॆ, ज्ञानशास्त्र---
2738विद्यालयपुंलिंग----शिक्षण संस्थान (स्कूल)।----विदिआला----मद्रसा (मक्तब) (स्कूल)----स्कूल, च़ाटु॑हाल----विद्यालयु----विद्यालय----विद्यालय, शाळा----विद्या॒लय (द्द)----बिद्यालय----बिद्याळय----बिद्यालयमु----पळ्ळिळ्कूडम्----विद्यालयं----शालॆ----
2739विद्युतस्त्रीलिंग----बिजली।----बिजली----बिजली (बर्क़)----बिजली----विजु, बिजिली----विद्युत, वीज----विद्युत, वीजळी----विद्यु॒त (द्द)----विद्युत्, बिजली----बिद्युत----विद्युत्तु----मिन्सारम्----वैद्युति----विद्युत्----
2740विद्रोहपुंलिंग----राज्य या शासन के विरुद्ध किया जाने वाला आचरण और व्यवहार, उपद्रव।----विद्रोह, बगावत----बग़ावत (सरकशी)----बगावथ----विद्रोहु, बलिवो----विद्रोह, बंड----विद्रोह, बळवो----विद्रोह, उपद्रव----बिद्रोह----बिद्रोह----तिरुगुबाटु, विप्लवमु----पुरट्चि----विप्ळवं----विद्रोह----
2741विधर्मीपुंलिंगपुंलिंग---अपने धर्म के विपरीत आचरण करने वाला, धर्म भ्रष्ट;दुसरे धर्म का अनुयायी।---विधरमीविधरमी---मुल्हिदमुरतिद---दरमु॑ ब्रश्टवॅपरदरमुक---अधर्मीबिए धर्म जो---धर्मभ्रष्ट, अधर्मीपरधर्मी, विधर्मी---विधर्मी, अधर्मी----विधर्मी, धर्मभ्रष्टअन्य धर्मावलम्बी---बिधर्मी, अधर्मीबिधर्मी, अन्यधर्मी---बिधर्मी----परमतस्थुडुपरमतस्थुडु---मदतै अवमदिप्पवन्वेरु॒मदत्तवर्---मतविरोधिअन्यमतस्थन्---विधर्मिविधर्मि, अन्य धर्मावलंबि---
2742विनतीस्त्रीलिंग----विनीत भाव से की जाने वाली प्रार्थना अनुनय-विनय।----बेनती----इल्तिजा----गुज़ा॑रिश, ज़ारु॑पारु॑----वेनती----विनंति----विनंती, अरजी----विनति, प्रार्थना----मिनति----बिनति----विन्नपमु----वेण्डु कोळ्----विनयं, प्रार्थन, अपेक्ष----विन्नह----
2743विनयस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---विनम्रता और सौजन्य ;नम्रतापूर्वक की जाने वाली प्रार्थना या विनती।---बिनेबिने---इंकिसारी (इंकिसार)इल्तिजा---गुज़ा॑रिशव्यनय---निउड़त, वेनती, अर्ज्रुवेनती, अर्ज्रु---विनय, विनम्रताविनंति---विनय, विनम्रताविनंति---विनय, विनम्रता, सौजन्य----बिनयमिनति---बिनय----विनयमुविन्नपमु, प्रार्थन---अडक्कम् नर्पण्बुवेण्डु कोळ्---विनयंअपेक्ष---विनयअरिकॆ---
2744विनीतविशेषण---जिसमें विनय हो, विनयी, नम्र, सुशील और शिष्ट।----सुशील----मुन्कसिर----गुज़ारिशी, व्यनीत----निउड़त वारो, सुशीलु----विनीत, विनयी----विनीत, विनयी, सौम्य----विनीत, विनयी, नम्र----बिनीत, बिनयी----बिनीत----विनम्रुडु विनयशीलि----अडक्कमुळ्ळ, पणिबुल्ळ----विनीतन्----विनयशील----
2745विनोदपुंलिंगपुंलिंग---मन-बहलाव, मनोरंजन ;हंसी-ठट्ठा।---जी परचावा----तफ्रीह----ठठु॑-मसखरी----विंदुरखिल-मस्ख़िरी---विनोद, मनोरंजनथट्टा---विनोद, मोजमश्करी, मजाक---विनोद, मनोरंजनहासि-ठाट्ठा---बिनोद, मनोरंजनहाँहि-धेमालि---बिनोद----विनोदमुविनोदमु---मन मगिऴ्चिवेडिक्कै---विनोदंकळि-तमाश---मनरंजनॆविनोद---
2746विपक्षपुंलिंग----विरोधी पक्ष या दल।----विपक्ख----हिज़्बे मुख़ालिफ़----मुखा॑लिफ पार्टी----बी॒ धुरि, मुख़ालिफ पार्टी----विपक्ष----विपक्ष, विरोधी----विपक्ष----बिपक्ष----बिपख्य----प्रतिपक्षमु----ऎदिर्कट्चि----प्रतिपक्षं----ऎदुरु पक्ष----
2747विपुलविशेषण----संख्या या परिमाण में बहुत अधिक।----बहुत----कसीर----स्यठाह----तमामु घणो----विपुल----विपुल, विशाल----विपुल, अत्यधिक----बिपुल----बिपुळ----विपुलमु, विशदमु----मिग अदिगमान----विपुलं----बहळ----
2748विमलविशेषण----मल-रहित, निर्मल, साफ, दूषण रहित।----निरमल----साफ़ (पाक)----साफ, मलु॑, रॊस----निर्मलु----विमल, निर्मल----विमल, निर्मळ----विमल, निर्मल, स्वच्छ----बिमल, निर्मल----बिमळ, निर्मळ----विमलमु, निर्मलमु----माशट॒ट॒, तूय, शुद्दमान----पवित्रं, स्वच्छं----विमल, शुद्ध----
2749विमोचनपुंलिंगपुंलिंग---बंधन आदि खोलकर मुक्त करना, छुड़ाना या छोड़ना ;प्रकाशनोद्घाटन।---मोचणविमोचण---मुलूख़लासी (रिहाई)इज्रा---मॅकुलावुन, व्यमूचन----छोड़णु, खोलणुप्रकाशन लाइ, उद्घाटनु---सुटकाग्रंथ विमोचन, प्रकाशन---विमोचन, मुक्तिग्रन्थ प्रकाशन---छाड़ानो----बिमोचन, मोचनउन्मोचन---बिमोचन----विमुक्तिविडुदल---अविऴ्त्तु विडुदल्पुत्तग वॆळियीडु---विमोचिप्पिक्कल्प्रकाशनं---बिडुगडॆ, विमोचनॆउद्घाटनॆ---
2750वियोगपुंलिंगपुंलिंग---ऐसी अवस्था जिसमें दो जीव विशेषत: प्रेमी एक दूसरे से दूर हों और इस प्रकार उनमें मिलन न होता हो, विप्रलंभ ;उक्त अवस्था के फलस्वरूप पेमियों को होने वाला कष्ट।---वियोगवियोग---जुदाई, फुर्क़त----जुदा॑यी----वियोग, विछोड़ो, जुदाईविछोड़े जो कष्टु---वियोगविरह---वियोग, विरहविरह, दु:ख---वियोग (ज)विरह---बिच्छैद, एराएरिबिरह---बिजोगबिच्छेद, बिरह---वियोगमुविरहमु---कादलरिन् पिरिवुपिरिवाट॒टा॒मै---वियोगं, विरहंविरह दु:खं---वियोग, अगलिकॆविरह---
2751विराटविशेषण----बहुत बड़ा या व्यापक।----विराट----अज़ीमुश्शान----बडि बॊड----विराटु----विराट----विराट, भव्य----विराट, व्यापक----बिराट, बिशाल----बिराट----विराट्टु----मिगप्पॆरिय, नन्गु परविय----विराटं, व्यापकं----बहळ दॊड्ड----
2752विरामपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--क्रिया, गति, चाल आदि में होने वाला अटकाव, ठहराव या पड़ाव ;वाक्य की समाप्ति पर लगाया जाने वाला रुकने का चिह्न, पूर्णविराम ;विश्राम, आराम।--बिसरामबिसरामबिसराम--वक़्फ़ा (सुकून)फुलइस्टापआराम (सुकून)--छ़्यनछ़्यनछ़्यन--तर्सण य रुकिजण जी हालतबीहक जी निशानीआरामु--अडथळा, मुक्कामपूर्ण विरामविश्राम, आराम--विरामपूर्णविराम---विराम, विरतिदाँड़िविश्राम, जिरानो--बिराम, बिरतिबिराम चिह्न, यतिजिरणि, बिश्राम--बिराम----विराममु, विश्रांतिविरामचिह्नमुविश्रांति--इडैवेळिमुट॒ट॒प्पुळ्ळिओय्वु--विरामंपूर्ण विरामं, कुत्तुविश्रमं--तडॆ, विरामपूर्ण विरामविश्रांति--
2753विरोधपुंलिंग----किसी कार्य या प्रयत्न को रोकने या विफल करने के लिए विपरीत होने वाला प्रयत्न, विपरीतता।----विरोध----इख़्तिलाफ़----रुकावठ---------प्रतिकार----विरुद्धता, तकरार----वैपरीत्य, विरोधिता----बिरोधिता---------विरोधमु----विरोदम्, ऎदिर्प्पु----तटस्सप्पॆटुत्तल्----विरोध----
2754विलंबपुंलिंग----ऐसी स्थिति जिसमें अनुमान, आवश्यकता, औचित्य से अधिक समय लगे, देर, देरी।----देर, देरी----ताख़ीर (देर)----दीरी----देरि, अवेर----उशीर, विलंब----विलंब, वार----विलम्ब, देरि----बिलम्ब, पलम----बिळंब----आलस्यमु----तामदम्----विळंबं----तड----
2755विलयपुंलिंगपुंलिंग---एक पदार्थ का अथवा राज्य का किसी दूसरे पदार्थ या राज्य में घुलना-मिलना, विलीन होना।सृष्टि का नष्ट होकर अपने मूल तत्त्वों में मिल जाना, प्रलय अथवा ध्वंस, नाश।---बिलैपरलो---इंज़िमाम/इल्हाक़फ़ना (तह्लील)---मेलुन, हलहाकप्रलय---मिली हिकु थी, वञण जी हालतप्रलय---विलय, विलीनीकरणप्रलय---वियल, लयप्रलय, नाश---विलय, विलोपविनाश, प्रलय---मिल, चामिललय, प्रलय---बिळय, बिलय----विलयमुप्रळयमु---ऒन्रि॒विडुदलपडैप्पिन अऴिवु---लयनंविलयं---विलीन वागुविकॆप्रळय---
2756विलासपुंलिंगपुंलिंग---अधिक मूल्य की और सुख-सुभीते की वस्तुओं का ऐसा उपयोग या व्यवहार जो केवल मन प्रसन्न करने के लिए हो, शौकीनी ;अनुराग तथा प्रेम में लीन होकर की जाने वाली क्रीड़ा, सुखोपभोग, विषयानंद।---विलासविलास---अ़य्यासीअ़य्यासी---अया॑शी, व्यलासवॆशयबूग---शौकीनी, अयाशी, विलासुऐश-अशरत, भोग॒-विलासु---चैन, विलासभोगविलास---विलास, मोजभोगविलास---विलास, बाबुगिरिविलास, सुखभोग---भोग-बिलास, बिलासिताभोग-बिलास, बिषयानन्द---बिळास----विलासमुभोगमु---केळिक्कै वाऴ्क्कै, इन्ववाऴ्क्कैसिट॒टि॒न्बम्---आडंबरंक्रीडाविलासं---विलाससुखोपभोग---
2757विलीनविशेषणविशेषण---जो अपनी स्वतन्त्र सत्ता खोकर दूसरे में मिल गया हो ;गायब, लुप्त, अदृश्य।---विलीनविलीन---ज़म्ग़ायब---लीन ग़छुन, मीलिथ ग़छुनलीन---विलीन, मिली हिकु थी वियलु----विलीनलुप्त, अदृश्य---विलीनगायब, लुप्त---विलीन, अन्तर्हितलुप्त, अदृश्य---बिलीन, लीनलुप्त, अदृश्य---बिलीन----विलीनमुविलीनमु---मट॒ट॒ पोरुळडन इयैन्दुविट्टमरै॒न्दुपोन---अलिञ्ञ, विलयं प्रापिच्यकाणाताय---विलीनमायवाद---
2758विलोमविशेषणविशेषण---समान्य क्रम से न होकर विपरीत क्रम से होने वाला;विपरीत अर्थ वाला।---उलटाउलटा---नक़ीज़मुतज़ाद---बुलटु॑मुतज़ाद---उबतड़ि, उबतोउबती माना डीं॒दड़ु ज़िदु (लफ़्जु)---विलोमविपरीत अर्थाचा---विलोम, विपरीतऊलटुं---विपरीत, प्रतिकूलविलोम, विपरीत---बिलोम, बिपरीतबिपरीत अर्थबाचक---बिलोम----विलोममुविलोममु---वरिशै मुरैक्कु ऎदिरानऎदिररिडैयान पॊरूळ्---विलोमंविपरीतार्थकं---प्रतिकूल क्रमदविरुद्धार्थद---
2759विवशविशेषण----मजबूर, बाध्य, लाचार।----बेबस----लाचार----मजबूर----बेवसि----लाचार, विवश----विवश, लाचार, पराधीन----बाध्य, विवश----बिबश, बाध्य निरुपाय----बिबश----विधि लेनि----तन् वश मट॒ट॒, कट्टाय-प्पडुत्तप्पट्ट----निर्बधितन्, परवशन्----निरुपायनाद----
2760विवादपुंलिंगपुंलिंग---कहा-सुनी, तकरार ;पारस्परिक मतभेद।---झगड़ा, विवाद, मतभेदमतभेद---तक्रारइख़्तिलाफ़ा---बहसु॑-ब॑हसइख़्तिलाफ---विवादु, तक्रारुमतभेदु---वाद विवाद, भांडणमतभेद---विवाद, तकरार, झघडो----विवाद, झगड़ाविरोध---काजिया, तर्कातर्किमनोमालिन्य, मतभेद---बिबाद----विवादमुविवादमु---तकरारूकरुत्तु वेट॒ट॒मै---विवादंअभिप्राय भेदं---जगळभिन्न अभिप्राय---
2761विवाहपुंलिंगपुंलिंग---शादी, पाणिग्रहण ;उक्त के अवसर पर होने वाला उत्सव या धार्मिक कृत्य।---विआह----निकाह (शादी)निकाह (शादी)---नेथु॑रखाँदर---विहांवु, शादी----विवाहविवाह विधि---विवाह, लग्नलग्नविधि---विवाह, परिणय----बिबाह, बियाबिबाह-कार्य---बिबाह----विवाहमुविवाहमु---तिरुमणम्तिरुमण विऴा, कल्याणम्---विवाहंविवाहाघोषं---मदुवॆमुदुवॆ---
2762विवेकपुंलिंग----सत् और असत् का निर्णय करने वाली बुद्धि, सुबुद्धि।----बिबेक----तमीज़----तमीज़----विवेकु----विवेक----विवेक----विवेक----बिबेक----बिबेक----विवेकमु----पगुत्तरि॒वु----विवेकं----अरिवु----
2763विशालविशेषणविशेषण---बड़ा, बृहद्;भव्य, शानदार।---विशाल----अ़ज़ीमुश्शानशानदार---अज़ीम, व्यशालव्यशाल---विशालु----विशालविशाल---विशाल, मोटुं----बड़ो, वृहद, विशाल, विपुलभव्य (ब्ब)---बिशाल, बिराट्भव्य, प्रकाण्ड---बिशाळ----विशालमुभव्यमु---विशालमान, अऴगान----विशालंगंभीरमाय---दॊड्ड, विशालवादभव्य---
2764विशिष्टविशेषणविशेषण---(वस्तु) जिसमें औरों की अपेक्षा कोई बहुत बड़ी विशेषता हो ;(व्यक्ति) जिसे अन्यों की अपेक्षा अधिक आदर, मान आदि प्राप्त हो।---विशेश, खासविशेश, खास---ख़ास (ख़सूसी)मख़सूस---खासख़ास---ख़ासिख़ासि, अहिमु---विशिष्टविशिष्ट---विशिष्ट, विलक्षणविशिष्ट---विशिष्ट----बिशेष गुणयुक्तबिशिष्ट---बिशिष्ट----प्रत्येकमुविशिष्टुडु---तनिच्चिर॒प्पानमदिप्पिर्कुरिय---विशिष्टंविशिष्ट व्यक्ति---वैशिष्ट्यवुऴळसम्मान्य---
2765विशेषविशेषणविशेषण---जिसमें औरों की अपेक्षा कोई नई बात अथवा कुछ अधिकता हो, विशेषतायुक्त।विचित्र, विलक्षण।---विशेश, खास----ख़ास----खासअ॑जीब---ख़ासि----विशेषविचित्र, विलक्षण---विशेषविचित्र---विशेषविचित्र, विलक्षण (क्ख, न)---बिशिष्टबिचित्र, असाधारण---बिशेष----विशेषमु, प्रत्येकमुविशेषमु, प्रत्येकमु---विशेषमान, शिर॒प्पानतनिप्पट्ट, अदिशयमान---प्रत्येकमायअसाधारणमाय, विशेषं---विशेषअसाधारण---
2766विश्रामपुंलिंग----आराम, चैन, सुख।----बिसराम----आराम----आराम----बिस्रामु, आरामु----विश्राम, आराम----विश्राम, आराम----विश्राम, विराम, सुख----बिश्राम, आराम----बिश्राम----विश्रांति----ओय्वु, सुगम्----विश्रमं, शान्ति----विश्रांति----
2767विषपुंलिंग----ज़हर।----विस्स----ज़हर----ज़हर, वेह----ज़हिरु, विषु----विष----विष, झेर----विष----बिष, बिह----बिष----विषमु----नंजु, विषम्----विषं----विष----
2768विषमविशेषणविशेषणविशेषण--जो सम अर्थात् समान या बराबर न हों, असमान ;जो (संख्या) दो से भाग देने पर पूरी न बटे;(कार्य, स्थिति, या विषय) जो कठिन या विकट हो।--असमताकविक्खम--नामुसावी (ग़ैरमुसावी)ताक़नामुसाइद--बॆसॊमताकपीचीदु॑--ना बराबर, अण सिधोइकीडुख्यो--विषमविषमअवघड--विषमविषमविकट--असमानबिजोड़बिषम, कठिन--बिषम, असमानबिषम (संख्या)टान, कठिन--बिषमविषम-संख्याविषम, कठिन--विषममु, असमानमुबेसिविषांमंचिन--वित्तियासमान, ऒन्रु॒पोलिल्लादऒत्तैप्पडैयानकडिनमान--तुल्यमल्लातविषम संख्य, इरट्ट संख्यप्रयासमुळ्ळ, विषममुळ्ळ--बॆसबॆस संख्यॆविकट--
2769विषय-सूचीस्त्रीलिंग----विषयों की अनुक्रमणिका या सूची।----विशे-सूची----फेहरिस्ते मज़ामीन----फीरिस----विषय-सूची, पनोतरी----विषय सूचि, अनुक्रमणिका----विषय-सूचि, सांकळियुं----विषयसूचि, अनुक्रमणिका (न)----बिषय-सूची, कार्य-सूची----बिषयसूची----विषय-सूचिक----अट्टवणै----विषयानुक्रमणिक, विषय विवरं----अनुक्रमणिकॆ----
2770विसंगतिस्त्रीलिंग----संगति का न होना, असंगति।----विसंगती----फ़र्क़ (अ़दमेतताबुक़)----संग॑च रॊस----गैर मनासिबत----विसंगति----विसंगति, असंगति----बिसङ्गति, असंङ्गति----बिसंगति----बिसंगति----असंदर्भमु----पॊरुन्दामै----असंगति, युक्तिहीनत----असंगति----
2771विस्फोटपुंलिंग----एकत्र गेस, बारूद आदि का अग्नि या ताप के कारण जोर का शब्द करके बाहर निकल पड़ना।----विसफोट----धमाका----दमाकु॑, टास----फाटु, धमाको----विस्फोट----विस्फोट, धडाको----विस्फोट----बिस्फोरण, स्पोटन----बिस्फोट----विस्फोटमु, ब्रद्दलगुट----वॆडित्तल्----विस्फोटनं----सिडित, विस्फोट----
2772वेसर्वनाम----'वह' का बहुवचन रूप।----ओह----वोह----तिम----उहे----ते----तेओ----तिनि, ताँरा----सिहँत, सेइबोर, इत्यादि----सेमाने----वारु----अवर्गळ्, अवै----अवर॒, अव, आ----अवरु, अवु----
2773वेगपुंलिंग----गति या चाल की तीब्रता या तेजी, शीघ्रता।----वेग----तेज़ी----तीज़ी----तेज़ी----वेग----वेग, गति, झडप----वेग, दुतगति, त्वरा----बेग----बेग----वेगमु----वेगम्----वेगं----वेग----
2774वेतनपुंलिंग----तनख्वाह।----तनख़ाह----तन्ख़्वाह----तनु॑खाह----पधार/पधारु----पगार, वेतन----वेतन, पगार----वेतन, माहिना----बेतन, दरमहा----बेतन----वेतनमु, जीतमु----शंबळम्----शंपळं, वेतनं----संबळ, वेतन----
2775वेदवाक्यपुंलिंग----ऐसा वाक्य या कथन जिसकी सत्यता असंदिग्ध हो।----वेदवाक----कलिमा-ए-हक़----वीदु॑ वाख----वेद-वाक्यु----वेदवाक्य----वेदवाक्य----वेदवाक्य----बेद बाक्य----बेद बाक्य----वेदवाक्यमु----वेद वाक्कु----वेदवाक्यं----वेदवाक्य----
2776वेदीस्त्रीलिंग----मांगलिक या शुभ कार्य के लिए तैयार किया हुआ चौकोर स्थान, वेदिका।----वेदी----वेदी----प्यंडु॑----वेदी----वेदी----वेदी, वेदिका----वेदी, वेदिका----बेदी----बेदी----वेदिक, मंडपमु----वेळ्वि मेडै----वेदि----वेदिकॆ----
2777वेशभूषास्त्रीलिंग----पहनने के कपड़े, पोशाक, पहरावा।----पोशाक, पहरावा----पोशाक, पहरावा----पलव, पॊशाख----वेसु-वगो॒, पोशाक----वेशभूषा----वेशभूषा, पोशाक----वेशभूषा----बेश, पोछाक----बेश-भूषा----वेष भाषलु----उडै, उडुत्तुम तुणिगळ्----वेषालंकारं, उटुत्तुकॆट्टु----उडिगॆ तॊड़िगॆ----
2778वैज्ञानिकपुंलिंगविशेषण---विज्ञान का ज्ञाता, विज्ञानवेत्ता।विज्ञान-संबंधी।---विगिआनक----साईंस दाँसाईंसी---साइनस दानसयनुसी---विज्ञानी, विज्ञानिक----वैज्ञानिकविज्ञान-विषयक---वैज्ञानिक----वैज्ञा॒निक (ग्ग)विज्ञा॒न-सम्बन्धी (ग्ग)---बैज्ञानिक, बिज्ञानीबैज्ञानिक---बैज्ञानिक----शास्त्रज्ञुडुशास्त्रीयमु---विञ्ञानीविञ्ञान, संबन्दमान---शास्त्रज्ञन्शास्त्रीयं---विज्ञानिवैज्ञानिक---
2779वैरपुंलिंग----घोर शत्रुता।----वैर----अ़दावत----वार॑, हसद----वेरु----वैर----वेर, द्वेष----वैर, शत्रुता----बैरिता, शत्रुता----बैर----वैरमु----विरोदम्, पगैमै----वैरं, शत्रुत----हगॆतन----
2780वैश्यपुंलिंग----हिंदुओं में तीसरे वर्ण का व्यक्ति जिसका मुख्य कर्म व्यापार कहा गया है।----वैश----वैश----वैश, वोन्य----वैश्यु (हिक जाति)----वैश्य----वैश्य----वैश्य----बैश्य----बैश्य----वैश्युडु----वैशियजातीयर्----वैश्यन्----वैश्य----
2781व्यंगपुंलिंगपुंलिंग---शब्द की व्यंजना शक्ति द्वारा निकलने वाला अर्थ, कटाक्ष, ताना ;विडम्बना।---विअंग----तंज़ (त़ाना), तज़्हीक----टसनु॑----चथर, तानोतन्ज़, मज़ाकु---व्यंग्यविडंबना---व्यंग्य, कटाक्षबिडम्बना---व्यङ्ग, विदुपविडम्बना---ब्यंगार्थ, श्लेष, ब्यंगोक्ति, कटाक्षपातबिड़म्बना, ब्यंग---ब्यंग्य----व्यंग्यमुऍगताळि---बंजप्पुहऴ्च्चिकिंडल्, परिगासम---मुळ्ळुवाक्कु, व्यंग्यम्विलक्षणत्वं, वैपरीत्यं---कटूक्तिविडंबनॆ---
2782व्यंग्य-चित्रपुंलिंग----किसी घटना, बात, व्यक्ति आदि की हँसी उड़ाने के उद्देश्य से बनाया गया उपहासात्मक तथा सांकेतिक चित्र।----विअंग-चित्तर----कारटून----कार्टून----तन्ज़----व्यंग्यचित्र----व्यंग्यचित्र----व्यङ्ग-चित्र----ब्यंग चित्र----ब्यंग्य-चित्र----व्यंग्य चित्रमु----केलिच्चित्तिरम्----कार्टूण, हास्यचित्रं----व्यंग्य चित्र----
2783व्यंजनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---व्यंग्यार्थ-बोधक, शब्द की तीन प्रकार की शक्तियों में से एक ;व्यंग्यार्थ।---विअंजनाविअंजना---ज़ूम़ानवीयतइशारीयत---गूड माने, सिखिम मानेगूडमाने---व्यंजनागुझो अर्थु, इशारो कयलु हासुलु मतिलबु---व्यंग्यार्थ, व्यंजनाव्यंग्यार्थ, व्यंजना---व्यंजनाव्यंग्यार्थ---व्यञ्जनाव्यंग्यार्थ---ब्यंजनाब्यंग्यार्थ---ब्यंजनाब्यंग्यार्थ---व्यंजनव्यंजन---करुत्तु त्तूण्डुदलुक्कु उट्पडत्तक्क तन्मैव्यंग्यार्थम्, किण्डल्---व्यंजनव्यंग्यार्थं---व्यंजनाब्यंग्यार्थ---
2784व्यक्तविशेषण----प्रकट, प्रत्यक्ष।----प्रगट----ज़ाहिर----प्रकट, प्रॆत्यख, ज़ा॑हिर----ज़ाहिरु, प्रकटु----व्यक्त----व्यक्त, प्रकट, खुल्लु----व्यक्त, प्रकट----ब्यक्त, प्रकट----ब्यक्त----व्यक्तमु----तॆळिवान, वॆळिप् पडैयान----व्यक्तम्----प्रकट----
2785व्यक्तिपुंलिंग----मनुष्य, आदमी, व्यष्टि।----विअकती----शख़्स (फ़र्द)----नफर----माण्हूं, शख्सु----व्यक्ति----व्यक्ति, माणस----व्यक्ति, लोक, मानुष----व्यविश्त, पुरूष----व्यक्ति----व्यक्ति----नबर्----व्यक्ति----व्यक्ति----
2786व्यक्तिगतविशेषण----किसी एक ही व्यक्ति से संबंधित।----विअकतीगत----इन्फ़िरादी (शख़्सी)----ज़ाती----शख़्सी----व्यक्तिगत----व्यक्तिगत----व्यक्तिगत----ब्यक्तिगत, निजस्व----ब्यक्तिगत----व्यक्तिगतमु----सॊन्दमुरै॒यिलान----व्यक्तिपरं----व्यक्तिगत----
2787व्यथास्त्रीलिंग----उग्र शारीरिक या मानसिक पीड़ा।----पीड़----अज़ीयत (अ़ज़ाब)----दॅख----डुखु, पीड़ा----व्यथा, वेदना----व्यथा, पीड़ा----व्यथा, वेदना----व्यथा, पीड़ा, कष्ट----ब्यथा----ब्यथ, वॆत, वेदन----मन वेदनै----व्यथ, वेदन----व्यथॆ----
2788व्ययपुंलिंगपुंलिंग---खर्च;उपभोग आदि में आने के कारण किसी चीज का होने वाला क्षय, नाश या लोप।---खरच----सर्फ़----खरु॑चख्यय, खरुच---ख़र्चु----व्यय, खर्चक्षय, विनाश---व्यय, खरच वापरक्षय, विनाश---व्यय, खरचक्षय, ह्रास---व्यय, खरचक्षय, खरच---व्यय----व्ययमु, खर्चुव्ययमु, खर्चु---सॆलवुउपयोत्तिनाल् उंडागुम तेय्मानस् तेय्न्दु पोलुदल्---चिलवुक्षयं---खर्चुतीरुविकॆ---
2789व्यवसायपुंलिंग----जीविका-निर्वाह का साधन, पेशा, व्यापार।----कित्ता, पेशा----पेशा (रोज़गार)----रा॑ज़गार----धंधो----व्यापार, व्यवसाय----व्यवसाय, धंधो----व्यवसाय, जीविका----बृत्ति, व्यवसाय----ब्यबसाय----वृत्ति----तॊऴिळ, जीविनोपायम्----तॊऴिल्----कसबु----
2790व्यवस्थास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---प्रबंध, इन्तजाम ;ठीक अवस्था, अच्छी हालत।---प्रबन्धहालत---इंतिज़ामनज़्म---इंतिज़ामबॊंदबस्त---इन्तज़ामु, बन्दोबस्तुसुठो बंदोबस्तु---व्यवस्था, सोयचांगली स्थिति---व्यवस्था, प्रबंधसारी स्थिति---व्यवस्था, बन्दोबस्तभालो अवस्था---ब्यवस्था, योगारअवस्था, भाल अवस्था---ब्यवस्था----एर्पाटुव्यवस्थ---एरपाडुआऴुगान निलै---व्यवस्थ्य एर्प्पाडुनल्ल निल---एर्पाडुसुव्यवस्थॆ---
2791व्यष्टिस्त्रीलिंग----समीष्ट का एक स्वतंत्र अंग, व्यक्ति।----फरद----फ़र्द----इंसान, शख़ु॑ज़, फरु॑द----शख़्सु, अलगि॒ जुज़ो----व्यष्टि----व्यष्टि----व्य॒ष्टि (बे)----ब्यष्टि, ब्यक्ति----ब्यष्टि----ब्यष्टि----वेरु॒पट॒ट॒ तन्मै----ब्यष्टि----ब्यष्टि----
2792व्यस्तविशेषण----कार्य आदी में लगा हुआ अथवा उलझा हुआ।----रुज्झा----मस्रूफ----आवुर, कामि मंज़----मश्गलु, रूधलु----व्यस्त, निग्मन----व्यस्त----व्यस्त----ब्यस्त, लागि थका----ब्यस्त----निमग्नमु, कार्यमग्नत----वेलैयिल् ईडुपट्ट----तिरक्कुळ्ळ----तल्लीन----
2793व्याकुलविशेषणविशेषण---बेचैन, व्यग्र, विकल ;उत्कंठित, उत्सुक।---बिआकल----मुज़्तरिबबेक़रार---दॅखी, व्याकॅल----व्याकुलु----बेचैन, व्याकुलउत्कंठित, उत्सुक---व्याकुल, गाभरूंउत्सुक, उत्कंठित---आकुल, व्यग्रउत्सुक---ब्याकुल, आकुलउत्कण्ठित, ब्यग्र---ब्याकुळउत्कंठित, उत्सुक---ब्याकुलमुआतुरत---मनम् कलंगियआवलुळ्ळ---ब्याकुलन्उत्सुकन्---बिकल, कातरउत्सुक---
2794व्याख्यास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सविस्तार वर्णन, विवेचन ;अर्थ का स्पष्टीकरण, टीका।---विआखिआ----तश्रीह----व्यछनिथ वनुन, लखु॑नटीका, तशरीह---व्याख्या, टीकासमुझाणी---विवेचनटीका---विवेचनव्याख्या, टीका---व्याख्याटीका---बिवरण, बिवरणीटीका, ब्याख्या---ब्याख्या, टीकाब्याख्या, टीका---व्याख्यव्याख्य---बिरिवुरैविळक्क उरै---व्याख्यानंटीक---व्याख्यॆ, सविस्तार वर्णनॆटीका---
2795व्याघ्रपुंलिंग----बाघ, शेर।----बाघ----शेर----सु॑ह----शेरु, शीहुं----बाघ, व्याघ्र----व्याघ्र, वाध----व्याघ्र, बाध----धाध----ब्याघ्र, बाध----व्याघ्रमु, पुलि----पुलि----कटुव, व्याघ्रं----हुलि----
2796व्याघिस्त्रीलिंग----शारीरिक कष्ट, बीमारी।----रोग----मरज़ (बीमारी)----व्यमार्य----बीमारी----व्याधि, रोग----व्याधि, रोग----व्याधि, रोग----ब्याधि----व्याधि, बेमारी----व्याधि----वियादी, नोय्----व्याधि, रोगं----रोग----
2797व्यापकस्त्रीलिंग----चारों ओर फैला हुआ, विस्तृत ;वृहद।---विआपक----मुहीत, वसीअ़----च़ॅपारफय फु॑हलिथ----व्यापकु----विस्तृत, व्यापकबृहत---व्यापकबृहत---व्यापक, विस्तृत----बिस्तृत, ब्यापकबृहत, प्रकाण्डी---ब्यापक, विस्तृतबृदह्---व्यापिंचिनविस्तृतमु---परबलानमिहप्पॆरिय---व्यापकंबृहत्ताय---व्यापकबृहत्ताद्---
2798व्यापारपुंलिंग----रोज़गार, तिजारत।----वपार----रोज़गार, तिजारत----कारु॑बार----वापारु----व्यापार----व्यापर, वेपार----व्यापार, वाणि॒ज्य (न)----बेपार, जीविका, कारबार----ब्यापार----व्यापारमु----वियापारम्----व्यापारं, कच्चवटं----व्यापार, उद्यम----
2799व्यायामपुंलिंग----कसरत।----कसरत----वर्ज़िश----कसरत----व्यायामु, कस्रत----कसरत, व्यायाम----व्यायाय, कसरत----व्यायाम----कछरत, व्यायाम----ब्यायाम----व्यायाममु----कसरत्तु, देहाब्बियासम् उडर् पयिरचि----व्यायामं, कसर्त्तु----व्यायाम, कसरत्तु----
2800व्युत्पत्तिस्त्रीलिंग----मूल, उद्गम या उत्पत्ति का स्थान।----निरुकती----मस्दर (मख़्रज)----आगुर----उत्पती----उगम, उत्पत्ति----व्युत्पत्ति----व्युत्पत्ति----ब्युत्पत्ति, उत्स, उह----ब्युत्पत्ति----उत्पत्ति, व्युत्पत्ति----शॊल्-तोट॒ट॒म्----व्युत्पत्ति----व्युत्पत्ति----
2801व्योमपुंलिंग----आकाश, अंतरिक्ष, आसमान।----आकाश----आस्मान----आकश, अंतु॑रयख्य----व्योम, आकाश----व्योम, आकाश----आकाश----व्योम, आकाश----ब्योम, महाकाश----ब्योम----व्योममु, आकाशमु----आगायम्----आकाशं, व्योमं----मुगिलु, आकाश----
2802शंकास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---संशय, संदेह, शक ;भय, अंदेशा, खटका।---शक, शंका----शकख़द्शा---शेंखशख---शंका, शकुडपु, खुटिको---संदेह, शंकाभीति, आशंका---शंका, संदेह, शकअंदेशो, खटको---शंका, संशय, सन्देहभय, खटका---आशंका, सन्देहभय---शंका, संदेहभय---शंकआशंक---सन्देगम्, ऐयम्बय उणर्चि---संशयं, शंकभयं, आशंक---अनुमान, अपनंबिकॆहॆदरिकॆ---
2803शंखपुंलिंगपुंलिंग---समुद्र में पैदा होने वाला एक जंतु का कड़ा और सफेद खोल ;दस खर्ब अथवा एक लाख करोड़ की संख्या।---संखसंख---नाक़ूस (संख)संख---शंखशेंख---शंखु----शंखएक लक्ष् कोटी---शंखएक लाख करोड़---शंख, शाँख----शंखशंख---शंखशंख---खंशमुशंखमु---शंगुनूरु॒ कोडि---शंखुशंखं---शंखऒन्दुलक्ष कोटि---
2804शकुनपुंलिंग----विशिष्ट पशु-पक्षी, व्यक्ति, वस्तु, व्यापार आदि के देखने-सुनने, होने आदि से मिलने वाली शुभ-अशुभ की पूर्व-सूचना।----सगण----शुगून (फ़ाल)----शॊगून----सोणु----शकुन----शकुन----शकुन----शुभाशुभ लक्षण बा आग जाननी----शकुन----शकुनमु----शगुनम्----शकुनं----शकुन----
2805शक्करस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---चीनी ;कच्ची चीनी, खांड।---शक्करशक्कर---शकर----मॊदुर, शकर----खंडु----साखरसाखर---शक्करखांड---चिनि----चेनिकोचा चेनि---चिनि, शर्करा----चक्कॆरकंड चक्कर---शक्करैअस्का---पंचसारचक्कर---सक्करॆनाटि सक्करॆ---
2806शक्तिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---पराक्रम, बल, सामर्थ्य;दुर्गा।---शकती----ताक़त (क़ुव्वत)देवी दुर्गा---ह्यमथ, ह्यकथदूर्गा बर्गुवती---शक्ती, ताकतदुर्गा---शक्ति, बळदुर्गा---शक्ति, सामर्थ्य, बळदुर्गा---शक्ति, पराक्रम, सामर्थ्य॒ (थ)दुर्गा, शक्ति---शक्ति, बल, पराक्रमदुर्गा, शक्ति---शक्ति----शक्तिशक्ति---शक्ति, तिर॒न्दुर्गै अम्मन---शक्तिदुगदिवि---शक्तिदुर्गि---
2807शक्तिशालीविशेषण----बलवान, शक्ति संपन्न।----शकतीशाली----ताक़तवर----बलु॑वान----शक्तिशाली, ताकतवरु----बलवान, शक्तिशाली----शक्तिशाली, बळवान----शक्तिशाली, बलवान्----शक्तिशाली, बली----शक्तिशाली----शक्तिशालि, शक्ति मंतुडु----बलम् पोरुन्दिय----शक्तिशालि----शक्तिशालि----
2808शताब्दीस्त्रीलिंग----सौ वर्षों की अवधि, शती, सदी।----सदी----सदी----सदी----सदी----शताब्दी----शताब्दी, सदी----शताब्दी, शतक----शताब्दी, शतिका----शताब्दी----शताब्दमु----नूट॒टा॒ण्डु----शताब्दं, नूट॒टा॒ण्डु----शतमान----
2809शत्रुपुंलिंग----वैरी, दुश्मन।----वैरी----दुश्मन----दुश्मन, शथु॑र----शत्रू, दुश्मनु----शत्रु----शत्रु, वैरी, दुष्मन----शत्रु, वैरि----शत्रु, बैरी----शत्रु----शत्रुवु----पगैव़न्, शत्तुरु----शत्रु----शत्रुं----
2810शपथस्त्रीलिंग----सौगंध, कसम।----सौंह----क़सम (हल्फ़)----कसम, दु॑य----कसमु----शपथ----शपथ, सौगद----शपथ, दिव्यि----शपथ----शपथ----शपथमु----आणै, शबदम्, अगरादि----शपथं निघंटु----आणॆ, प्रमाण----
2811शब्दकोशपुंलिंग----वह ग्रंथ जिसमे शब्दों के सम्यक् वर्ण विन्यास, अर्थ प्रयोग, पर्याय आदि हों।----शबदकोश----लुग़त (लुग़ात)----डिकश॑नरी----शब्दकोशु, डिक्शनरी----शब्दकोश----शब्दकोश----शब्दकोष, अभिधान----शब्दकोष, अभिधान----शब्दकोश----निघंटुवु, शब्दकोशमु--------------कोश----
2812शमनपुंलिंगपुंलिंग---बढ़े हुए उपद्रव, कष्ट, दोष को दबाने की क्रिया, दमन ;शांति।---नविरतीशांति---फ़िरोअम्न (सुकून)---शांती----ज़ाब्तोशांति---शमन, दमनशांति---शमनशमता, शांति---शमन, दमनशान्ति---दमनशान्ति, उपशम---शमन----शमनमुशमनमु---अडंगुदल्अमैदि---शमनंसमाधानं---शमनशांति---
2813शरणस्त्रीलिंग----आश्रय, संरक्षण, पनाह।----शरन----पनाह----शरन----शरणि----शरण----शरण, रक्षण----शरण, आश्रय----शरण, आश्रय----शरण----शरणु----तंजम्, अडैक्कलम्----शरणं----मरॆ----
2814शरणार्थीपुंलिंगपुंलिंग---शरण चाहने वाला, असहाय ;किसी अन्य देश में भागकर शरण लेने के लिए आया हुआ, विस्थापित।---शरनारथीशरनारथी---पनाह गुज़ी----रिफ्यूजी----शरणार्थी----शरणार्थी, असहायनिर्वासित---शरणार्थी, शरणागतनिराश्रित---शरणागत, शरणापन्न----आश्रय प्रार्थीशरणार्थी---शरणार्थी----शरणार्थिशरणार्थि---तंजमडैन्दोर, अगदिइडम् पॆयर्न्दोर्---निस्सहायन्अभयार्थि---आश्रय बेडुववशरणार्थि---
2815शरमानाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---झेंपना ;लज्जित होना।---शरमाउणा----शरमाना----शरु॑म करु॑न्य, मंदु॑छुन----शर्माइणु----लाजणें----शरमावुं----संकुचित हओया लज्जित हओयालज्जित हओया---लाज कर, लाज पालाज पा---लाजेइबा----सिग्गुपडुटसिग्गुपडुट---वेट्कप्पड----लज्जिक्कुक, नाणिक्कुकनाणिक्कुक---नाचुकॆगॊळ्ळुवुदुलज्जित नागुवुदु---
2816शराबस्त्रीलिंग----मद्य, मदिरा।----शराब----शराब----शराब----शराबु----मद्द, दारु----शराब, रारू----मदं, मदिरा----मद, फटिका----मद्य, मदिरा----सारा, सारायि----मदु, शारायम----मद्यं----हॆंड----
2817शरीरपुंलिंग----देह, तन, जिस्म।----सरीर----जिस्म----जिसु॑म, दिह्य----शरीरु/सरीरु----शरीर----शरीर, देह, तन----शरीर, गा, तनु----शरीर, देह, गा----शरीर, देह, तनु, गाम----शरीरमु----उडल्----शरीरं----शरीर----
2818शल्य-क्रियास्त्रीलिंग----शारीरिक विकार को दूर करने के लिए की जाने वाली चीर-फाड़।----जराही----अ़मले जर्राही----अपर॑शन----चीर-फाड़----शस्त्रक्रिया----वाढकाम, शल्यक्रिया----अस्त्रोपचार, शल्य-क्रिया----अस्त्रोपचार----शल्यक्रिया, अचरेसन----शस्त्र चिकित्स----रण चिकिच्चै----ओपरे॒षन्, शस्त्रक्रिय----शस्त्र चिकित्सॆ----
2819शव-परीक्षास्त्रीलिंग----मृत व्यक्ति के शव की मृत्यु के कारणों की जाँच के लिए की जाने वाली परीक्षा या जाँच (पोस्ट मार्टम)।----शव परीखिआ----पोस्ट मार्टम----पॊस माटम----मुर्दे जी जाच----शव विच्छेदन, पोस्टमाटॅम----शव परीक्षा----शव-व्यवच्छेद----मरणोत्तर परीक्षा----शब-परीख्या----शव परीक्ष----शवप्परीटचै----शव परिशोधन----शव परीक्षॆ----
2820शस्त्रपुंलिंग----हाथ मे रखकर प्रयोग किया जाने वाला हथियार।----शसतर----हथ्यार (सिलाह)----ह॑थियार----शस्त्रु, हथियारु----शस्त्र----शस्त्र, हथियार----शस्त्र, आयुध----शस्त्र, अस्त्र----शत्रु----आयुधमु, शस्त्रमु----पोर करुवि----आयुधं----शस्त्र, आयुध----
2821शहदपुंलिंग----मधु (हनि)।----शहिद----शहद----माछु----माखी----मध----मधु----मधु----मौ----महु, मधु----तेने----तेन----मधु, तेन्----जेनुतुप्प----
2822शहीदविशेषण----अपने धर्म, सदाचार, कर्त्तव्य-परायणता के लिए अथवा देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण देने वाला (मार्टेअर)।----शहीद----शहीद----शहीद----शहीदु----हुतात्मा----शहीद----शहीद----शहीद----शहीद----त्यागमूर्त्ति----वीरत्यागी----रक्त साक्षि----हुतात्म----
2823शांतविशेषणविशेषण---आवेग, चंचलता, वासना अथवा विकास से रहित ;नि:शब्द, नीरव, चुप, मौन।---शांतशांत---पुरसुकूनसुन्सान---शांथ, खामोशछॅपु॑---शांतिसांति---शांतशांत, नीरव---शांत, शमेलुंनीरव, चुप, मौन---शान्त, धीरनि:शब्द, नीरव---शान्त, धीर, स्थिरनीरव, मौन---शांत----शांतमुशांतमु---अमैदियानमौनमान---शांतन्निश्शब्दन्---शांत, निश्चलमौन---
2824शांतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--नीरवता, सन्नाटा, स्तब्धता ;उत्पाद, उपद्रव, कलह आदि से रहित अवस्था, अमन ;आराम, चैन।--शांति----सुन्सान, सन्नाटाआश्तीआराम, चैन--शा॑न्ती-आराम--शांती----शांतताशांतिआराम--शांति, नीरवताविश्राम, आराम, चेनआराम--शांति, नीरवताउपद्रवहीनताशांति--नीरवता, निस्तब्धताशान्तिआराम--शांति, नीरबतानिस्तब्धता---शांतिशांतिशांति--अमैदिशांतिओय्वु, सुगम्, सौकरियम्--निश्शब्दतसमाधानंशांति--शांति, नीरवतॆनॆम्मदिसुख, आराम--
2825शाकाहारीपुंलिंग, विशेषण----मांस न खाने वाला, निरामिष भोजी।----वैशनो----सब्जी ख़ोर----वशनव----वेश्नू, वैष्णव----शाकाहारी----शाकाहारी----निरामिष भोजी----निरामिषाहारी, शाकाहारी----निरामिषाशी----शाकाहारि----मरक्करि उण्बोर----सस्य भुक्कु----शाकाहारी----
2826शानदारविशेषणविशेषण---भड़कीला, तड़क-भड़क वाला ;ऐश्वर्यपूर्ण, उच्च कोटि का।---शानदार----शानदार----शानदारशा॑ही---शानदारु----रुबाबदारऐश्वर्ययुक्त---शानदार----चटकदारऐश्वर्यपूर्ण॒ (न)---जकमक, रंचङीयाऐश्वर्यशाली, अत्युत्तम---चमक-जुक्तऐश्वर्ज्यशाळी---वैभवोपेतमुधनमैन---पगट्टानउयर्तरमान---आडंबरमुळ्ळऐश्वर्यपूर्णमाय---थळथळिसुवभव्य---
2827शापपुंलिंग----अनिष्ट कामना के उद्देश्य से कहा गया कथन, अभिशाप, बद्दुआ।----सराप----बद्दुआ़----शाफ----सिरापु----शाप----शाप, बद्दुआ----शाप----शाप, शाओ----अभिशाच----शापमु----शाबम----शापं----शाप----
2828शायदअव्यय----कदाचित, संभवत:।----शाइद----शायद----शायद, मुमकिन----शायदि----कदाचित----कदाच----संभवत:, कदाचित----सम्भव, सम्भवत:----संभवत:, कदाचित----बहुशा----ओरुक्काल्----ऒरु पक्षॆ----बहुश:----
2829शायिकास्त्रीलिंग----शयनिका (स्लीपर)----सलीपर----स्लीपर----स्लीपर, शँगनजाय----स्लीपर----स्लीपर----शायिकी, स्लीपर----शयनिका----शोवार आसन (बर्थ)----शयनिका, स्लीपर----स्लीपरु----स्लीपर----स्लीपर॒----स्लीपर्----
2830शालीनविशेषण----लज्जाशील, शुशील, शिष्ट।----शुशील----सलीकामंद (हयादार)----हयावा॑ल----लजा॒रो, हलीमु----शालीन----शालीन----शालीन, शिष्ट----शालीन, सुशील----शाळीन----मर्यादगल----पणबुळ्ळ----कुलीनन्----शालीन----
2831शाश्वतविशेषण----सतत्, स्थायी, नित्य, सनातन।----सदीवी----जावेद----पोशिवु॑न्य----दाइमु काइमु----शाश्वत----शाश्वत, नित्य----नित्य॒, सनातन (त्त)----शाश्वत, नित्य, स्थायी----शाश्वत----शाश्वतमु----शाशुवतमान, निलैयान----शाश्वतं----शाश्वत----
2832शासकपुंलिंग----शासन करने वाला व्यक्ति, शासन-कर्ता।----हाकम, शासक----हुक्मराँ (हाकिम)----हॊकुमरान----हाकिमु----शासक----शासक----शासक----शासक, शासनकर्त्ता----शासक----पालकुडु, प्रभुवु----आलुबवर्----भरणाधिकारि----शासक----
2833शासनपुंलिंगपुंलिंग---सरकार, हुकूमत;सरकार या किसी अन्य द्वारा नियन्त्रण, संचालन, व्यवस्था आदि।---हकूमत, शासनहकूमत, शासन---हुकूमतइंतिज़ाम (नज़्म)---हुकूमथ----हुकूमत----सरकार, शासनशासन व्यवस्था---शासन, अमलव्यवस्था, संचालन---शासन, सरकार----चरकार, प्रशासनशासन, शासन कार्य---शासन----परिपालनप्रभुत्वमु---आट्चिनिर्वाहम्---भरणंभरणं---सरकारआडळित---
2834शास्त्रपुंलिंगपुंलिंग---धर्म ग्रंथ ;किसी कला, विद्या या विशिष्ट विषय का सांगोपांग ग्रंथ, विज्ञान।---शासतरशासतर---सहीफाइल्म---शास्तु॑र----शास्त्रु----धर्मग्रंथ, शास्त्रशास्त्र, विज्ञान---शास्त्र, धर्मग्रंथ----धर्मशास्त्र, धर्म ग्रंथ----शास्त्र, धर्म ग्रन्थबिद्या, तत्त्व, बिज्ञान---शास्त्र----शास्त्रमुशास्त्रमु---शास्तिरम्कलै, विञ्ञानम्---शास्त्रंशास्त्र ग्रंथं---धर्म ग्रंथविज्ञान, शास्त्र---
2835शिकायतस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--किसी के दोष या अनुचित काम का किसी के समक्ष किया गया कथन;किसी के अनुचित काम के प्रति होने वाला असंतोष ;हल्का, शारीरिक कष्ट या रोग।--शिकाइत----शिकायत----शकायथ----शिकायत----तक्रारअसमाधानआजार--फरियादअसंतोषबिमारी--अभियोग, शिकायत----परनिन्दा, टोटकअसन्तोष, आपत्तिअसुख, रोग--अभिजोग, दोषारोचशिकायत, आचत्ति, असंतोषलघुपीड--चाडीअसंतृप्तिइब्बदि--पुगार्आक्षेपणैजाडपम्--परातिआक्षेपंअसुखं--दूरुअसमाधानअस्वस्थतॆ--
2836शिकारपुंलिंगपुंलिंग---मृगया, आखेट ;मृगया अथवा आखेट में मारा या पकड़ा गया पशु-पक्षी।---शिकारशिकार---शिकारशिकार---शिकार----शिकारु----शिकारशिकार---शिकार, मृगयाशिकार---मृगया, शिकार----चिकार, मृगयाचिकारत मरा जीव-जन्तु---मृगया----वेटवेट मृगमु---वेट्टैवेट्टै (पर॒वै, पिराणि)---नायाट्टुइर---बेटॆबेटॆय जीव---
2837शिक्षास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी प्रकार के ज्ञान के सीखने-सिखाने का क्रम, पढ़ाई या उक्त प्रकार से प्राप्त ज्ञान या विद्या ;उपदेश, सबक, नसीहत।---सिखिआ----त़ालीम----ता॑लीमशॆख्या---शिक्षा, सिख्या, तैलीम, तालीमनसीहत, सिख्या---विद्या, शिक्षणउपदेश---शिक्षण, केळवणीज्ञान, बोध, उपदेश---शिक्षा॒, शेखा (क्ख)उपदेश, आक्केल---शिक्षाउपदेश---शिख्या----विद्य, चदुवुउपदेशमु, गुणपाठमु---कल्विबुद्दिमदि, पाडम्---विद्याभ्यासंगुणपाठम्---शिक्षण, विद्यॆउपदेश, बुद्धिवाद---
2838शिखरपुंलिंगपुंलिंग---किसी चीज का सबसे ऊपरी भाग, सिरा, चोटी, कलश, कंगूरा (मंदिर, मकान के संदर्भ में) ;पर्वत की चोटी।---सिखर----चोटी----थॊग----चोटी----शीर्ष, शिखरशिखर---शिखर, टोचशिखर---शिखर, शीर्ष, अग्रभागश्रृंग---शिखर, चूडाश्रृंग, टिं---शिखर----गोपुरमुशिखरमु---उयर् मट्टम्शिगरम्, उच्चि मुलैयुच्चि---शिखरंकॊटुमुटि---शिखरशिखर---
2839शिथिलविशेषणविशेषणविशेषण--जो कसकर बंधा न हो ढीला ;आलसी, सुस्त ;जिसे कुछ छूट दी गई हो, जिसका पालन दृढ़तापूर्वक न हो।--ढिल्लाढिल्लाढिल्ला--ढीला----नरु॑म, ड्यॊलआलु॑छ्यडॆजंरु॑ वॊल--ढिलो----सैल, ढिलाआलसी, सुस्त, शिथिलशिथिल--शिथिल, ढीलुंनिर्बळ, थाकेलुं, आळसूशिथिल--ढिला, शिथिलआलसे---शिथिल, ढिलाएलेहुवाढिला--शिथिळ----शिथिलमुसडलिनसडलिन--तळर्न्दसोबेरिविट्टुप्पोन--शिथिलं, अयञ्ञमटियन्, अलसन्शिथिलमाय--सडिलवादसोमारिशिथिल, सडिल विट्ट--
2840शिरकतस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---शरीक होने की अवस्था क्रिया या भाव, मिलना ;साझेदारी।---भाईवालीभाईवाली---शिर्कत----शॆर्यकॊत----शिरकत----पाती, हिस्साभागीदारी---शिरकतभागीदारी---योगदानसाजा---मिलन, संयोगअंशीदारि---जोगदानअंशीदारि, भागीदारि---पाल्गोनुपालु---सेर्न्दु कॊळ्ळल्पंगु कोळ्ळल्---पंकॆटुक्कल्पंकाळित्तं---पालुगारिकॆपालुगारिकॆ---
2841शिरोमणिपुंलिंगपुंलिंगविशेषण--सिर या मस्तक पर धारण करने का रत्न, चूड़ामणि ;श्रेष्ठ पुरुष।सर्वश्रेष्ठ।--सिरोमणी----सरताजमुअ़ज़्ज़मआ़ला--सरताजरुत तु॑ थॊद---शिरोमणी----शिरोमणीश्रेष्ठ पुरुष, सर्वश्रेष्ठसर्वश्रेष्ठ--शिरोमणि, चूड़ामणिमुख्य, श्रेष्ठ, नायकमुख्य, श्रेष्ठ, नायक--शिरोमणि॒, माथारमणि॒ (न) (न)श्रेष्ठ पुरुषसर्वश्रेष्ठ--शिरोमणि, शिरर भूषणश्रेष्ठ पुरुषसर्वश्रेष्ठ--शिरोमणि----शिरोमणिशिरोमणिशिरोमणि--मगुडत्तिल्, उळ्ळ मणिशिर॒न्दोर्तलै शिर॒न्द--चूड़ामणि, शिरोरत्नंश्रेष्ठन, शिरोमणिसर्वश्रेष्ठन्--चूडामणिश्रेष्ठ पुरुषसर्वश्रेष्ठ--
2842शिलान्यासपुंलिंगपुंलिंग---नए भवन की नींव के रूप में पत्थर रखना ;नींव रखने का कृत्य या समारोह।---नींह पत्त्थर-रखाईनींह पत्त्थर-रखाई---तासीस----कु॑न, द्युन----बुन्यादी, पथरु रखणु----शिलान्यासपायाभरणी---शिलारोपणपायो मांखवो---भित्ति स्थापन----भेंटि स्थापनआधारशिला स्थापनर उत्सव---शिलान्यास----शंकु स्थापनशंकु स्थापन---अडिक्कल् नाट्टुदल्अडिक्कल् नाट्टुविऴा---तर॒क्कल्लिटल्, शिलास्थापनंशिलास्थापनं---अडिगल्लुशंकु स्थापना समारभ---
2843शिलालेखपुंलिंगपुंलिंग---पत्थर पर गुदा हुआ लेख ;लेख आदि से गुदा हुआ पत्थर।---सिलालेख----कत्बा----कनि प्यठक लॆखुत----शिलालेखु----शिलालेख----शिलालेख----शिलालिपि----शिलालिपि, लिपिथका शिललिपिथका शिल---शिळा-लेख----शिला शासनमुशिला शासनमु---कल् वॆट्टु----शिलालिखितंकॊत्तिय शिल---शिला शासनशासनद कल्लु---
2844शिल्पपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--हस्तकला, दस्तकारी ;रचना विधान, निर्माण ;स्थापत्य, वास्तुकला।--शिलप, कारीगरीशिल्प, कारीगरीशिल्प, कारीगरी--दस्तकारी (हिर्फ़ा)कारीगरी (सन्नाइ़)फन्ने त़ामीर--कसु॑ब, का॑रीगिरी, हॅनरकसु॑बता॑मीरी हॅनर--दस्तकारीबनावटपथर घड़ण जी कला--शिल्प, हस्तकलानिर्माणशिल्प, स्थापत्य कला, वास्तु कला--शिल्प, हस्तकलानिर्माणकारीगरी, कळा--शिल्प, वस्तु निर्माण॒ कर्म (न)----हस्तकलानिर्माणर कौशलस्थापत्य, स्थापित बिद्या--शिळ्प----शिल्पमुशिल्पमुशिल्पमु--शिर्पम्सॆयमुरै॒वीडु कट्टुम्कलै--करकौशलंशिल्पंस्थापत्यकल--कैगारिकॆशिल्पवास्तु कलॆ--
2845शिल्पकारपुंलिंग----शिल्पी, कारीगर।----शिलपकार, कारीगर----कारीगर (सन्नाअ़)----का॑सिब, का॑रीगर----कारीगरु, मूर्त्तिकारु----कारागीर, शिल्पकार----शिल्पकार, शिल्पी----शिल्पी, कारिगर----शिल्पी, कारिकर----शिळ्पकार----शिल्पि----शिर्पि----शिल्पि----शिल्पि----
2846शिल्पीपुंलिंग----शिल्प संबंधी काम करने वाला, शिल्पकार।----शिलपी, कारीगर----दस्तकार (कारीगर)----का॑रीगर----पथर घड़ण वारो कलाकारु, संगतराशु----शिल्पकार----शल्पी, शिल्पकार----शिल्पी, शिल्पकार----शिल्पी, शिल्पकार----शिळ्पी----शिल्पि----शिर्पि----शिल्पि----शिल्पि----
2847शिविरपुंलिंगपुंलिंग---पड़ाव, छावनी;खेमा, तंबू।---छाउणीतंबू---छवनी (डेरा)ख़ेमा---पडाव, छावु॑न्यकंप---छाविणी, डे॒रोतंबू---छावणी, शिबिरतंबू---शिबिर, छावणी, पडावतंबू---छाउनितांबु, शिविर---शिबिर, बाहार छाउनीतंबु---शिबिर----शिबिरमुगुडारमु---मुकाम्कूडारम्---शिबिरं, पाळयंकूटारं---पाळॆयडेरॆ---
2848शिशुपुंलिंगपुंलिंग---बहुत ही छोटा बच्चा;सात आठ वर्ष की अवस्था तक का बच्चा।---बालबाल---तिफ़्लबचा---ज्गशुरशुर---बा॒रु----लहान मूलशिशु---शिशु, बच्चुं,नानुं बाळक---शिशु----शिशु, केचुवाशिशु, केचुवा---शिशु, छुआ----शिशुवुशिशुवु---कुऴन्दैशिरु॒वन---शिशु, कुञ्ञुचॆरि॒य कुट्टि---कूसुमगु, शिशु---
2849शिष्टविशेषण----सभ्य, सज्जन।----साऊ----शाइस्ता----शा॑यिस्तु॑, सथज़न----हलीमु, शानाइतो----सभ्य, सुसंस्कृत----शिष्ट, सभ्य, भद्र----शिष्ट, सभ्य, भद्र----शिष्ट, साधु, सभ्य----शिष्ट----शिष्टुडु, मर्यादस्थुडु----पाणबुळ्ळ----शिष्टन्, संस्कारसम्पन्नन्----शिष्ट, सभ्य----
2850शिष्टतास्त्रीलिंग----शिष्ट होने की अवस्था गुण भाव, सौजन्य।----भलमाणसी----शाइस्तगी----शा॑यिस्तु॑गी----हलीमाई, भलमानसी----सौजन्य----शिष्टता, सौजन्य----शिष्टता, सौजन्य----शिष्टता----शिष्टता, सौजन्य----शिष्टत, मर्याद----पण्वु----शिष्टत, सत्स्वभावं----सौजन्य----
2851शिष्टाचारपुंलिंगपुंलिंग---शिष्टापूर्ण आचरण और व्यवहार ;औपचारिक आचरण।---सदाचारसदाचार---अख़्लाक----शा॑यिस्तु॑गी----भलमानसाई, सुठी हलति, दस्तूरी हलतिदस्तूरी हलति---शिष्टाचार----शिष्टाचार----शिष्टाचारलौकिकता---शिष्टाचारसभ्य आचरण---शिष्टाचार----मर्यादलांछन---पणबुळ्ळनडत्तै---मर्यादउपचारं---शिष्टाचारउपचार---
2852शिष्यपुंलिंगपुंलिंग---छात्र, विद्यार्थी ;अनुयायी, चेला।---शिश, शागिरदशिश, शागिरद---शागिर्दमुरीद---चाठचेलु॑---शिष्यु, चेलो----शिष्य, विद्यार्थीअनुयायी, चेला---शिष्य, छात्र, विद्यार्थीअनुयायी, चेलो---शिष्य, छात्रचेला---छात्र, विद्यार्थीअनुगामी, चेला---शिष्य----शिष्युडुशिष्युडु---शीडन्, माणवनपिन् पट॒ट॒बवर---शिष्यन्अनुयायि---शिष्यअनुयायि---
2853शीघ्रक्रिया विशेषण----जल्द, अविलंब, तुरंत, फौरन।----तुरत, फौरन----जल्द (फ़ौरन)----जलु॑द----जल्दी, सिघो----शीघ्र, सत्वर, लवकर----शीघ्र सत्वर, जलदी----शीघ्र, सत्वर (त्त)----शीघ्रे, तुरन्त----शीघ्र----शीघ्रमु----शीक्किरम्, उडने----शीघ्रं, वेगं----बेग, कूडलॆ----
2854शीघ्रतास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जल्दी ;तेजी, फुर्ती।---तेज़ी----जल्दी----जलदी----तकड़ि, सेघ----घाई, त्वरा----शीघ्रता, उतावळ----शीघ्रता, त्वराक्षिप्र, दुत---शीघ्रता, क्षिघ्रताबेग, खरधर---शीघ्रता----शीघ्रत, तोंदरशीघ्रत, स्फूर्ति---अवरसम्तुरिदम्, वेगं---शीघ्रतवेगत---अवसरवेग---
2855शीतलविशेषणविशेषण---ठंडा, सर्द ;आवेशरहित, शांत, सौम्य।---सीतल----सर्द (ठंडा)----शीतल, तुख्नसांथ---सीतलु, थधो----थंड, शीतळसौम्य, शांत---शीतल, ठंडुंसौम्य, शांत---शीतल, ठण्डाशान्त---चेंचा, शीतलशान्त, धीर---शीतळशान्त, धीर, सौम्य---शीतलमुशीतलमु---कुळिर्न्दअमैदियान---शीतलमाय, तणुततणुप्पन्---तंपादशांत, सौम्य---
2856शीर्षपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--किसी चीज का सबसे ऊपरी तथा उन्नत सिरा ;सिर ;ज्यामिति में वह बिन्दु जिसपर दो ओर से दो तिरछी रेखाएं आकर मिलती हों।--सिरासिरसिरा--चोटीसररास--प्यॊत, तॆंतलशेर, कलु॑शेर, कलु॑--सिरो, मथोसिरुसिरु--शीर्षमस्तकशीर्ष बिंदु--शीर्षसिर, माथुंशिरोरेखा--शीर्षमस्तक---शीर्षशिर, मूरशीर्ष, बिन्दु--शीर्षमुंडशीर्ष बिन्दु--शीर्षमुशिरमुशीर्ष बिंदुवु--मेल् बागम्तलैशीर्ष बिन्दु--मेलट॒टं॒शरस्सु, तलशीर्ष बिंदु--मेल्भागतलॆशीर्ष--
2857शीर्षकपुंलिंग----किसी लेख अथवा ग्रंथ आदि के ऊपर दिया जाने वाला नाम जिससे उनके विषय का कुछ परिचय मिलता है (टाइटल)।----सिरलेख----उ़न्वान----उनवान----सिरो, उन्वानु----शीर्षक----शीर्षक, मथाळुं----शीर्षक----शिरोनामा, शितान----शीर्षक----पेरु, शीर्षिक----तलैप्पु----तलक्कॆट्टु----शिरोनाम----
2858शीशापुंलिंग----दर्पण, आईना।----शीशा----शीशा----आ॑नु॑----शीशो, आईनो----आरसा, दर्पण----दर्पण, आयनो----आरशि, दर्पण----आइना, आर्ची----दर्पण, आरसी----अद्दमु----निलैक्कण्णाड़ि----कण्णटि----कन्नड़ि----
2859शुद्धविशेषणविशेषणविशेषण--पवित्र, निर्मल ;मिलावट रहित, असली ;अशुद्धि, गलती या भूल से रहित, ठीक, सही।--शुद्धशुद्ध---साफ़ख़ालिस (अस्ली)सहीह--शॅद----शुद्धि----पवित्र, निर्मल, शुद्धशुद्ध, अस्सलशुद्ध--शुद्ध, पवित्रअसलीसांचु, खरुं--पवित्र, निर्मलखाँटिठिक--पबित्र, निर्मलनिभाँजशुद्ध--शुद्ध----शुद्धमुशुद्धमुशुद्धमु--शुद्दमान, तूयकलप्पडमट॒ट॒पिळैयट॒ट॒--पवित्रंकलर्प्पिल्लात, तनिशरियाय--शुद्ध, मडियादअप्पट, बॆरकॆइल्लदतप्पिल्ल--
2860शुभ-चिंतकविशेषण----किसी की भलाई की सोचने वाला, शुभेच्छु।----हितू, शुभचिंतक----ख़ैर अंदेश (ख़ैर ख़्वाह)----रुतकांछन वोल----ख़ैर ख्वाहु, शुभ-चिंतकु----हितचिंतक, शुभेच्छु, शुभचिंतक----शुभचिंतक, शुभेच्छु----शुभचिन्तक----शुभाकांक्षी----शुभचिन्तक, शुभांकाखी, शुभेच्छुक----श्रेयोभिलाषि----नन्मै कोरुबवर्, आदरिप्पोर्----अभ्युदयकांक्षि----शुभचिंतक, हितैषि----
2861शुभागमनपुंलिंग----मंगलप्रद या सुखद आगमन।----शुभ आगमन----खुश आमदेद (खैर मक़्दम)----स्वागतम, खॅशामदीद---------शुभागमन----शुभागमन----शुभागमन----शुभागमन----शुभागमन----शुभागमनमु----नलवरवु----मंगलागमनं, स्वागतं----सुखागमन----
2862शुरुपुंलिंग----आरंभ, प्रारंभ।----शुरू----शुरूअ़----शॊरू, ग्वड ह्यॊन----शुरू----आरंभ, सुरुवात----शुरूआत, पहेल----शुरु, आरम्भ----आरम्भ----आरंभ----आरंभमु----आरंबम्, तॊड़क्कम्----आरंभं, तुटक्कं----आरंभ----
2863शुल्कपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--वह धन जो वस्तुओं की उत्पत्ति, उपभोग, आयात, निर्यात आदि करने पर कानूनन कर के रूप में देय हो ;विशिष्ट सुविधा प्रदान करने पर किसी संस्था को दिया जाने वाला धन, फीस ;चंदा।--मसूल, करफीसचंदा--मह़सूलफ़ीसचंदा--कश्टम्फीसचंदु॑--टैक्सुफ़ीचंदो--करफी, शुल्कवर्गणी--शुल्क, किंमतफीफाळो--मासुलफीसचाँदा--शुलक, करमाचुलचान्दा--शुळक, पासुल-भड़ाशुळ्क, पासुल-भाड़ाचान्दा--सुंकमु, शुल्कमुफीजुचंदा--कट्टणम्शुंगवरिशन्दा--चुङकंफीस्वरिसंख्य--सुंक, तॆरिगॆफीसु, शुल्कचंदा, वंतिगॆ--
2864शुष्कविशेषणविशेषण---सूखा ;सहृदयता एवं कोमलता रहित।---सुक्का----खुश्क----हॊखशशिख---खुश्कु----शुष्क, कोरडारुक्ष---शुष्क, सूकुंनीरस, अरसिक---शुष्क, शुकनो----शुकान, नीरसकर्कश, रुक्ष, निर्दय---शुष्क----शुष्कमुशुष्कमु---उलर्न्दमॆन् मैयट॒ट॒---शुष्कं, उणक्कनीरस माय---ऒणगिदनीरस---
2865शून्यविशेषण, पुंलिंगविशेषण, पुंलिंग---रिक्त, खाली ;गणित में अभाव सूचक चिह्न (जीरो)।---खालीसिफर---ख़लासिफ्ऱ---शिन्यह, सिफरसिफर---खालीबुड़ी---शून्य, रिक्तशून्य---शून्य, खालीमीडुं---शून्य, रिक्त----शून्य, रिक्तशून्य---शून्य----शून्यमुसुन्न---कालियानपूज्यम, सैफ़र---शून्यं, ऒळिञ्ञपूज्यं---खालिसॊन्नॆ---
2866शूरविशेषण, पुंलिंग----बहादुर, वीर, सूरमा।----सूरा, सूरबीर----शुजाअ़ (सूरमा)----बॊहदुर----सूरवीरु----शूर, वीर----शूर, वीर----शूर, वीर----बीर----शूर----शुरुडु----शूरन्, वीरन्----शूरन्, वीरन----शूर----
2867श्रृंखलास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---क्रम, तारतम्य माला, पंक्ति, कतार ;जंजीर, सिकड़ी।---लड़ी, सिलसिलालड़ी, सिलसिला---सिल्सिला----सिलसिलु॑, कतार----सिलसिलोज़ंजीर---क्रमश्रृंखला, साखळी---श्रृंखलासांकळ, बेड़ी---अनुक्रम, सारिश्रृंखला, निगड़---शृखंला, क्रमशिकलि, शृंखला---श्रृंखळाजंजीर---श्रृंखल, वरुस, श्रेणिगोलुसु---वरिशै, तोडर्चिशंगिलि---श्रृंखल, परम्परचङ्ङल---क्रमसरपळि---
2868श्रृंगारपुंलिंगपुंलिंग---सौंदर्य वृद्धि के लिए सौन्दर्य-प्रसाधनों द्वारा बनाव-सजाब;साहित्य में एक रस, रसराज।---शिंगारशिंगार---सिंगार (आराइश)वस्ल---सिंगार----सींगारुशृंगार रसु---श्रृंगार, प्रसाधनश्रृंगार रस---श्रृंगार, प्रसाधनश्रृंगार रस---सौन्दर्य वृद्धिर जन्य अंगराग----प्रसाधन, साजन-काचनशृंगार रस---श्रृंगारश्रृंगार रस---श्रृंगारमुश्रृंगार रसमु---ऒप्पनैअलंगारम्---अलंकारं, चमयल्श्रृंगार रसं---सिंगारश्रृंगार---
2869शेषविशेषण----बचा हुआ, बाकी।----बाकी----बाक़ी (बक़िया)----बाकु॑य----बाकी, बच्यलु----शिल्लक, बाकी----शेष, बाकी----शेष, अवशिष्ट, बाकी----अवशेष, बाकी----शेष----शेषमु----मीदि, मिच्चम्----वाक्कि शेषं----बाकि, मिक्किद----
2870शैलीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---ढंग, तरीका, पद्धति ;(साहित्य, कला) रचना अथवा अभिव्यक्ति का विशिष्ट ढंग।---ढंग, तरीकाशैली---तर्ज़ (तरीक़ा)उस्लूब (तर्ज़)---तरीकु॑----ढंगु, तरीकोशैली---पद्धत, रीतशैली---ढंब, रीतशैली---रीति, प्रणालीरचना, शैली---ढंग, पद्धति(रचना) शैली---शैली, रीति, प्रणाळी----शैलिशैलि---नडै, मुरै॒मोंऴि नड़ै---पद्धतिशैलि---राति, पद्धतिशैलि---
2871शैशवपुंलिंग----शिशु होने की अवस्था, गुण या भाव बचपन, लड़कपन।----बचपन----तफ़ूलियत (तिफ़्ली)----लॅकचार----बा॒राणी अवस्था, बाकपुणो----बालपण, शैशव----शैशव, बाळपण----शैशव, बाल्यकाल----शैशब----शैशवमु----शैशवमु----कुळन्दैप्परुवम्----शैशवं, कुट्टिक्कालं----शैशव----
2872शोकपुंलिंग----इष्ट वस्तु या आत्मीयजन के वियोग, नाश या मृत्यु के कारण होने वाली मानसिक व्यथा, घोर दु:ख।----सोग----सद्मा (ग़म)----शूख----शोकु, ग़मु, दुखु----दु:ख, शोक----शोक, खेद----शोक----शोक----शोक----शोकमु----वरुत्तम्, दुक्कम्----दु:ख, शोकं----दु:ख, व्यर्थ----
2873शोधपुंलिंगपुंलिंग---छिपी हुई तथा रहस्यपूर्ण बातों की खोज करना, अन्वेषण;जाँच, परीक्षण।---खोजजांच---तह्क़ीक़----तहकीक----खोजजाच---शोध, तपास, संशोधनपरीक्षण---संशोधन, अन्वेषण----गवेषणा॒, खोज (न)परीक्षा॒ (क्ख)---बिचार, अन्वेषणपरीक्षण, निरीक्षण---गबेषणा, अन्बेषणजांच, परीक्षण---परिशोधनपरीक्षण---आराय्च्चिपरीक्षित्तल्, परिशोदनै---अन्बेषणं, गवेषणंपरिशोधन, परीक्षणं---अन्वेषणॆपरिशीलनॆ---
2874शोभास्त्रीलिंग----कांति, चमक।----सोभा----नूर (रौनक़)----शूब, चमक----सोभ्या, सूंहं----शोभा----शोभा, कांति----शोभा, कान्ति----शोभा, कान्ति----शोभा, कान्ति----शोभ, सोबगु----ऎळ्लि, ऒळि----शोभ----हॊळपु----
2875शोषणपुंलिंग----परोक्ष उपायों से किसी की कमाई या धन धीरे-धीरे अपने हाथ में करना (एक्सप्लायटेशन)।----लुट्ट-चुंध शोषण----इस्तेहसाल----नाजा॑विज़ फायदु॑----चूसणू, डुहणु----शोषण----शोषण----शोषण॒ (न)----शोषण----शोषण----शोषणमु----शुरण्डल्----चूषणं----शोषणॆ----
2876श्रद्धांजलिस्त्रीलिंग----किसी पूज्य या बड़े व्यक्ति के संबंध में श्रद्धा और आदरपूर्वक कही जाने वाली बातें।----शरधांजली----ख़राजे अ़क़ीदत----ख़राजे अ़क़ीदत, श्रदाँजली----श्रृद्धांजली----श्रद्धांजली----श्रृद्धांजलि----श्रृद्धाञ्जलि----श्रद्धांजलि----श्रृद्धांजळि----श्रृद्धांजलि----मरियादै शेलुत्तल्---------श्रृद्धांजलि----
2877श्रद्धास्त्रीलिंग----पूज्य और बड़े लोगों के प्रति आदरपूर्ण आस्था या भावना।----शरधा----अ़क़ीदत----श्रदा, पछ़----श्रद्धा----श्रद्धा----श्रद्धा, आस्था----श्रद्धा, भक्ति----श्रद्धा----श्रद्धा----श्रद्ध----शिरद्दै, मदित्तल, मरियादै----बहुमानं----श्रद्धॆ----
2878श्रमपुंलिंगपुंलिंग---मेहनत, परिश्रम ;जीविका-निर्वाह या धन उपार्जन के लिए किया जाने वाला कार्य।---मेहनतमेहनत---मेहनतमज़्दूरी---श्रम, मेहनथमॊज़ूर्य---पोर्हियो, महिनत----परिश्रम, मेहनतश्रम---श्रम, मेहनत----मेहनत, परिश्रम----श्रम, परिश्रमखाटनि, श्रम---श्रमश्रम---श्रमकायकष्टमु---उऴैप्पुतॊळ्लि, उद्दियोगम्---प्रयत्नं, परिश्रमंवेल---दुडितदुडियुविकॆ---
2879श्रमदानपुंलिंग----किसी सामूहिक हित के लिए स्वेच्छा से नि:शुल्क श्रम करना।----श्रम-दान----शरमदान----श्रमदान----श्रम-दान, महिनत-दानु----श्रमदान----श्रमदान----श्रमदान----श्रमदान----श्रमदान----श्रमदानमु----उदियणिन्रि, उदवि सॆय्दल्----श्रमदानं----श्रमदान----
2880श्रमिकपुंलिंग----शारीरिक श्रम द्वारा जीविका चलाने वाला, मजदूर।----मज़दूर----मज़्दूर----मॊज़ूर----पोर्हियतु, मज़ूरु----श्रमिक, मजूर----श्रमिक----श्रमिक, मजुर----श्रमिक, कामाला, बनुवा----श्रमिक----कार्मिकुडु----तोऴिताळि----तॊऴिलाळि----श्रमिक----
2881श्राद्धपुंलिंगपुंलिंग---सनातनी हिन्दुओं में पितरों या मृत व्यक्तियों को प्रसन्न कराने के उद्देश्य से किए जाने वाले पिंडदान, ब्राह्मण भोजन आदि कृत्य जो उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए किए जाते हैं।आश्विन मास का कृष्ण पक्ष, जिसमें विशिष्ट रूप से उक्त प्रकार के कृत्य करने का विधान है, पितृपक्ष।---सराधसराध---सराध----श्राद्धश्राद्ध---श्राद्धु----श्राद्धपितृपक्ष---श्राद्धपितृपक्ष---श्राद्धपितृ-पक्ष॒ (क्ख)---श्राद्ध, शराधपितृपक्ष---श्राद्ध----श्राद्धमुतद्दिनमु---शिराद्दम्तेवसम्---श्राद्धं, चात्तं----श्राद्धपितृपक्ष---
2882श्रीमान (श्रीमती)पुंलिंग----'श्री' पुरुषों के नाम से पूर्व प्रयुक्त एक आदरसूचक विशेषण (स्त्री के नाम के पूर्व श्रीमति)।----स्रीमान, स्रीमति----मोहतरम/जनाब (मोहतरमा)----श्रीमा॑न, जनाब श्रीम॑ति, मॊहतरिमा----श्रीमानु----श्रीमान (श्रीमति)----श्रीमान----श्रीमान, सौभाग्यशाली----श्रीमान----श्रीमान, श्रीमति----श्रीयुतुलु, श्रीमति----तिरुवाळर/श्रीमान, तिरुमति/श्रीमति----श्रीमान----श्रीमान (श्रीमति)----
2883श्रुतलेखपुंलिंग----वह लेख जो किसी के द्वारा बोले हुए वाक्यों को सुनकर लिखा जाए (डिक्टेशन)।----इबारत----इम्ला----इमला, डिक्टेशन----सूरतख़ती----श्रुतिलेखन----श्रुतलेखन----श्रुतिलेखन----श्रुतलिपि----श्रुत-लिखन----श्रुतलेखनमु----केट्टॆळुत्तु----केट्टेंऴुत्तु----उक्त लेखन----
2884श्रेणीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कतार, पंक्ति ;कार्य, योग्यता, आदि के विचार से पदार्थों, व्यक्तियों आदि का वर्ग, विभाग या दर्जा।---स्रेणीस्रेणी---सफ़दर्जा---दरजि, जमाथदरजि---कतारदर्जो---ओळ, पंक्तिवर्ग, दर्जा, श्रेणी---श्रेणी, पंक्तिवर्ग, कक्षा, दरजो---श्रेणी॒, सारि (न)विभाग---शारी, लानिश्रेणी, वर्ग---श्रेणी----श्रेणी, वरुसश्रेणी, वरुस---वरिशैतरम्, वगुप्पु---श्रेणी, वरि, पन्तिक्ळासु, वुकुप्पु---सालुवर्ग---
2885श्रेयपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--अच्छाई, उत्तमता ;मंगल, कल्याण ;यश।--अच्छाईभलाईसिहरा--ख़ूबीनेकीनेकनामी--बज्यररुतशॊहरत--चड़ाईभलोजसु--चांगलेपणामंगल, कल्याणयश, श्रेय--श्रेयकल्याण, शुभयश, पुण्य--श्रेष्ठता, उत्तमताश्रेय, मंगल, शुभयश--श्रेय, भालकल्याण, मंगलयश, कीर्त्ति--श्रेय----श्रेयस्सु, मेलुश्रेयस्सु, मेलुश्रेयस्सु, मेलु--शिर॒प्पुनन्मैकीर्ति, पुगऴ्--श्रेयस्स्मंगळं, नन्मकीर्ति--ऒळ्ळॆयतनक्षेमयशस्सु, हसरु--
2886श्रेष्टविशेषण----गुण, मान आदि के विचार से बढ़कर, उत्तम, उत्कृष्ट।----उत्तम----बेहतरीन (उ़म्दा)----रुत, ज़बर----श्रेष्ठु, उत्तमु----श्रेष्ठ, उत्कृष्ट----श्रेष्ठ, सर्वोत्तम----श्रेष्ठ, उत्तम, उत्कृष्ट----श्रेष्ठ, उत्कृष्ट----श्रेष्ठ----श्रेष्ठमु----मिगच्चिर॒न्दं----श्रेष्ठं, उत्कृष्टं----श्रेष्ठ----
2887श्रोतापुंलिंगपुंलिंग---सुननेवाला (लिसनर);किसी सभा, नाटक-प्रदर्शन आदि के दर्शक, सुनने वाले या पाठक (बहुवचन में) (आड्यंस)।---स्त्रोता----सामेअ़सामेअ़न---बोज़न बा॑लवुछन तु॑ बॊज़न वा॑ल्य---बुधंदड़ुबुधंदड़---श्रोता----श्रोता----श्रोता, श्रवण॒कारी (न)----श्रोता, शुनोताश्रोता, उपस्थित राइज---श्रोता----श्रोतश्रोतलु---गवनित्तुक् केट्पवर्सबैयोर्---श्रोतावुसदस्यर॒---केळुवव, श्रोतृसभिकरु---
2888श्लाघनीयविशेषण----प्रशंसनीय।----शलाघायोग----क़ाबिले तारीफ़ (क़ाबिले तहसीन)----ता॑रीफ करनस लायक----साराह जोगो॒----श्लांघनीय, प्रशंसनीय----श्लांघनीय, प्रशंसनीय----श्लांघनीय, प्रशंसनीय----शळाघनीय----श्लाघनीय----श्लांघनीयमु, श्लांघ्यमु----पुगळत्तक्क, पाराट्टत्तक्क----श्लाघनीयं, श्लाघ्यं----श्लाघ्य, मॆच्चलु, योग्यवाद----
2889श्लाघास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---प्रशंसा ;चापलूसी।---शलाघाशलाघा---तारीफ़ (सिताइश)खुशामद---ता॑रीफ----साराहचापलूसी---प्रशंसा, श्लाघाखुशामत---श्लाघा, प्रशंसाखुशामत---श्लाघा, प्रशंसाखोशामद---प्रशंसातोषामोद---श्ळाघा, प्रशंसा----श्लाघ, प्रशंसमुख स्तुति---पाराट्टुमुगुत्तुदि---श्लाघ, प्रशंसमुख स्तुति---हॊगळिकॆमुख स्तुति---
2890श्वासपुंलिंगपुंलिंग---प्राणियों का नाक से श्वास खींचकर अंदर फेफड़ों या हृदय तक पहुँचाना और फिर बाहर निकालना, सांस ;दमा नामक रोग।---साहसाह---सांस (दम)दमा---शाहशाँश---साहुदमु, सहिको---श्वासदमा---श्वासदमा---नि:श्वास-प्रश्वासहाँपानि रोग---श्वास, उशाह-निशाहहापानि, श्वास रोग---श्वास, निश्वास-प्रश्वासश्वास-रोग---श्वास, ऊपिरिउब्बसमु---मूच्चु, शुवासम्शुवास नोय्---श्वासंआस्म रोगं, कांस---उसिरुदम्मु, गूरलु---
2891श्वेतविशेषणविशेषण---धवल, उजला, सफेद, गोरा ;निर्मल, स्वच्छ, साफ।---सफैदसफैद---सफेद----सफेदन्यर्मल, साफ---अछोउजिरो, साफु---श्वेत, पांढरानिर्मल, स्वच्छ---श्वेत, ऊजळुं गोरुंनिर्मळ, स्वच्छ---श्वेत, सित, गोरानिर्मल, स्वच्छ---बगानिर्मल, परिष्कार---श्वेत----तेलुपु, श्वेतवर्णमुधवळमु---वॆण्मैयानतूय, शुद्दमान---वॆळुत्त, श्वेतंस्वच्छं, निर्मलं---बिळिनिर्मल---
2892षड्यन्त्रपुंलिंग----साजिश, कुचक्र।----खड़िअंतर----साज़िश----सा॑ज़िश----साज़शि, मन्सूबो----कट, कारस्थान, षड़यंत्र----षड्यंत्र, कावतरुं----षडयंत्र, कुचक्र----षडयंत्र----षड्जन्त्र----कुटू, पन्नागमु----सूलच्चि, सतियालोचनै----गूढालोचन----ऒळसंचु----
2893संकटपुंलिंग----विपत्ति, मुसीबत, आफत, आपत्ति।----संकट----मुसीबत (आफ़त)----संकट, सांक॑ठ----संकटु----संकट----संकट, मुसीबत, आफत----संकट, विपद----संकट, बिपद, बिपत्ति----संकट----संकटमु, आपद----संकड़म्, तोन्दरवु----आपत्तु, विषमसंधि----विपत्ति, गंडांतर----
2894संकलनपुंलिंगपुंलिंग---एकत्र करने की क्रिया, संग्रह करना;ऐसी साहित्यिक कृति जिसमें अनेक ग्रंथों या स्थानों से बहुत-सी रचनाएं इकट्ठी करके रखी गई हों।---संकलनसंकलन---तद्वीन----सॊबरन, मजमूअसॊंबरन, मतमूअ॑---गड॒ण जो कमुसंग्रहु, मज्मूओ---संकलन----संकलन, संग्रह----संकलन, एकत्रीकरण॒ (न)----संकलन, संग्रहसंकलन---संकळन----संग्रहमुसंकलनमु---ऒन्रु॒ शेर्त्तल्तॊगुप्पु---संग्रहिक्कल्, समाहरणं----कूडिसुवुदुसंकलनॆ---
2895संकल्पपुंलिंगपुंलिंग---दृढ निश्चय, इरादा ;सभा-समिति में किसी विषय में विचारपूर्वक किया हुआ पक्का निश्चय (रिज़ोल्यूशन)।---संकलपमता---अ़ज्मकरारदाद---संकलु॑पकरारदाद---संकलपु----संकल्प, निश्चयनिर्धार---संकल्प, निश्चयनिर्धार---संकल्प, दृढ निश्चय----संकल्पप्रस्ताव, सिद्धान्त---संकळ्प----संकल्पमुतीर्मानमु---तीर्मानम्, मन उरु॒दितीर्मानम्, मुडिवु---संकल्पंप्रमेयं---दृढ़ निश्चयनिर्धार---
2896संकीर्णविशेषण----तंग, संकुचित, अनुदार।----संकीरण----तंग----तंग----तंगि, सोढ़ो----संकीर्ण, संकुचित----संकीर्ण, संकुचित----अप्रशस्त, संकीर्ण॒ (न)----संकीर्ण, ठेक----संकीर्ण----संकीर्णमु, संकुचितमु----कुरु॒गलान----संकीर्णं, इटुङ्ङिय----संकुचित----
2897संकेतपुंलिंगपुंलिंग---अभिप्राय सूचक अंगचेष्टा, इशारा ;चिह्न, निशान।---संकेतसंकेत---इशारा----इशारु॑----इशारोनिशानु---इशारा, संकेतखूण, चिह्न---संकेत, इशारोचिह्न---संकेत, इशाराचिह्न, लक्षण॒ (न)---इंगित, संकेतचिन---संकेत----संकेतमु, संज्ञसंकेतमु, संज्ञ---जाडैअडैयाळम्---आङ्ग्यंचिह्नं, अटयाळं---सन्नॆगुरुतु---
2898संकोचपुंलिंगपुंलिंग---सिकुड़ने की क्रिया या भाव ;झिझक, हिचक।---संकोचसंकोच---इन्क़िबाज़ (तंगी)झिझक (तअम्मुल)---संकूच़----सोसिहब॒क, लज॒---आकुंचनसंकोच---संकोचआंचको, लज्जा---गुटानोसंकोच, इतस्तत:---संकोच, कोंचद्विधा, संकोच---संकोच----संकोचमुसंकोचमु---शुरुंगुदलकूच्चम्---चुरुङ्ङल्सङ्कोचं---मुदुडुविकॆसंकोच, अंजिकॆ---
2899संक्रान्तिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि मे जाना ;वह दिन जिसमें सूर्य का उक्त प्रकार का संचार होता है, जो हिन्दुओ में माना जाता है।---संगरांदसंगराद---तह्वीले आफ़ताबसंक्रांत---सांक॑राथ----संक्रांती----संक्रान्तिसंक्रान्त---संक्रांतिसंक्रान्त---संक्रान्ति----सूर्यर राश्यान्तर गमनसंक्रान्ति तिथि---संक्रान्ति----संक्रांतिसंक्रमणमु---संकिरान्ति, परुवकालम्दक्षिणायन/उत्तारायण/आरंबम्---संक्रान्ति, संक्रमंसंक्रान्ति---संक्रान्तिसंक्रांति---
2900संक्रामकविशेषण----एक से दूसरे में संक्रमण करने वाला छूत आदि से फैलने वाला (रोग) (कान्टेजियस)।----छूत----मुतअ़द्दी----लागिदार----विचुड़ंदड़/वचुड़ंदडु----सांसर्गिक, संक्रामक----संक्रामक----संक्रामक----संक्रामक, सोंचरा----संक्रामक----संक्रमिंचु, अंटु----तॊत्तुगिर॒ (नोय)----संक्रामकं, पकरुन्न----अंटुरोग----
2901संक्षिप्तविशेषण----छोटा किया हुआ लेख, पुस्तक आदि का रूप, सार, संक्षेप।----संखेप----मुख़्तसर (तलख़्ख़स)----मॅखसर----मुख्तसिरु/घटायलु----संक्षिप्त----संक्षिप्त, टूंकुं----संक्षि॒प्त, (क्ख)----संक्षिप्त, सार, संक्षेप----संक्खिप्ति----संक्षिप्तमु,----सुरुक्कमान----संक्षिप्तं, चुरुङ्ङिय----संक्षिप्त----
2902संक्षेपपुंलिंग----लेख आदि का काट-छांटकर छोटा किया हुआ रूप, सार।----संखेप----ख़ुलासा (तल्ख़ीस)----मॅखसर----सारु, इख़्तसारु----संक्षेप----संक्षेप, सार----संक्षे॒प, सार (क्ख)----संक्षेप, सार----संक्खेप----संक्षेपमु, क्लुप्तमु----सरुक्कम्, सारम्----संक्षेपं, चुरुक्कं, सारांशं----संक्षेप, सारांश----
2903संख्यास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---गिनती, तदाद, गणना ;2, 1, 2, 3 आदि अंक।---गिणती----त़ादादअ़दद (हिंदिसा)---तेदादग्रंद---अददुअंगु---गणनासंख्या---संख्या, गणना----गण॒ना, हिसाब (न)अंक---गणना, गन्तिसंख्या---संख्या----संख्यसंख्य---ऎण्णिक्कैऎण्गळ---ऎण्णं, संख्यसंख्य---ऎणिकॆसंख्यॆ---
2904संगठनपुंलिंग----कार्य विशेष की सिद्धि के लिए निर्मित कोई संस्था।----संगठण----तंज़ीम----जमाथ, संगठन----संगठनु, संस्था----संस्था, समिति----संगठन, संस्था----संगठन, समिति----संगठन, संघ, संस्था----संगठन----संगठनमु----अमैप्पु----संघटन----संस्थॆ----
2905संगतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---मेल-मिलाप, संग, साथ, सोहबत ;सामंजस्य, उपयुक्तता।---संगतसंगती---सोहबतमुनासबत---मेल-जोल----संगति, साधुमौज़ूनियत---संगत, साथसामंजस्य---संगति, संयोगमेऴ---संगति, मिलनसामञ्जस्य---संग, मिलन, सम्पर्कसंगति, मिल, सामंजस्य---संगति, सम्पर्कसामंजस्य, उचजुक्तता---सांगत्यमुसंदर्भ, शुद्धि---शेर्क्कैइशैवु---कूट्टुसामंजस्यं, योजिप्पु---सं॑गति, जॊतॆसामंजस्य---
2906संगीतपुंलिंग----ध्वनियों या स्वरों का कुछ विशिष्ट लय में होने वाला प्रस्फुटन (म्यूज़िक)।----संगीत----मूसीक़ी----ग्यवुन/मा॑सीकी----संगीतु----संगीत----संगीत----संगीत----संगीत----संगीत----संगीतमु----संगीदम्, इशै----संगीतं----संगीत, हाडुगारिकॆ----
2907संगोष्ठीस्त्रीलिंग----किसी निर्धारित विषय पर आमंत्रित विद्वानों की चर्चा तथा उनका निबंध-पाठ।----गोशटी----सेमिनार----सॆमिनार----मेड़ु, बैठक----परिसंवाद----संगोष्ठी, परिसंवाद----गोष्ठी----संगोष्ठी/आलोचना-चक्र----पाठ-चक्र----गोष्ठि----करुत्तरंगु----चर्चा सम्मेळनं----गोष्ठि----
2908संग्रहालयपुंलिंग----वह स्थान जहाँ विशेष महत्त्व की वस्तुओं का संग्रह किया गया हो (म्युज़ियम)।----अजाईबघर----मियूजियम (अ़जाइबख़ाना)----अजॊईबगर----अजायब घरु/म्यूज़ियमु----संग्रहालय----संग्रहालय----संग्रहालय, जादुघर----संग्रहालय----संग्रहाळय----वस्तुप्रदर्शनशाल----कलैक्कूडम्----संग्रहालयं/म्यूसियम्, काळ्चबंग्ळावु----वस्तु संग्रहालय----
2909संग्रामपुंलिंग----युद्ध, लड़ाई, समर।----संगराम----जंग----लडा॑य----संग्रामु, जंगि----युद्ध, संग्राम----संग्राम, युद्ध----संग्राम, लड़ाई, युद्ध----संग्राम, युद्ध----संग्राम----संग्राममु----युद्दम्, पोर्----समरं, युद्धं----युद्ध----
2910संघटनपुंलिंगपुंलिंग---कार्य विशेष की सिद्धि के लिए निर्मित कोई संस्था ;किसी चीज के विभिन्न अवयवों को जोड़कर उसे प्रतिष्ठित करना, रचना।---संगठणसंगठण---तंजीम----तंज़ीम, संगठन, जमाथतंज़ीम, संगठन, जमाथ---संगठनु, संस्थासंगठनु, गडु करणु---संस्था, संघसंघटन---संघटन, संगठनरचना---संगठन, संघ, संस्था----संघ, संस्थारचना, गठन---संघटन----संघटनमुसंघटनमु---अमैप़्पुओऩरु॒ शेर्त्तु---संघटनघटन---संस्थॆजोडिसुविकॆ---
2911संघर्षपुंलिंगपुंलिंग---स्पर्धा, होड़ ;कठिनाइयों या प्रबल विरोधी शक्तियों को दबाने के लिए प्राणपण से की जाने वाली चेष्टा।---संघरशसंघरश---मुक़ाबला (कशमकश)जिद्दो जेहद---हलु॑बलु॑मुकाबेलु॑---स्पर्धासंघर्षु, टकरु---संघर्ष, हरीफाईसंघर्ष----संघर्ष---संघर्ष, स्पर्धा, विवाद----प्रतिद्वन्द्विताप्राणपणे करा चेष्टा---संघर्ष----संघर्षमुसंघर्षमु---मोदल्पोराट्टम्---मत्सरंसंघर्षं---स्पधॆ, पंद्यसंघर्षणॆ, होराट---
2912संचयपुंलिंगपुंलिंग---चीजें इकट्ठी करने की क्रिया या भाव;इकट्ठी की हुई चीजों का ढेर या राशि।---जोड़णढेर---जमअ़----सॊबंरावुनसंच्यथ----मेडु, ढिगु---संचयसंग्रह, साठा---संचय, संग्रहजमाव---संचय, संग्रहसमूह---एके ठाइते गोटोबा, साँचन, संचयथूप, दम---संचय----सग्रहमु, संचयनमुसंचितमु---शेगरित्तल्कुवियल्---शेखरणंसंचयं, शेखरं---संचय, संग्रहराशि---
2913संचारपुंलिंगपुंलिंग---गमन, चलना, चलाना ;आजकल संदेश, समाचार तथा समान आदि भेजने की क्रिया, प्रकार और साधन।---संचारसंचार---हरकतमवासिलात---यितु॑गछ़ मवासिलातशॆछ वातु॑नावनुक सिलसिलु॑---हलणु, हलाइणुसंचारु---गमन, संचारसंचार, व्यवस्था---संचारसंचार, व्यवस्था---संचार, चलन----गमन, चलनयोगायोग---संचार----संचारमुरवाणा प्रापकमु---संचरित्तल, शेललुदल्----संचारिक्कल्वार्ताविनियमं---संचार, तिरुगाटसंचार---
2914संचालकविशेषणपुंलिंग---चलाने या गति देने वाला (कंडक्टर)।वह प्रधान अधिकारी जो किसी कार्य, विभाग, संस्था आदि चलाने की सारी व्यवस्था करता हो, निदेशक।---संचालकसंचालक---कंडक्टरडाइरेक्टर (नाज़िम)---चलावन वोलडाइरॆक्टर---हलाइदंडुसंचालकु, मुख अधिकारी---संचालकनिर्देशक---संचालक, चलावनारनियामक---संचालक, मतिदायकनिर्देशक---परिचालक, संचालकसंचालक---संचाळकनिर्देशक, परिचाळक, संचाळक---संचालकुडुसंचालकुडु---नडत्तुनरमेलाळर्---नटत्तिप्पुकारन्, कण्डक्टर॒मानेजर्, मेछावि---कंडक्टर्निर्देशक, संचालक---
2915संततिस्त्रीलिंग----संतान, बाल-बच्चे, औलाद।----संतान----औलाद (नस्ल)----अवलाद----संतानु, औलादु----संतति----संतति, ओलाद----सन्तान, छेलेपुले----सन्तान, सन्तति----संतति----संतति, संतानमु----संतति, कुऴन्दै कुट्टिगळ्----संतति----मक्कळु----
2916संतापपुंलिंगपुंलिंग---अग्नि, धूप आदि का बहुत तीव्र ताप;बहुंत तीव्र मानसिक क्लेश या पीड़ा।---संतापसंताप---हिद्दतसोज़िश---ताफद्यमा॑गी अजाब---तपति, जलनिमन जी तिखी पीड़ा---दाह, तापसंताप---संताप, दु:ख----उत्तापसन्ताप---ताप, उत्तापसन्ताप---संताप----तापमुसंतापमु---दहित्तल्मनक्कष्टम्, वेदनै---कॊटुंचटुसंतापं---बेगॆव्यथॆ---
2917संतुलनपुंलिंगपुंलिंग---वह स्थिति जिसमें सभी अंग बराबर के या यथास्थान हो ;तोलते समय दोनो पलड़ो का बराबर होना।---संतुलन, समतोलसंतुलन, समतोल---तवाज्रुन----तवोज्रुन----तवाज्रुन, बराबरी----तोलसमतोल---तोल, समतोलसंतुलन---सुसमताभार साम्य---सन्तुलन, समता, भार साभ्यसमतुलन, समानजोख---सतुळन----संतुलनमुसंतुलनमु---शीरान निलैशीर् तूक्कल---संतुलनंसममान ऍडै---सामंजस्य, संतुलनॆसमतूक---
2918संतुष्टविशेषणविशेषण---जिसका संतोष कर दिया गया हो या हो गया हो, तृप्त ;जो समझाने-बुझाने से राजी हो गया या मान गया हो।---संतुशटसंतुशट---आसूदामुत्मइन---खॅश रोज़ुनमुतमयिन---सन्तोषीराज़ी---संतुष्ट, तृप्तसम्मत---संतुष्टसंमत---संतुष्ट, तृप्तसम्मत---तुष्ट, संतुष्टतुष्ट, जित योवा---संतुष्ट, तृप्तसंतुष्ट, तृप्त---तृप्ति, चेंदिनसंतृप्तुडु---तिरुप्ति अडैन्दवनऒप्पक्कोण्ड---संतृप्तन्अनुकूलिच्च---तणिद, तृप्तसमाधानगॊंड, राजियाद---
2919संतुष्टिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---संतुष्ट होने की क्रिया या भाव तृप्ति;संतोष।---संतुशटी----आसूदगीइत्मिनान---त्रप्तीसंतूश---राज़िपोसंतोषु---तृप्तिसंतोष---संतुष्टि, तृप्तिसंतोष---संतुष्टिसंतोष---संतुष्टि, तृप्तिसंतोष---संतुष्टि, तृप्तिसंतोष---संतृप्तितृप्ति, तुष्टि---मन निरै॒वुतिरुप्ति---तृप्तिसंतोषं---तणियुविकं, तृप्तिसमाधान---
2920संतोषपुंलिंगपुंलिंग---वह मानसिक अवस्था जिसमें व्यक्ति प्राप्त होने वाली वस्तु को यथेष्ट समझता है और उससे अधिक की कामना नहीं करता ;सब्र, धीरज, इतमीनान।---संतोखसंतोख---सव्र (क़नाअ़त)----तसली, स्यॆप्यरसबु॑र---संतोषु----संतोष, समाधानधीर---संतोष, तृप्तिधीरज---संतोष, तृप्तिधैर्य---संतोषसंन्तोष---संतोष----तृप्तिओपिक---मन-निरैवु, तिरुप्तिपॊरुमै---संतृप्तिक्षम, समाधानं---तृप्तिताळ्मॆ---
2921संतोषजनकविशेषणविशेषण---संतोष देनेवाला, संतोषप्रद ;पर्याप्त, यथेष्ठ, काफी।---संतोखजनक----इत्मिनान बख़्शकाफ़ी---तसलीबखु॑श----संतोष जोगो॒,काफी---संतोषप्रदपर्याप्त---संतोषजनकपर्याप्त---संतोषजनकयथेष्ट---संतोषजनकयथेष्ट---संतोषजनक----तृप्ति करमुयथेष्टमु---तिरुप्ति अळिक्किरपोदुमान---तृप्ति करंयथेष्टं---तृप्तिकर, समाधानकरसाकष्टु---
2922संदर्भपुंलिंग----पुस्तक, लेख आदि में वर्णित प्रसंग, विषय आदि जिसका विचार या उल्लेख हो, प्रसंग।----संदरभ, प्रसंग----हवाला (सियाक़ोसि-बाक़)----हवालु॑----हवालो----संदर्भ----संदर्भ----प्रसंग----संदर्भ, प्रसंग----संदर्भ----संदर्भमु----सन्दर्बम, सूऴ्निलै----संदर्भं----प्रसंग----
2923संदेशपुंलिंग----समाचार, पैगाम, खबर।----संदेस, सुणेहा----पैग़ाम (ख़बर)----पा॑गाम----संदेशु, पैगामु----संदेश----संदेश, समाचार, खबर----सवांद, वार्ता, समाचार----समाचार, खबर----संदेश----संदेशमु वार्त----सॆयदि, समाचरं----संदेशं----सुद्दि----
2924संन्यासपुंलिंगपुंलिंग---पूरी तरह से छोड़ना, परित्याग करना;चतुर्थ आश्रम (हिन्दुओं का) जिसमें सब प्रकार के सांसारिक संबंध छोड़कर मनुष्य त्यागी और विरक्त हो जाता है।---सन्निआससन्निआस---तर्कफ़क़ीरी---सनियाससनियास---सन्यासु----परित्यागसंन्यास---परित्यागसंन्यास---सन्न्यास, सम्पूर्ण॒ त्याग (न्न)----संपूर्ण बैराग्यसंन्यास---संन्यास----सन्यासमुसन्नयासाश्रममु---मुट॒ट॒म् तुर॒त्तल्, सन्नियासमंसन्यासम्, तुर॒वर॒म्---संन्यासं----परित्यागसन्यास---
2925संन्यासीपुंलिंगपुंलिंग---जिसने संन्यास आश्रम ग्रहण किया हो ;त्यागी और विरक्त।---सन्निआसी----फ़कीर (सन्यासी)तारिकुद्दुनिया (ज़ाहिद)---सनिया॑स्य----सन्यासी----संन्यासीत्यागी, विरक्त---संन्यासी, त्यागीत्यागी, विरक्त---संन्या॒सी (न्न)त्यागी, बैरागी---संन्यासीबैरागी---संन्यासी----सन्यासिसन्यासि---सन्नियासितुर॒वि---संन्यासिविरक्तन्---सन्यासीविरक्त---
2926संपन्नविशेषणविशेषणविशेषण--पूरा किया हुआ, पूर्ण मुकम्मल ;किसी गुण या वस्तु से युक्त ;खुशहाल, धनी, अमीर।--मुकम्मलमुकम्मलअमीर--मुकम्मलपुरख़ुशहाल--आसनवा॑लसॊसड॑खिजल--पूरो, मुकमलुभर्यलुअमीरु, धनवानु--संपूण, संपन्नसंपन्न, परिपूर्णसंपन्न, श्रीमंत--संपन्नयुक्त, सहितश्रीमान, वैभवशाळी--सम्पूर्ण॒ (न)----सम्पूर्णसम्पन्नअवस्थापन्न, धनी--संपन्न----समाप्तमुसंपन्नमुसंपन्नुडु--निरैवु, पॆट॒ट॒बशदियुडन् कूडियसॆल्वम् पडैत्त--निर॒वेरि॒यचेर्न्नसंपन्नन्, धनिकन्--पूर्णवाद, मुगिदकूडिदश्रीमंत--
2927संपर्कपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--मेल, संयोग ;आपस में होने वाला किसी प्रकार का लगाव, वास्ता या संसर्ग ;स्पर्श।--मेल, संपरकमेल, संपरकमेल, संपरक--रब्ततअ़ल्लुक़लम्स--रा॑बितु॑----मेलापुवास्तो, लागा॒पो---संबंध, संसर्गसंपर्कस्पर्श--संपर्कसंबंध, संगस्पर्श--संबंध, संयोगसंपर्कस्पर्श--मिल, संयोगसंपर्क, संसर्गस्पर्श, संयोग--संपर्क, संयोगसंसर्गस्पर्श--संपर्कमु, संधानमुसंबंधमुसंसर्गमु, स्पर्श--इणैप्पुतॊडर्बुतॊडुदल्--संपर्कंसंबंन्धं, बन्धंस्पर्शं--सेरुविकॆ, संयोगसंपर्कस्पर्श--
2928संपर्क भाषास्त्रीलिंग----वह भाषा जिससे विभिन्न देशों अथवा प्रदेशों के लोग आपस में सूचना, विचारों आदि का आदान-प्रदान करते हैं।----संपरक-भाषा----राबिते की ज़बान----रा॑बिती जबान----जोड़ीदंड़ बो॒ली गां॒ढू बो॒ली----संपर्क भाषा----संपर्क भाषा----संपर्क-भाषा----संपर्क भाषा----संपर्क भाषा----संधान भाष----तॊडर्बु मॊळि----संपर्क भाष, बंधभाष----संपर्क भाषॆ----
2929संपादकपुंलिंग----वह जो किसी पुस्तक, सामयिक पत्र आदि के सब लेख या विषय अच्छी तरह ठीक करके उन्हे प्रकाशन के योग्य बनाता है (एडिटर)।----संपादक----मुदीर----संपाकद, मुदीर, अडिटर----सुपादकु----संपादक----संपादक----सम्पादक----सम्पादक----संपादक----संपादकुडु----पत्तिरिगै-आशिरियर् तोगुप्पाळर----पत्राधिप्र, प्रसाधकन्----संपादक----
2930संपादकीयविशेषणपुंलिंग---संपादक संबंधी या संपादक का।संपादक द्वारा लिखी हुई टिप्पणी या अग्रलेख।---संपादकीसंपादकी---इदारतीइदारिया---अदा॑रियिसंपादकी---संपादक सां वास्तेदारुसंपादकी लेखु---संपादकीयअग्रलेख---संपादकीयअग्रलेख---सम्पादकीय----सम्पादकीयसम्पादकीय---संपादकीय----संपादकीयमुसंपादकीयमु---पत्तिरिगैयिन् तलैयंगम्----पत्राधिपरुटॆ, अग्रलेखनम्/ऎडिट॒टो॒रि॒यल्----संपादकरसंपादकीय---
2931संपादनपुंलिंगपुंलिंग---पूरा करना, प्रस्तुत करना ;किसी पुस्तक का विषय आदि ठीक करके उन्हे प्रकाशन के योग्य बनाना (एडिटिंग)।---संपादन----तालीफ़----मुदीरी, अडिटिंगसंपादन---पूरो करणु, पेश करणुसंपादनु---पुरेकरणेंसंपादन---पूरुं करवुंसंपादन---संपादन, निष्पादन----सम्पादन, सम्पन्नसंपादन, संशोधन---संपादन, संपन्न, पुरा करिबासंपादन---पूर्ति चेयुट, निर्वहणसंपादकत्वमु---मुड़ित्तलपुत्तगम्, अल्लदु सॆय्दियै सरि पार्त्तु तिरुत्तुतल् ऎडिट् सॆयदल्---निर॒वेट॒ट॒ल्प्रसाधनं चॆय्यल् एडिट॒ट॒ चॆय्यल---पूरैसुवुदुसंपादनॆ (ऍडिटिंग)---
2932संपूर्णविशेषणविशेषण---आदि से अंत तक सब, सारा कुल, समूचा ;पूरा या समाप्त किया हुआ।---संपूरन----तमाम (जमीअ़)मुकम्मल---सोरुयमुकु॑मल---समूरो, पूरोपूरो कयलु---संपूर्ण, समग्रपूर्ण केलेले---संपूर्ण, बधुं, तमामपूरुं करेलुं---संपूर्ण॒, समग्र (न)समाप्त, निष्पादित---संपूर्ण, सकलोसमाप्त, सम्पूर्ण---संपूर्ण, समग्रसमाप्त, संपूर्ण---संपूर्णमु, समग्रमुसमाप्तमु---मुऴु मैयाननिरै॒वु पॆट॒ट॒---संपूर्ण, मुळुवन्पूर्ण माक्किय---ऎल्ल, मॊत्तपूर्णगॊळिसिद---
2933संप्रदायपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--एक ही तरह का मत या सिद्धान्त रखने वाले लोगों का समूह या वर्ग ;परंपरा से चला आया हुआ ज्ञान या सिद्धान्त, प्रथा, परिपाटी या रीति ;कोई विशिष्ट धार्मिक मत या सिद्धान्त, धर्म।--संपरदाई----फ़िर्क़ा----फिरकु॑, तबकु॑----संप्रदाय, फ़िर्कोरीति, रिवाजुधर्मी, फ़िर्को--संप्रदायसंप्रदायसिद्धान्त, धर्म--संप्रदाय, पंथरिवाजसिद्धान्त, धर्म--सम्प्रदाय, दल संघप्रथा---संप्रदाय, गोष्ठीपरम्परागत रीति बा आचारधर्मीय मत बा सिद्धान्त--संप्रदाय----समुदायमुसंप्रदायमुसंप्रदायमु--मदप्पिरिदुपरम्परै पळ्क्क, वळक्कंगळसम्प्रदायम्, मदं--वर्गंमामूल्मतं, प्रस्थानं--मत, संप्रदायकट्टळॆधर्म--
2934संबंधपुंलिंगपुंलिंग---रिश्ता, नाता ;आपस में होने वाली घनिष्टता या मेल-जोल।---संबंध----रिश्तातअ़ल्लुक---संबंद, मेल----रिश्तो, नातोसंबंधु, वास्तेदारी---नातेसंबंध---संबंध, मित्रतासंयोग, परिचय---संबंध, सम्पर्कयोगायोग, आत्मीयता---सम्बन्ध, सम्पर्कघनिष्टता, मिला प्रीति---संबंध----संबंधमुसंबंधमु---संबंदम्नट्पु---बंधुत्वंबन्धं, अटुप्पं---नॆटस्तिकॆबांधव्य---
2935संभवविशेषण----जो किया जा सकता हो, या हो सकता हो, मुमकिन।----संभव----मुम्किन----मुमकिन----मुमकिन, संभवु----संभव----संभव, शक्यता----सम्भव----सम्भव, सम्भाव्य----संभव----संभवमु, साध्यमु----निकऴक्कूडिय----संभाविक्कावुन्न, संभाव्यं----साध्य----
2936संभालना (सम्हालना)सकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया--पालन करना, सहारा देना ;प्रबंध करना, भार उठाना ;गिरते हुए को बीच में रोकना।--संभालणा----संभालना----संबालुन----संभालणु----सांभाळणें, पालन करणें, आधार देणेंव्यवस्था करणेंधरणें--सभाळवुंव्यवस्था करवीधरवुं--पालन-पोषण कराधरा, धरे फेला---चम्भाल, प्रतिपाल करपरिचालना कर, तद्बिर करधरि राख, आश्रय दि--संभाळिबासंभाळिबा, प्रबन्ध करिबासंभाळिबा, धरिनेबा--संभालिंचुटनिर्वाहिंचुटनिलुपुट--काप्पाट्टुएवार्डुसेय्ताङ्गु--पालिक्कुक, साहायिक्कुकएर्पाडु चॆय्युकताङ्ङुक--कापाडुवुडुहॊणॆहॊरॆयुवुदुहिडियुवुदु--
2937संयुक्तविशेषणविशेषण---किसी के साथ जुड़ा, मिला, लगा या सटा हुआ ;जिसके दो या अधिक भागीदार हों, साझा।---संजुगत----मुश्तरका----यिकवटु॑----गडि॒यलु, जुड़ियलुभाईवारीअ वारो---संलग्नसंयुक्त---संयुक्त, जोडायेलुंमझियारुं---संयुक्त, संलग्नअंशीदार---संयुक्त, युक्त जड़ितअंशीदार युक्त---संजुक्तभागीदार---संयुक्तमुउम्मडि---इणैन्द, ऒट्टियइरु पंगाळिगळ् कोण्ड---चेर्न्नकूट्टाय---जंटि, सेरकॊडिरुवपालु इरुव, जंटि---
2938संरक्षकविशेषणपुंलिंगपुंलिंग--देखभाल, निरीक्षण करने वाला, आश्रयदाता, अभिभावक।संस्थाओं आदि में वह बड़ा और मान्य व्यक्ति जो उसके प्रधान पोषकों और समर्थकों में माना जाता है ;वह जिसके निरीक्षण या देख-रेख में किसी वर्ग के कुछ लोग रहते हों (गार्डियन)।--राखा, सरपरस्त, निगरानसरपरस्तसंरपरसत--सरपरस्त (निग्राँ)----पालनवा॑ल, रछनवा॑लसरपरस्तसरपरस्त--संभालींदडु, संभाल कंदड़ु-संभालीदुंड़ु--आश्रयदाता, संरक्षक, अभिभावकआश्रयदातासंरक्षक, पालक--संरक्षक, आश्रयदाताआश्रयदातासंरक्षक, पालक--संरक्ष॒क (क्ख)पृष्ठपोषकअभिभावक--संरक्षक, रक्षक, अभिभावकपृष्ठपोषकअभिभावक--संरख्यपृष्ठपोषक, संरख्यकअभिभावक--रक्षिंचु वाडुसंरक्षकुडुसंरक्षकुडु--आदरिप्पवरपोषकर, आदरवाळ्रपादुकाप्पाळ्र--संरक्षकन्, आश्रयदातावुरक्षाधिकारी, पेट्रणरक्षाकर्त्तावु--रक्षकसंरक्षकसंरक्षक--
2939संरक्षणपुंलिंगपुंलिंग---अच्छी और पूरी तरह से रक्षा करने की क्रिया या भाव, पूरी देख-रेख और हिफाजत (कस्टडी) ;अपने आश्रय में रखकर पालना-पोसना, आश्रय।---निगरानी----हिफाजत (तहवील)सरपरसती---ह्यफ़ाज़थ, रा॑छ्यसरपरस्ती---हिफाज़त, रख्याबचाउ, पनाह---संरक्षणप्रतिपालन, आश्रय---संरक्षण, रक्षणआश्रय---संरक्षण॒ (न)पालन-पोषण॒ (न), आश्रयदान---संरक्षण, रक्षणभरण-पोषण, प्रतिपालन---संरख्य----संरक्षण, रक्षणसंरक्षण, रक्षण---पोषणै, संरक्षणैसंरक्षणै---सूक्षिप्पुआश्रयं, संरक्षणं---संरक्षणेंकापाडुवुदु---
2940संरचनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कोई ऐसी वस्तु बनाने की क्रिया या भाव जिसमें अनेक प्रकार के बहुत से अंगो-उपांगों का प्रयोग करना पड़ता है ;उक्त प्रकार से बनी हुई कोई चीज (स्ट्रक्चर)।---संरचनासंरचना---साख़्त----बनावुन, बनावठ----बनावट----रचनारचना---संरचनामाळखुं---गठन-कौशल, रचना विधानगठन-प्रणा॒ली (न)---संरचना, निर्माणगठन, निर्माण---संगठना, रचना-बिधानसंघटना---कूर्पुरचन, निर्माणमु---अमैप्पुअमैप्पु---घटनसंरचन---संरचनॆसंरचनॆ---
2941संवादपुंलिंगपुंलिंग---बातचीत, वार्तालाप ;खबर, समाचार।---संबादसंबाद---मुकालमाख़बर---कथ-बाथखबर---गुफ़्तगूसमाचारु, अहिवालु---संभाषण, संवादबातमी---संवाद, वातचीतखबर, समाचार---कथोपकथन, संलापखबर, समाचार---कथा बार्त्ता, बार्त्तालापसंबाद, खबर---संबाद----संभाषण्वार्त---उरैयाडल्सॆयदि---संभाषणंवार्त्त---मातुकतॆसमाचार, वरदि---
2942संवाददातापुंलिंगपुंलिंग---संवाद या समाचार भेजने वाला ;आजकल वह व्यक्ति जो समाचारपत्रों में छपने के लिए स्थानिक घटनाओं का विवरण लिखकर भेजता हो (रिपोर्टर कारेस्पान्डेन्ट)।---पत्तर प्रेरक----ख़बर रसाँनामा निगार---नामु॑ निगारशेछिवाल---समाचारु, मोकिलीदंड़ुअख़्बार जो एविजी, ख़ातू---बातमीदारबातमीदार---संवाददाता----संवाददातारिपोर्टर---संबाददाता, खबर दिओंतासंबाददाता---संबाददाता----वार्ताहरुडुविलेखरि---सॆय्दि अनुप्पुबबरनिरुबर् (पत्तिरिगै)---पत्र प्रतिनिधिरिपोर्टर॒, पत्र लेखकन्---वरदिगार, सुद्दिगारवरदिगार---
2943संवारनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---सुसज्जित करना, सजाना ;सुधारना, मरम्मत करना।---सुआरना----संवारना----संवारुन, शेरुन सज़ावुन----संवारणुसुधारणु---सजविणेंसुधारणें---संवारवुंसुधारवुं---साजानो, सज्जित करासंशोधन करा---सजा, सुसज्जित करशुधरा, मेरामति कर---सुसज्जित करिबासुधारिबा---अलंकरिंचुटअमर्चुट---अलंगरिक्कशीर् पडुत्त---अलंकरिक्कुकनन्नाक्कुक---अलंकरिसुवुदुसरिमाडुवुदु---
2944संवाहकपुंलिंग----ठोकर अथवा किसी प्रकार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने वाला, वहनक, वाहक (कॅरिअर)।----कैरीअर (ढुहाक)----बारबरदार----कंडकटर, चलावन वोल----ढोईंदड़ु, ढोए या खणी हलंदड़ु----संवाहक----संवाहक----संवाहक----वाहक, कढियाओंता----बाहक----संवाहकुडु----शुमन्दु सेलबबर बार वण्डि----वाहकन्----ऒय्युवव----
2945संविधानपुंलिंग----राजनीति और शासनतंत्र में कानून के रूप में बने वे मौलिक नियम और सिद्धान्त जिनके अनुसार किसी राष्ट्र, राज्य या संस्था का संघटन और संचालन होता है (कान्स्टिट्यूशन)।----विधान----दस्तूरे असासी (आईन)----आ॑यीन, दॊस्तूर----संविधानु, जोड़ जकु----संविधान----बंधारण----संविधान, शासनतंत्र----संबिधान, शासन-बिधि----संबिधान----राज्यांगमु----अरशियल् अमैप्पु----भरण घटन----संविधान----
2946संवेगपुंलिंग----मन में होने वाली खलबली, उद्विग्नता, घबराहट, डर।----वेग----इज़्तिराब----ज़ज़्बु॑, लह॑र॑----जज़्बो, मानसिक उथल-पुथल----उद्विग्नता, आवेग----आवेग, गभराट----संवेग, ओवग, उद़्वेग, भयजनित त्वरा----अद्विग्नता, भय---------मनोगति----आत्तिरम्, कलवरम्----परिभ्रमं----उद्विग्नतॆ----
2947संवेदनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---मन में होने वाला बोध या अनुभूति, अनुभव ;दु:ख या सहानुभूति प्रकट करने की क्रिया या भाव (कन्डोलेन्स)।---संवेदना----एहसासहमदर्दी (ताज़ीयत)---एहसासहमदरदी---अहिसासुहमदर्दी---संवेदना----संवेदना, भाव, प्रतीति----संवेदना, बोध, अनुभव, ज्ञानसहानुभूति, प्रबोधदान---संबेदना, अनुभूतिसमबेदना---संबेदनासंबेदना (सहानुभूति)---भावनसानुभूति---अनुताबम्वरुत्तम् तेरिवित्तल्---संवेदनंअनुशोचनं---अनुभवसहानुभूति---
2948संशयपुंलिंगपुंलिंग---संदेह, शक, अनिश्चय ;खतरे या संकट की आशंका या संभावना।---संसासंसा---शकअंदेशा (ख़द्शा)---संशय, शखसंशय---शकुखुटिको, गुमानु---संशय, संदेहआशंका---संशय, संदेह, शकआशंका---संशय, संदेह, अनिश्चिय(भविष्यत् सम्बन्धे) भय, आशङ्का---संशय, संदेहआशंका, सम्भावना---संशय, संदेहआशंका---संशयमुसंदेहमु---संदेहम्संदेहम्---संशयंआशंका---संदेह, शंकॆआशंकॆ---
2949संशोधनपुंलिंगपुंलिंग---त्रुटि, दोष आदि दूर करके ठीक और दुरुस्त करना, सुधार ;शुद्ध करना या साफ करना।---सुधाईसुधाई---तस़हीह----सुदार, श॑रुनशॊज़रावुन---सुधारोसोधणु---शुद्धकरण, सुधारणशुद्ध करणें---संशोबन, शुद्धि, भूलचूक काढी सुधारवुं तेशुद्ध करवुं ते, सुधारवुं ते---संशोधन, भुल वा भ्रान्ति दूरीकरण॒, (न)पवित्रीकरण, विशोधन, संस्कार साधन---संशोधनशुधरणि, संशोधनि---संशोधन----संस्करण, सवरणमार्जनमु---तिरुत्तम्तिरुत्तल्---तिरुत्तुवॆटिप्पाक्कुक, शुद्धिकरणम्---संशोधनॆतिद्दुपडि---
2950संस्करणपुंलिंग----पुस्तकों आदि की एक बार में एक ही तरह की होने वाली छपाई, आवृत्ति (एडिशन)।----छाप----एडीशन, बार----शुमारु॑----छापो----आवृत्ति----संस्करण, आवृत्ति (ग्रंथनी)----संस्करण॒, ग्रन्थादि प्रकाशन (न)----संस्करण, ताङरण----संस्करण----मुद्रणमु, आवृत्ति----पदिप्पु----पतिप्पु, संस्करणं----संस्करण----
2951संस्कारपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--किसी वस्तु को ठीक करके उचित रूप देने की क्रिया, परिष्कार ;पूर्व जन्म के आचार-व्यवहार, पाप-पुण्य आदि का आत्मा पर पड़ा वह प्रभाव जो मनुष्य के परवर्ती जन्म में उसके कार्यों, प्रवृत्तियों आदि के रूप में प्रकट होता है ;हिन्दुओं में जन्म से मरण तक होनेवाले वे विशिष्ट धार्मिक कृत्य जो द्विजातियों के लिए विहित हैं।--संस्कारसंसकारसंस्कार--संस्कार----संस्कारसंस्कारसंस्कार--संस्कारु----संस्कार, परिष्कारसंस्कार (पूर्व जन्मीचे)संस्कार (सोळा)--संस्कार, शुद्ध करवुं ते सुधारवुं ते, शणगारवुं तेवासनाओं के कर्मोनी मन उपर पडती छाप, पूर्व कर्मोनुं फलद्विजोने जन्मथा मरण सुधी करवा पड़ता आवश्यक सोल विधि (गर्भाधान, पुंसवन, अनवलोभन, विष्णुबलि, सीमंतोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, सूर्यावलोकन, अन्नप्राशन, चूडाकर्म, उपनयन, गाय-युपदेश, सभावर्तन, विवाह, स्वर्गारोहण), मांनोदरेक--शुद्धि, शोधन/परिष्कारसहजात धारण, जन्मगत ज्ञान प्रवृत्ति व अनुभूति (पूर्वजन्मे॒र संस्कार) (न)हिन्दु धर्मेर दशविध शास्त्रीय अनुष्ठान--संस्कार, शोधनपूर्वजन्मर संस्कार(दश) संस्कार--संस्कार----परिष्कृतिसंस्कारमुसंस्कारमु--शुद्दिकरित्तल्विट्टकुरैसडंगु--परिष्करणंसंस्कारंसंस्कार (षोडस संस्कार )--परिष्कारसंस्कारसंस्कार--
2952संस्कृतिस्त्रीलिंग----आचरणगत परम्परा, सभ्यता (कल्चर)।----सभिआचार, संसक्रिती----सक़ाफ़त----सबिता, तमदुन----संस्कृति, सभ्यता, तहज़ीब----संस्कृति----संस्कृति, सभ्यता, सुधारो, सामाजिक प्रगति----संस्कृति, सभ्यताजनित उत्कर्ष, कृष्टि----कृष्टि, संस्कृति----संस्कृति----संस्कृति----पणबु----संस्कारं----संस्कृति----
2953संस्तुतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---अच्छी या पूरी तरह से होने वाली तारीफ या स्तुति ;अनुशंसा, सिफारिश (रिकमेन्डेशन)।---सिफारश, उसतत----तारीफ़सिफ़ारिश---मटि-मटि द्युनसिफा॑रिश---साराहसिफ़ारिश---स्तुति, प्रशंसासिफारश---संस्तुति, प्रशंसा, वखाणभलामण---स्तुति, खुब प्रशंसासुपारिश---स्तुति, प्रार्थनाअनुमोदन---संस्तुतिसुपारिश, अनुमोदन---स्तुतिप्रशंस, सिफारसु---पुगळुरैपुरिन्दुरै, शिपाशुं---प्रशंसशिपार्श---हॊगळुविकॆसिफ़ारिश---
2954संस्थास्त्रीलिंग----समाज या समूह, सभा, समिति।----संसथा----अंजुमन----संस्था, उंजमन----संस्था----संस्था----संस्था, मंडल, तंत्र----संस्था, समिति, समाज, प्रतिष्ठान----संस्था, समाज----संस्था----संस्थ----स्तापनम्, निरु॒वनम्----स्थापनं----संस्थॆ----
2955संस्थानपुंलिंग----साहित्य, कला, विज्ञान आदि की उन्नति के लिए स्थापित संस्था या संघटन।----संसथान----इदारा----इदारु॑----इन्स्टीट्यूटु, संस्था----संस्था----साहित्य, कला, विज्ञान आदिनी उन्नति माटे संस्थापित संस्था----साहित्य, कला, विज्ञान इत्यादि उन्नतिकल्पे स्थापित प्रतिष्ठान वा संस्था----संस्था, संस्थान----संस्थान----संस्थ, संस्थानमु----इलक्कियम, कलै मुदलियवैगडिन कळर्चिक्कान निरुवनम----संघटन, इन्स्टि॒ट॒यूट॒----संस्थान----
2956संस्थापकपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--स्थापित करने वाला ;नए काम या बात का प्रवर्तन करने वाला, प्रवर्तक ;किसी संस्था, सभा या समाज की पहले-पहल स्थापना करने वाला।--संसथापक, मोढ़ीसंसथापक, मोढ़ीसंसथापक, मोढ़ी--बानी----बा॑नी-बा॑नीकार--पायो विझंदड़ु----संस्थापकप्रवर्तकसंस्थापक--संस्थापक, संस्थापन करनारप्रवर्त्तकप्रथम स्थापक--संस्थापकप्रवर्तकप्रथम संस्थापकारी--संस्थापक, स्थापन करोंताप्रवर्तकप्रतिष्ठाता--संस्थापक----संस्थापकुडुप्रारंभकुडुस्थापकुडु--स्तापकरपुदिय वेलैये, तोडगुबवर्निरुवनत्तै, आरंबिप्पवर्--स्थापकन्स्थापकन्---संस्थापकप्रवर्तकस्थापक--
2957संस्मरणपुंलिंगपुंलिंग---किसी व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण और मुख्य घटनाओं या बातों का उल्लेख या कथन ;इष्ट देव आदि का बारबार स्मरण करना या उनका नाम जपना।---संस्मरण (यादां)सिमरन---तज्किराविर्द---यादावा॑रीसुमरन---यादिगीरीस्मरणु---संस्मरणनामस्मरण---संस्मरणवारंवार स्मरण करवुं ते---संस्मरण, जीवनेर स्मरण यो॒ग्य घटनार उल्लेख वा कथन (ज)स्मृतिचारण सर्वक्ष॒ण ईश्वर-स्मरण, नामजाप (ख)---सोंवरण, सोंवरणि, स्मृतिलेखस्मरण, सोंवरण---संस्मरण----संस्मृतिस्मरणमु---वाळ्क्कै- निनैवुक्कुरि॒-प्पुगळ्नाम्विरुंबुम् देय्वत्तै जबित्तल्---अनुस्मरणइष्टस्मरणं---नॆनपुसंग्रहस्मरणॆ---
2958संहारपुंलिंगपुंलिंग---ध्वंस, नाश ;बहुत से व्यक्तियों की युद्ध आदि में एक साथ होने वाली हत्या।---संधारसंधार---तबाही (गारतगरी)कत्ले आ़म---नाश, संहार----नाशु/नासुपुजा॒णी, जंगि वगैरह में घणनि माण्हुनि जी हत्या---ध्वंस, नाशसंहार---संहार, ध्वंस, विनाशनाश, कलत, उच्छेद---ध्वंस, विनाशजण हत्या, संहार---संहार, नाशसंहार, सामूहिक हत्याकांड---संहार----संहारमुचित्रवध---अऴित्तल्पडुकॊलै---संहारंकूट्टक्कॊल---ध्वंससंहार---
2959सकपकानाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---चंकित होना, चौकना ;घबराना (लज्जा आदि के कारण)।---भौंतरना, भभत्तरना----सकपकाना----हा॑रान सपदुनगागरुन, था॑थरुन---अंजब में पवणुघबि॒राइजणु---चकितहोणेंघाबरणे---अचरज पामवुंशरमावुं---चमत्कृत हओया----चकरवा, आचरित हलाजत संकोचकर---चकित हेबाघाबरइबा---उलिकिपडुतगाबरा चेदुट---तिगैप्पडैयकहवरप्पड---ञॆट्टुकपरिभमिक्कुक---आश्चर्य पडुवुदुअंजुवुदु---
2960सख्तविशेषणविशेषण---कठोर, कड़ा ;कठिन, मुश्किल।---सखत----सख़्त----सखु॑तकठ्युन---सख्तु----कठोर, कडककठिण, अवघड---सखत, कठोर, कडककठिन, मुश्केल---शक्त, कठोर, कडाकठिन, मुशकिल---कठोर, टानकठिन, टान---शक्त----गट्टिकठिनमु---कडुमैयानकडिनमान---कठोरं, कट्टियाय, कटुत्तकठिनं---गट्टिकठिण, कष्टवाद---
2961सघनविशेषण----घना, अविरल, ठोस।----संघणा----घना----गॊन----घाटो, नुहिरो----निविड, दाट, भरीव----सघन, घन, गाढ, नक्कर----गाढ, अविरल, घन, ठोस----सघने, अनबरत----सघन----सघनमु, सान्द्रमु----अडर्तियान----इटतूर्न्न----दट्टवाद, गट्टियाद----
2962सचमुचक्रिया विशेषणक्रिया विशेषण---यथार्थत: वास्तव में ;निश्चित रूप से अवश्य।---सचमुच----वाक़ईयक़ीनन---पाठ्यपज़्य पाठ्य---सचुपचु----वास्तविकअवश्य, खरोखर---खेरखर, निश्चित रूपेअवश्य, जरूर---सत्यि, यथार्थत:, वास्तविक (ज)निश्चित भावे, अवश्य---यथार्थते, आचलतेअवश्ये, निश्चय---जथार्थतअबश्य, निश्चित रूप रे---निज़मुगानिखरमुगा---उण्मैयागवेकट्टायमाग---वास्तवत्तिलतीर्च्चयायुं---निजवागिखडितवागि, निश्चियवागि---
2963सच्चरित्रविशेषण----जिस का चरित्र अच्छा हो, सदाचारी।----सदाचारी----रास्तकिरदार----जान चाल चलन----चरित्रवानु, सुठे चरित्रवारो----सदाचारी, सच्चरित्र----सच्चरित्र, सदाचारी----सच्चरित्र, सदाचारी----चरित्रवान----सच्चरित्र----शुशील, शीलवन्तुडु, शीलवति----नन्नडत्तैयुळ्ळ----सत्स्वभावि----सदाचारि----
2964सच्चाविशेषणविशेषणविशेषण--सच बोलने वाला, सत्यवादी ;ईमानदार ;जो नकली या बनावटी न हो, बल्कि असली और वास्तविक हो, जिस में खोट न हो।--सच्चा----सच्चा----पॊज़ईमानदारशॊद--सचो----खरा, सच्चा, सत्यवादीप्रामाणिकअस्सल--सच्चुं, साचुं, सत्यवादीप्रामाणिकअसली, वास्तविक--सत्यवादीविश्वासी, इमानदारआसल, साच्चा, विशुद्ध, खाँटि, अकृत्रिम--सत्यवादीबिश्वासीखाँटि, प्रकृत--सच्चा, सत्यवादीबिश्वासीखांटि, बास्तबिक, असल, बिशुद्ध--सत्यवादिविजायितीगलसिसलयिन--उण्मैयानयोग्गियमानअसलान--सत्यवादिसत्यसंधन्यथार्थमाय, कळ्ळमिल्लात्त--सत्यवादिविश्वास योग्यनिजवाद--
2965सजनीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सखी, सहेली ;प्रेमिका।---सहेली, सजनी----सहेलीमहबूबा---व्यसलोलु॑ मच़---सजनी----सखी, साजणीप्रेयसी---सजनी, सखी, सहेलीप्रिया---सखी, सहचरीप्रेमिका, प्रणयिनी---सखि, बान्धवीप्रेमिका, प्रिया---सजनी----सखि, चलिकत्तेप्रेयसि---तोऴिकादलि---सखिकामुकि, प्रेयसि---सखि गॆळतिप्रेमिकॆ---
2966सज़ास्त्रीलिंग----अपराधी को दिया जाने वाला दंड।----सज़ा----सज़ा----सज़ा----सज़ा----शिक्षा----सजा, दंड, नासियत, शिक्षा----दण्ड, साजा----शास्ति, चाजा, दंड----सज़ा----शिक्ष, दण्डन----दंडनै----शिक्ष----शिक्षॆ----
2967सजानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---वस्तुओं को ऐसे क्रम से रखना कि वे आकर्षक और सुंदर जान पड़ें, संवारना ;अलंकृत करना।---सजाउणा----सजाना----सजावुन----सजाइणु----सजविणेंसजविणें, अलंकृतकरणें---सजवुंशणगारवुं---साजानो, सुश्रृंखल भावे, विन्यस्त करासाजानो, अलंकृत करा---सरा, शुवनीकै राखसाल, सजा---सजाइबाविभूषित करिबा, अलंकृत करिबा---अमर्चुटअलंकरिंचुट---पोरुळ्गळै अळ्गानअलंगरिक्क---अटुक्कि वय्क्कुकअलंकरिक्कुक---सरिपडिसुवुदु, ओरणवागिडुवुदुअलंकरिसुवुदु---
2968सजावटस्त्रीलिंग----सजे हुए होने की अवस्था, क्रिया या भाव, शोभा।----सजावट----सजावट (आराइश)----सजावठ----सजावट----सजावट, शोभा----सजावट, शोभा, सजबुं ते के तेनी ढबछब, रीत, शणगार शोभा करवां ते----साज, साज-सज्जा, साजगोज----शोभा, साजन-काचना----साजसज्जा, सजिईबा, शोभा----अलंकरण----अलंगारम्----अलंकारं----शोभॆ अलंकरिसुविकॆ----
2969सजीवविशेषणविशेषण---जीव युक्त, जिस में प्रण हों ;तेज, फुरतीला।---जिउंदा-जागदा, सजीव----ज़ीरूह (जानदार)जोशीला---जुवदारवुछ़यदार---जानदारु----संजीव, जिवंतसक्रिय, तत्पर---सजीव, जीववाळुं, जीवतुंजीवंत, प्राणवान---जीवन्त, जियन्त, जीवितचटपटे, कर्मतत्पर, सक्रिय---सजीव, जीवन्तसजीव---सजीव----सजीवमुसजीवमु---उयिरुळ्ळशुरु॒ शुरु॒प्पान---सजीवनाय, जीवनुळ्ळशक्तियुळ्ळ, बेगतयुळ्ळ---जीववुळ्ळचुरुकाद---
2970सज्जनविशेषण, पुंलिंग----भला आदमी, सत्पुरुष; शरीफ़।----सज्जण----शरीफ़----जान इन्सान----सज॒णु, शरीफु माण्हू----सज्जन----सज्जन, सभ्य----साधु व्यक्ति, सत लोक, सज्जन----सज्जन, सत लोक----सज्जन----सत्पुरुषुडु----नल्लवर, गनवान्----सज्जनं, कुलीनन्----सज्जन----
2971सज्जास्त्रीलिंग----साज समान।----साज-समान----साज़ो-समान----साजु-सामान----साजु -सामानु----साज सरंजाम----साज-सामान----साज-सरञ्जाम, सज्जा----साज-सरंजाम----सज्जा----अलंकारमु----दळवाडम्, सादनंगळ्----अलंकरण वस्तु----सज्जुसामानु, शृंगारसामाग्रि----
2972सटीकविशेषणविशेषण---जिस में मूल के साथ टीका भी हो, व्याख्या सहित टीका सहित;बिलकुल ठीक, उपयुक्त।---सटीक----मुशर्रह (मुहशशा)बजा (बरमहल)---व्यछ़नयदार, वखनय दार----टीका सांसही ठीकु---सटीकउपयुक्त, योग्य---सटीक, टीका वाळुं, टीका सहित (पुस्तक)एकदम ठीक, योग्य---व्याख्यादियुक्त, टीकायुक्तसम्पूर्ण॒ ठिक, निर्मुल (न) यथार्थ---सटीक, टीकायुक्तउपयुक्त, ठिक, निर्मुल---सठीक----टीका सहितमुसरियइन---विळक्क उरैयुडन् कूडियमट॒टि॒लुम् सरियान---सव्याख्यानंशरियाय---टीकॆयुळ्ळ, सटीकसरियाद---
2973सड़कस्त्रीलिंग----मार्ग, रास्ता, पथ।----सड़क----सड़क----सड़ख----सड़क, रस्तो----सडक, रास्ता----सड़क, मार्ग, पाको रस्तो, पथ----सड़क, रास्ता, पथ----रास्ता, पथ, बाट----सड़क, पथ बाट, मार्ग, रास्ता----दारि, रोड्डु, रहदारि----तेरु----वऴि----रस्तॆ----
2974सड़नाअकारात्मक क्रिया----किसी वस्तु के संयोजक तत्वों का अलग-अलग हो जाना, गलना।----सड़ना----सड़ना----सडुन----किनो थियणु----सडणें नासणें----सडवुं, कोही जवुं सावबगडवुं, भ्रष्ट थवुं----पचा, गलिया या॒ओया (ज)----गेल, पच----पचिबा----कुळ्ळुट----अऴुग, नशित्तुप्पोग----अळियुक, चीयुक----कॊळॆतु होगुवुदु----
2975सततअव्ययअव्यय---निरंतर, बराबर, लगातार ;सदा, हमेशा।---हमेशा----मुदाम----लगातार----लगा॒तारिसदाईं---निरंतर, नेहमी, सततसदा, सर्वदा---सतत, लगातारनिरंतर, हमेशां, चालु---निरन्तर, सततसर्वदा---सततेसदाय---सतत, निरन्तर----सततमुसततमु---इडैविडादुऎप्पोळुदुम्---निरन्तरं, तुटर्च्चायायऎप्पोळुं, सदा---निरंतर आन्दॆसमनॆयावागलू---
2976सतर्कविशेषण----सचेत सावधान, सजग, होशियार।----सावधान----होशियार, चौकस----हुशियार----सचेतु, सावधानु----सतर्क, सावध----सतर्क, सावधान, सजग, होशियार----सावधान, अवहित, सतर्क, सचेतन, हुँशियार----सतर्क, सावधान----सतर्क----अप्रमत्तमु मेलकुवगल----जाग्गिरदैयान, ऎच्चरिक्कै कॊण्ड----श्रद्धयोटुकूटि, जाग्रतयुळ्ळ----ऎच्चरिकॆयुळ्ळ----
2977सतर्कतास्त्रीलिंग----सावधानी, होशियारी, सजगता।----सावधानी----होशियारी, चौकसी----हुशारी----सावधानी----सावधगिरी----सावधानी, सजगता, होशियारी----सावधानता, सतर्कता, हुँशियार----सतर्कता, सावधानता----सतर्कता----अप्रमत्तत, मेलकुव----ऎच्चरिक्कै, जाक्किरदै----जाग्रत----जागरूकतॆ एच्चरिकॆ----
2978सत्कारपुंलिंगपुंलिंग---आदर-सम्मान ;आवभगत, आतिथ्य, खातिर।---सतकार----ताज़ीमतवाज़ोअ़, ख़ातिरदारी---यज़थपेछ़यला॑र्ज़---सत्कार, इज़्जतसत्कारु, ख़ातिरदारी---आदर, सत्कारस्वागत, आदरतिथ्य---सत्कार, आदरमान, स्वागतआतिथ्य, खातर बरदास्त---समादर, सम्मानसेवा, आतिथ्य, अतिथि-सत्कार---मान-सत्कारआतिथ्य---सत्कार----सत्कारमुमर्याद---उपचारम्विरुन्दोम्बल्---बहुमानंसत्कारं---मर्यादॆउपचार---
2979सत्तास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---अस्तित्व, हस्ती ;अधिकार, शक्ति, सामर्थ्य।---सत्ता----बुजूदहुकूमत---हस्ती, वॊजूद----ताकत, अधिकारु----अस्तित्व, सत्ता, अधिकारसत्ता---सत्ता, अस्तित्व, हस्तीअधिकार, शक्ति, सामर्थ्य हक---अस्तित्व, विद्यमानताअधिकार, शक्ति, सामर्थ्य॒ (थ्थ)---अस्तित्वशक्ति, सामर्थ्य---सत्ता----अस्तित्वमुशक्ति---निलैत्तिरुत्तल्आदिगारम्, तिर॒न्---अस्तित्वंअधिकारं---अस्तित्व, इरुविकॆअधिकार, सामर्थ्य---
2980सत्तूपुंलिंग----भुने हुए जौ, चने आदि का आटा या चूर्ण।----सत्तू----सत्तू----सॊत----भुग॒ल चणनि, जवनि वग़ैरह जौ आटो, सतू----सातूचेंपीठ----सत्तु, सक्तु, साथवो----छातु----छातुगुरि----छतुआ----पेलपिंडि----सत्तु मावु----मालरपॊटि----हुरिद कडलॆ, गोधिय, हिट्टु तंबिट्टु----
2981सत्यनिष्ठास्त्रीलिंग----सत्य पर निष्ठा, सत्य में विश्वास, सच या वास्तविक से प्रेम।----विशवास----सदाक़तकेशी----पज़िच़ पछ़----सचाईअ में विश्वासु----सत्यनिष्ठा----सत्यनिष्ठा, सत्यज परम छे----सत्यानुराग, सत्यनिष्ठा, सत्यपरायण॒ता, (न)----सत्यनिष्ठा----सत्यनिष्ठा, सत्यपरायणता, सत्यानुराग----निजाइती, निष्ठ----वाय्मैयिल्, कोणडुळ्ळ आर्वम्----सत्यनिष्ठ----सत्यनिष्ठ----
2982सत्याग्रहपुंलिंगपुंलिंग---सत्य का पालन और रक्षा करने के लिए किया जाने वाला आग्रह या हठ ;आधुनिक राजनीति में वह अहिंसात्मक कार्रवाई जो किसी सत्ता या अधिकारी के व्यवहार आदि के प्रति असंतोष प्रकट करने के लिए की जाती है (पेसिव रिजिस्टेंस)।---सतिआग्रहिसतिआग्रहि---मुक़ावमतसत्यागरह---सत्याग्रहवॅलु॑मार---सत्याग्रहु----सत्याचा आग्रहसत्याग्रह---सत्याग्रह, सत्यपालनो आग्रह, ते सारा लडातुं अहिंसक युद्धसविनयय कानून भंग---न्यायसङगत अधिकार, प्रतिष्ठार जन्य दृढ प्रतिज्ञा॒ (गाँ), सत्याग्रहसत्याग्रह, धर्मघट, सत्यरक्षार जन्य, निष्क्रिय प्रतिरोध---सत्याग्रह, सत्यनिष्ठासत्याग्रह---सत्याग्रहसत्याग्रह---सत्यासंघतसत्याग्रहमु---सत्तियागिरहम्, उण्मैयै- कडैप्णिडित्तल(इनरै॒य अरशियलिल) अहिम्सैयुडन कूडिय ऎदिर्पपु---सत्याग्रहंसत्याग्रहं---सत्याग्रहसत्याग्रह---
2983सत्यापनपुंलिंग----जाँच या मिलान करके देखना कि ज्यों का त्यों और ठीक है कि नहीं (बैरिफ़िकेशन)।----तसदीक----तस्दीक़----तसदीख----तस्दीक----परीक्षण----खराई----याचाइ----परीक्षण, परीक्षा----परीख्यठा, परीख्या----सरिचूचुट----सरिपार्त्तल्----प्रमाणीकरणं----परीक्षिसुवुदु----
2984सत्रावसानपुंलिंग----आधुनिक राजतंत्र में, विधान मंडल सा संसद में सर्वप्रधान अधिकारी के द्वारा अनिश्चित और दीर्घकाल के लिए किया जाने वाला स्थगन (प्रोरोगेशन)।---------इल्तिवा----मुलत॑वी----बर्ख्वास्तिगी, अधिवेशन जी बडे॒ या अण जा॒जायल मुदे ताईं मुहमली----सत्राची, अथा अधिवेशनाची समाप्ति----सच-समाप्ति----विधान सभा वा संसदेर अधिवेशन भेङने ना दिए किछुकालेर जन्य स्थगित राखा, मुलतबि राखा----अधिबेशन----सत्राबसान----सभासमाप्ति----शट्ट सबैयिन् ओरु कूट्टत्त्-तॊडरिन् मुडिवु----(सम्मेळनं) अवसानिप्पि-क्कल्----अधिवेशनवन्तु मुंदक्कॆ हाकुवुदु----
2985सत्संगपुंलिंगपुंलिंग---अच्छे आदमियों का साथ, अच्छी सोहब्बत, सज्जनों के साथ उठना-बैठना ;वह समाज या जन-समूह जिसमें कथावार्ता या रामनाम का पाठ होता है।---संतसंग----सुहबते सालेह----सथसंग----सत्संगु----सत्संगभक्त मंडळी---सत्संग, संत के सज्जननी सोबतसत्संग मंडल---सुसंग, सत्संसर्ग, सत्संगसाधु संग, सत्संग---सत्संगसत्संग, भक्तर संग---सत्संग----सत्सांगत्यमुसंकीर्तन, सत्कालक्षेपमु---नल्लोरोडु शोर्न्दु रुत्तल्, नर्चेर्क्कैकाताकालक्षेपम्, भजनै गोष्ठि---सत्संगंभक्तमंडलि---सज्जन सहवासभजनमंडलि---
2986सदनपुंलिंगपुंलिंग---घर मकान ;वह स्थान जहाँ किसी देश या राज्य के विधान बनने के कार्य होते हों।---घरसदन---ईवान----असॆम्बली----घरु, सदनुउहा जग॒ह जिते राज॒ या कानून ठ़हनि---सदन, घरसंसद सदन---सदन, घर, मकान, रहेठाणसंसद सदन---गृह, सदनआइन सभा, व्यवस्थापक सभा---सदन, घरसभा, सदन---सदन----सदनमुसदनमु---वीडु, माळिगैशट्ट सबै कूडिमिडम्---वीटुसभामण्डपं असेब्लिमंदिरं---मनॆसदन---
2987सदस्यपुंलिंगपुंलिंग---उन व्यक्तियों में से हर एक जिनके योग से कुटुम्ब, परिवार, समाज आदि बनते हैं ;वह व्यक्ति जिसका संबंध किसी समुदाय से हो और जिसका वह नियमित रूप से चंदा आदि देता हो या उसके कार्यों में सम्मिलित होता हो (मेम्बर दोनों अर्थों में)।---मैंबर, जीमैंबर, जी---फ़र्दरुक्न---म्यंबर----मेम्बरु----सदस्यसभासद---सदस्य, सभ्य, सभासदसभ्य---अनुष्ठान प्रभृतिर सभ्य, सदस्य सभासदसभ्य, सदस्य---सदस्यसभ्य, सदस्य---सदस्यसभ्य, सदस्य, सभासद---सभ्युडुसभ्युडु---अंगत्तिनर्अंगत्तिनर्---अंगंअंग, मॆम्बर॒---सदस्यसदस्य---
2988सदाक्रिया विशेषणक्रिया विशेषण---नित्य, हमेशा, हरसमय;निरंतर, लगातार।---सदा----सदा----हमेशु॑लगातार---सदा, सदाईं----सदा, सर्वदा, नेहमीसारखे, निरंतर---सदा, नित्य, हमेशानिरंतर, लगातार---सदा, सर्वदा, नित्य, सकल-समयेनिरंन्तर, सतत, चिरकाल---सदाय, नितौअनबरत, निरन्तर---सदा, सर्वदा, नित्य----सदा, ऍल्लप्पुडुऍडतेगकुंडा---ऎप्पोळदुम्इडैविडादु---सदा, ऎप्पोळुंनिरंतरं---यावागलूनिरंतर, ऒन्दॆसमनॆ---
2989सदाचारपुंलिंग----अच्छा और शुभ आचरण, अच्छा चालचलन।----सदाचार----नेकचलनी----जान चालु॑ चलन----सदाचारु----सदाचार, सदाचरण----सदाचार, सदाचरण----सदाचार, शास्त्रविहित वा साधु आचरण॒ (न)----सदाचार----सदाचार----सदाचारमु, सत्प्रवर्तन----नन्नडत्तै----सदाचारं----सदाचार, सन्नडतॆ----
2990सदुपयोगपुंलिंग----अच्छा और उत्तम उपयोग।----सुबरतों----सहीह इस्त़ेमाल----जान इस्तिमाल----सही उपयोगु----सदुपयोग----सदुपयोग----सदुपयोग----सद्ब्यवहार----सदुपयोग----सद्विनियोगमु, सदुपयोगमु----नल्ल उपयोगम्----सदुपयोगं----सदुपयोग----
2991सद्भावपुंलिंगपुंलिंग---शुभ भाव, हित का भाव, छल कपट, द्वेष आदि से रहित भाव ;दो व्यक्तियों या पक्षों में होने वाली मैत्रीपूर्ण स्थिति।---सदभाव----नेकनियती, ख़ुलूसइख़्लास---नेक नियतीशॅज़र---सुठी भावनामित्रता जी भावना---सद्भावसौहार्द---सद्भावसौहार्द---सद्भाव, शुभ ओ निष्कपट भावसौहार्द, बन्धुभाव---सद्भावप्रीति, मैत्री, मिल---सद्भाव----सद्भावमुसद्भावमु---नल्लॆण्णम्सिनेगम्---सद्भावंसौमनस्यं, सौहृदं---ऒळ्ळॆय, भावनॆस्नेहभाव---
2992सदव्यवहारपुंलिंगपुंलिंग---अच्छा बरताव, अच्छा सलूक या व्यवहार ;सदवृत्ति, सदाचार।---चंगा विहार----ख़ुश अख़्लाक़ी----जान व्यवहार----सुठो वंहिवारु----सद्व्यवहारसदाचार---सद्व्यवहारसदाचार---उत्तम वा भद्र व्यवहार, शिष्टाचारसदाचार, सदुद्देश्य एवं ठिकमतो प्रयोग---सद्ब्यवहारसदाचार---सद्ब्यवहार----सत्प्रवर्तनसत्प्रर्वतन---नल्लॊऴुक्कम्नल्ल नडवडिक्कै---सद्व्यवहारंनल्ल नटपटि---ऒळ्ऴॆ व्यवहारसदाचार---
2993सन्नाटापुंलिंग----निस्तब्धता, निरवता, शांति।----सन्नाटा----सन्नाटा----सनाटु॑, फु॑न्य फॅख----सनाटो, ख़ामोशी----नीरवता, निस्तब्धता, शांति----नि:स्तब्धता, नीरवता, शून्यता----निस्तब्धता, निरवता, शान्ति----निस्तब्धता, निरवता, शान्ति----निस्तब्धता, निरबत्ता, शान्ति----नि:शब्दमु----शत्तमिन्मै, अमैदि----निश्शब्दत----नीरवतॆ----
2994सपना (स्वप्न)पुंलिंग----वह घटना या दृश्य जो सोए होने पर अन्तर्मन में काल्पनिक रूप से भासित होता है (ड्रीम)।----सुफना----ख़्वाब----सॊपुन----सुपनो, ख़्वाबु----स्वप्न----स्वप्न, सपनुं----स्व॒पन, स्व॒पन (स)----सपोन----स्वप्न, सपन----कल----कनवु----स्वप्नं----कनसु----
2995सपरिवारविशेषण----परिवार के सदस्यों के साथ।----सणे परिवार----मै अह्लेख़ाना----अयालु॑ सान----कुटंब समेति----सपरिवार, सहकुटुंब----सपरिवार, परिवार सहित, सकुटुंब----सपरिवार----सपरिवार, सपरियाल----सपरिबार----सकुटुंबमु----कुडुबत्तिनरुडन्----सकुटुंबं, कुटंबहितं----परिवार संगड----
2996सप्तकपुंलिंगपुंलिंग---सात वस्तुओं का समूह ;संगीत के सात स्वरों का समाहार।---सपतक----मुसब्बा----सफतकतारु॑सफतक---सतनि शयुनि जो मेड़ुसंगीत जा सत सुर---सात वस्तूचा समूहसप्तक---सप्तक, सातनों समूहसप्त स्वर, सप्त सूर, संगीतना सात सूर---सप्तसंख्यक, सातटिर समष्टि(सङगीते) स्वरग्राम---सप्तकसुर सप्तक---सप्तकसप्तक---सप्तकमुसप्तकमु---एऴुवस्तुक्कळिन् तॊगुदिकुवियल---सप्तकंसप्तस्वरं---एळर गुंपुसप्तस्वर---
2997सफ़रपुंलिंग----यात्रा।----सफ़र----सफ़र----सफर----सफ़रु----प्रवास----सफर, मुसाफिर, प्रयास----या॒त्रा, भ्रमण॒, सफर (ज) (न)----यात्रा----जात्रा----प्रयाणमु----यात्तिरै, पिरयाणम्----यात्र----प्रयाण----
2998सफलविशेषण----कृतकार्य, कामयाब।----सफल----कामयाब----कामयाब----सफलु, कामयाबु----यशस्वी, सफळ----सफल (ळ), फळवाळुं, सिद्ध, सार्थक----सफल, कृतकार्य॒ (ज)----सफल, कृतकार्य----सफळ, कृतकार्ज्य----कृतकृत्वमु----वेट॒टि॒पेट॒ट॒, पयनुळ्ळ----सफलमाय----सफल----
2999सफलतास्त्रीलिंग----कामयाबी, सिद्धि।----सफलता----कामयाबी----कामया॑बी----सफलता, कामयाबी----साफल्य----सफळता, सिद्दि, सार्थकता----सिद्दि, सफलता/साफल्य----सफलता, सिद्दि----सफलता, सिद्दि----साफल्यमु----वेट॒टि॒----साफल्यं----सफलतॆ----
3000सबलविशेषण----बलवान, ताकतवर, बलशाली।----बलवान----ताक़तवर----ताकतवर----सब॒लु, ब॒लवानु----बलवान, सबळ----सबल (ळ) बळवान----बलवान, बलशाली, सबल----सबल, बलशाली----सबळ----बलवंतुडु----बलमुळ्ळ----बलवान्----बलशालि----