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विक्षनरी:भारतीय भाषा कोश ११

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3001सभास्त्रीलिंग----परिषद्, समिति।----सभा----मज्लिस----इजलास, बैठक----सभा----सभा----सभा----सभा, समिति, परिषद्----सभा, समिति----सभा, परिषद, समिति----सभ----सबै, अबै----सभ----सभॆ----
3002सभापतिपुंलिंग----सभा का अध्यक्ष।----सभापति----सद्रे जलसा (सद्रे मजलिस)----सदु॑रि मजलिस----सभापती----सभापति, अध्यक्ष----सभानो प्रमुख, सदर, अध्यक्ष----सभापति, सभाध्यक्ष॒ (क्ख)----सभापति----सभापति----सभापति----अवैत्तलैवर्----अध्यक्षन्----अध्यक्ष----
3003सभीविशेषण----सारे, सम्पूर्ण।----सब्भे, सारे----सभी----सा॑री----सभु----सर्व----बंधा, सम्पूर्ण----सबाइ, समस्त----सकलो, गोटेइ----सकळ, समिएँ, समस्ते----अंदरू, अंता, अन्नी----ऍल्ला, मुऴुमैयान----ऎल्लाबरुं, ऎल्लां----ऎल्ल----
3004सभ्यविशेषण----शिष्ट, संस्कृत, विनम्र।----सभिअ----मोहज्ज़ब----सहज़ीबु॑ वा॑ल----सभ्यु, फ़ज़ीलत वारो----सभ्य----सभ्य, विवेकी, संभावित, शिष्ट----सभ्य, शिष्ट, भद्र, नम्र----सभ्य, शिष्ट----सभ्य, शिष्ट, भद्र, नम्र----नागरिकुडु----नागरीगमान, पणबुळ्ळ----संस्कारमुळ्ळ----विनयशील, विन्रम----
3005सभ्यतास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सभ्य होने की अवस्था या भाव ;किसी जाति या देश की बाह्य तथा भौतिक उन्नतियों का सामूहिक रूप (सिविलिज़ेशन)।---सभिअता----तह्ज़ीब----तहज़ीबतहज़ीब---सभ्यता, तहज़ीब----सभ्यपणासंस्कृति---सभ्यता, सभ्यपणुं, सुधारोसंस्कृति---शिष्टता, भद्रतासभ्यता जीवनया॒पन प्रणा॒लीर उत्कर्ष (ज) (न)---सभ्यतासभ्यता---सभ्यतासभ्यता---सभ्यतनागरिकत---नागरीगम्नागरीगम्---सभ्यत, परिष्कारंसंस्कारं---नागरिकतॆसभ्यतॆ---
3006समकक्षविशेषण----जोड़ या बाराबरी का, सब बातों में बराबरी करने वाला।----जोड़----हमसर----बराबर----बराबरी, बरारी कंदड़ु----बरोबरीचा, तोडीचा----समकक्ष, समान कक्षानुं सरय्युं----तुल्य, समान, समकक्ष॒ (क्ख)----समकक्ष----समक़ख्य----समस्थायि सरिसमानमु----ओरे वगैयान, समनिलैयान----ऒप्पं----समानवाद----
3007समझनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---जान लेना, ठीक और पूर्ण ज्ञान प्राप्त करना ;विचारना।---समझना----समझना----समु॑जनव्यच़ारुन---समुझणु----जाणणें, समजणेंचिंतन मनन करणें---समजवुं, जाणुवं, अर्थ करवो, खरा खोटानी, तुलना करवीविचार करवो---बोझा, जाना, भाल भावे जानाविवेचना करा---बुज, जानबिबेचना कर, चिन्त----समजिबा, बुझिबा---तेलिसिकोनुटअर्थमुचेसिकोनुट आलोचिंचुट---अरि॒न्दुकोळ्ळनिनैक्क---मनस्सिलाक्कुकआलोचिक्कुक---अरियुवुदुएणिसुवुदु---
3008समझौतापुंलिंगपुंलिंग---राजीनामा, मेल, सुलह ;आपस में होने वाला करार या निश्चय, संधि।---समझौता----समझौता----समजा॑तु----ठाहु----समझोतातह, करार---समजूति, मेल, सलेहसमजवुं ते, मानी लेवुं ते, खुलासो, शिखामण, सलाह---राजिनामा, बोझपड़ापरस्परेर निश्चय, संधि---आपोच, मिटमाटचुक्ति, सन्धि---राजिनामासंधि---राजीओडंबडिक---उडन्पिडिक्कैउडन्पाडु---ऒत्तुतीर्प्पुंसंधि---ऒप्पंदकरारु, ऒप्पंद---
3009समतास्त्रीलिंग----सादृश्य, बराबरी, संतुलन।----समता----बराबरी (मुसावात)----बराबरी----बराबरी, सागि॒याई----सादृश्य----समता, समत्य, सरखापणुं----समता, समतोल, सादृश्य----समता, सादृश्य----समता, सदृश्यता----समत्वमु----समत्तुवम्, आरु॒मैप्पाडु----समत्वं----समानतॆ----
3010समदर्शीविशेषण----सब को एक सा देखने-समझने वाला।----समदरशी----यकनज़र----कुनी नज़र करन वा॑ल----सागी॒य नज़र सां डिसन्दड़ु, समदर्शी----समदर्शी, निष्पक्षाती----समदर्शी, निष्पक्षपाती----समदर्शी, निरपेक्ष॒ (क्ख)----समदशी----समदशी----समदर्शि----पारपट्चमट॒ट॒----समदर्शि----समदर्शि----
3011समन्वयपुंलिंग----वह अवस्था जिसमें कथनों या बातों का पास्परिक विरोध न रहे।----समनवे----यकसानियत----हिहुय थवुन, हिशर----मेलापु, हिक-बि॒ए सां ठाहे-मिलाए बीहारण जी हालति----समन्वय----समन्वय----सङगति, सामञ्जस्य, समन्वय----समन्वय----समन्वय, सामंजस्य, संगति----समन्वयमु----शीराग इणैत्तल्----समन्वयं----समन्वय----
3012समयपुंलिंगपुंलिंग---दिन-रात के विचार से काल का कोई मान, वक्त ;अवसर, मौका।---समां----वक़्त----वखु॑त, समयमोकु॑---वक्तु, समो----काळ, बेळ, समयसंधि---समय, वखत, कालअवसर, तक, लाग---काल, वेला, समयफुरसत, अवसर, उपयु॒क्त वा निर्दिष्ट काल (ज)---समयअवसर---समय, अबसर, बेळा----समयमुसमयमु---समयम्, नेरम्वाय्प्पु, तरुणम्---समयंइट---समयसंदर्भ---
3013समय-सारिणीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---समय सूचित करने के लिए बनाई हुई सारणी;वह पुस्तिका जिस में विभिन्न गाड़ियों के विभिन्न स्टशनों से छूटने और पहुँचने के समय का उल्लेख सारिणियों में किया जाता है। (टाईमटेबल)।---समां-सारणीसमां-सारणी---नज़्मुल-औक़ातटाइमटेबल---टायिम टेबुल----टाईम टेबुल----वेळापत्रक, समय-सारणीवेळापत्रक, समय-सारिणी---समयपत्रक, सामयनी, काळवणीनी नोंधसमय पत्रक, टाइम-टेबल---समय-निर्घण्टसमय-सारणि॒ टाईमटेबुल (न)---समय-सूची, समय-फलिसमय-सूची---समय-सूचीसमय-सूची---काल- पट्टिककाल- पट्टिक---काल अट्टवणैरयिलवे काल अट्टवणै---हाजर॒-पुस्तकंसमय विवर प्वट्टिक, आइंटेबिळ्---वेळापिट्टवेळापट्टि---
3014समरपुंलिंग----सुद्ध, संग्राम, लड़ाई।----युद्ध----जंग----जंग----जंगि----युद्ध, समर----समर, युद्ध, संग्राम, लड़ाई----यु॒द्ध, संग्राम, लड़ाई, समर (ज)----समर, युद्ध----समर----समरमु----युद्दम, पोर्----युद्धं, समरं----युद्ध, काळग----
3015समर्थविशेषणविशेषण---बलवान, सशक्त ;योग्य, उपयुक्त।---समरथ----क़ादिरअहल---का॑बिल----समर्थु, ब॒लवानुलाइकु, जोगो॒---समर्थ, ब॒ळवानयोग्य, उपयुक्त, समर्थ---समर्थ, बळवान, शक्तिमानयोग्य, उपयुक्त---बलशाली, समर्थयो॒ग्य, उपयुक्त (ज)---समर्थ, बलवानयोग्य, उपयुक्त---समर्थ, बळशाळीउपजुक्त, जोग्य, सशक्त---समर्थमु, समर्थुडुसमर्थमु, समर्थुडु---समर्तियमुळ्ळ तिर॒मैयुळ्ळतगुन्द---शक्तन्उपयुक्तन्---शक्तिशालियोग्य---
3016समष्टिस्त्रीलिंग----सामूहिकता, संपूर्णता।----समूहकता----इज्तिमाइ़यत (जम्ई़यत)----परिपूरन----घण्युनि शयुनि जो मेड़ु, समष्टी----समष्टि----समष्टी, समग्रता, समदाय----समष्टि, समग्रता सम्पूर्ण॒ता (न)----समष्टि, समूह----समष्टि----समष्टि----शेर्क्कै, कूट्टु----समष्टि----सामूहिकतॆ, संपूर्णतॆ----
3017संमातर (समानांतर)क्रिया----जो समान अंतर पर रहे। (पैरलल)----समवित्त्थ, समानंतर----मुतवाज़ी----मुतवा॑ज़ी----पूर विछेटि, पूरी विछोटीअ ते रहंदड़ु----समांतर----समांतर, समान अंतरवाळुं, पेरेलल----समान्तर, समान्तराल----समान्तराल----समांतर, समानान्तर----समानांतरमु----समानान्तरमान----समान्तरं----समानांतर----
3018समाचारपुंलिंग----खबर, वृत्तांत, संदेश।----समाचार----ख़बर----खबर----समाचारु, अहिवालु----समाचार, वृत्तान्त----समाचार, खबर, वर्तमान----समाचार, संवाद, खबर, वार्ता----समाचार, खबर----समाचार----वार्त, समाचारमु विशेषमु----समाचारम् सॆय्दि----वर्तमानं, वार्त----समाचार, सुद्दि----
3019समाचार-पत्रपुंलिंग----नियमित समय पर प्रकाशित होने वाला वह पत्र जिसमें अनेक प्रदेशों, राष्ट्रों आदि से संबंधित समाचार रहते हों (न्यूज़पेपर)।----अख़बार, समाचार-पत्तर----अख़्बार----अखबार----अख़्बार----वृतपत्र, समाचार पत्र----वर्तमानपत्र, छायुं----संवादपत्र, खबरेरकागज----वातरि-काकत, संबादपत्र----संबाद-पत्र, खबर-कागज----वार्तापत्रिक----सॆय्दित्ताळ्----वर्तमानपत्रं, पत्रं----समाचार पत्र, वर्तमान पत्र----
3020समाजपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--बहुत से लोगों का समूह ;किसी विशिष्ट उद्देश्य से स्थापित की हुई सभा ;किसी प्रदेश या भूखंड में रहने वाले लोग जिन में सांस्कृतिक एकता होती है।--समाजसमाजसमाज--गिरोहअंजुमनमुआ़शरा, समाज--समाजसमाजसमाज--समाज----समाजसमिति, संघसमाज--समाज, समुदाय, व्यवस्थित, जन समूदाय, जनतामंडली, सभाएक धर्म के आचारवाळे जन समूदाय--समाज, लोकेर, सङघटनविशेष, उद्देश्ये स्थापित सभाकोनो प्रदेश वा भूखण्डेर अधिवासी--समाजसमाज, संघसमाज--समाजसमाजसमाज--समाजमुसंघमुसमाजमु, संघमु--समूगम्समाजम्ओरेपण्-बुळ्ळवरिन् समूगम्--जनसमूहंसमाजंसमुंदायं--कूटसामज, सभॆसमाज--
3021समाज-विज्ञानपुंलिंग----समाज शास्त्र (सोशिअलाजी)।----समाजविगिआन----सामाजियात (इम्रानियात)----समाजी साइनस----समाज विज्ञानु----समाजशास्त्र----समाज शास्त्र, समाजबिद्या समाजव्यवस्थानुं शास्त्र----समाजतत्व, समाजशास्त्र----समाजबिज्ञान----समाजबिज्ञान----समाजशास्त्रमु----समूग इयल्----सामूह्यशास्त्रं----समाजशास्त्र----
3022समाजीकरणपुंलिंग----किसी काम, बात, व्यवहार को ऐसा रूप देना कि उस पर समाज का अधिकार हो जाए और सब लोग समान रूप से उसका लाभ उठा सकें। (सोशिअलाइज़ेशन)।----समाजीकरन----सभाजियाना----समाजीकरन----समाजीकरणु, समाज जे अधिकार में आणणु----समाजीकरण----समाजीकरण----समाजतांत्रिक नीति अनुसार परिचालन----समाजीकरण----समाजिकीकरण (समाजकरण)----समाजीकरणमु----समदर्मक् कॊळ्गैक्कु उळ्ळाक्कुदल----समुदायीकरणं----समाजीकरण----
3023समाधानपुंलिंगपुंलिंग---आपत्ति की निवृत्ति करना, संदेह निवारण करना ;समस्या का हल।---समाधान, निबेड़ा----हल----अँज़रावुनहल---समाधानुहलु---समाधान, शंका निवारणसमाधान, निराकरण---समाधान----समापन, निष्पत्तिमीमांसा---समापन, निष्पत्तिसमाधान, निराकरण---समाधान----समाधानमुपरिष्कारमु---संदेगंगेळै पोक्कुदल्, समाधानंपिरच्नैगळुक्कु, तीर्वु काणुदल्---संशयनिवृत्तिसमाधानं---निवारणॆपरिहार---
3024समापनपुंलिंग----समाप्त करने की क्रिया या भाव, समाप्ति।----समापति----इख़्तिताम----खा॑तिमियथ----समाप्ती----समाप्ति, समापन----समापन, समाप्ति----समापन, उद्या॒पन, सम्पूर्ण॒ता (ज) (न)----समापन, समाप्ति----समापन----समाप्ति----मुडित्तल्----समापनं----समाप्ति----
3025समाप्तिस्त्रीलिंग----खतम या पूरा करने की क्रिया या भाव, समापन----समापति----ख़ातिमा----खतु॑म----समाप्ती----समाप्ति----समाप्ति----समाप्ति----समाप्ति, समापन----समाप्ति----समाप्ति----मुडिवु----समाप्ति----मुक्ताय----
3026समायोजनपुंलिंगपुंलिंग---अनुकूल बनाने की क्रिया या भाव ;आंकड़ों का मेल बिठाना या ठीक ठाक करने की क्रिया या भाव।--------तत्बीक़----मुता॑बिकततालमेल करुन, वाठद्युन---मुनासिबतजोड़ु, अंगनि जो हिसाबु ठीक करणु---अनुकूल करणेंआंकड़ेमोड़ करणें---समायोजनआंकडानो मेळ बेसाडवो---अनुकूलताजमा खरच मेलान, सुसमता---मिल करामिलोवा काम---समायोजन----समायोजनमुसमायोजनमु---अनुकूल-माक्कुदल्कणक्कु-सरिकट्टल्---अनुकूलमाक्कल्कणक्कु नोक्कल्---हॊदिसुविकॆहॊंदाणिकॆ---
3027समारोहपुंलिंग----कोई ऐसा शुभ आयोजन जिसमें चहल-पहल हो।----समारोह----जश्न----जलसु॑----जल्सो, जशनु----समारोह, सभारंभ----समारंभ----समारोह, जाँकजमक सह अनुष्ठित उत्सव----समारोह----समारोह----समावेशमु, महासभ----विऴा----उत्सवं, आघोषं----समारंभ----
3028समालोकचपुंलिंग----समीक्षक, समालोचना करने वाला।----समालोचक----नक़्क़ाद----नकाद, कु॑ठ कडन वोल----आलोचकु, नकादु----समीक्षक, समालोचक----समालोचक----समालोचक, समीक्षक----समालोचक----समालोचक----समालोचकुडु, विमर्शकुडु, समीक्षकुडु----विमरिशकर्----निरूपकन्----विमर्शक----
3029समासपुंलिंगपुंलिंग---योग, मेल ;दो या अधिक पदों के मेल से बनने वाला नया पद।---समासं----तर्कीब----म्युल, समान----मेलुसमासु, बि॒नि या वधीक लफ़्ज़नि मां जुड॒यलु नओ लफ़्जु---समाससमास---समाससमास---मिलन, यो॒ग (ज)समास, एकाधिकपदेर एकपरीकरण---योग, मिलनसमष्ट पद---समास----समासमुसमासमु---शेक्कैंपुणरच्चि (इल्क्कणम्)---याजिण्पु, चेर्चसमासं---कूडुविकॆ, योगसमास---
3030समाहारपुंलिंगपुंलिंग---बहुत सी चीज़ों को एक जगह इकट्ठा करना, संग्रह ;ढेर, राशि।---इक्ट्ठ, ढेर----मज्मूआ़----सॊम्बरुन----ढेरु, मेड़ु----संग्रहढीग, रास---समाहर, संग्रहढगलो---समाहार, संग्रह, मिलनसमूह, राशि---समाहार, संग्रहदम, राशि, समूह---समाहार----समाहारमुराशि---ऒन्रु॒ शेर्त्तल्कुवियल्---समाहरणंकुट्टं---संग्रह, ऒट्टु माडुविकॆराशि---
3031समितिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सभा, समाज ;किसी विशेष कार्य के लिए गठित कुछ व्यक्तियों की सभा।---समिति----मज्लिस (कमेटी)----समती----समिति/समिती----सभा, समाजसमिति, मंडळ---समिति, मंडळीसमिति, मंडळी---समिति, सभा, समाज, सङ्घविशेष उद्देश्ये गठित सभा---समितिसमिति, सभा---समिति, सभा, समाजसमिति---समितिसमिति---कुळुकमिट्टि---समिति----समितिसमिति---
3032समुदायपुंलिंगपुंलिंग---समाज, बिरादरी ;समूह, राशि।---समूह----बिरादरीअंबोह---बरादरीखमाथ---बिरादरीटोली, मेड़ु---समुदाय, समाजसमूह, रास---समुदाय, समूह----समुदाय, जाति, सम्प्रदाय, दलसमूह, राशि, शमष्टि---समाज, सम्प्रदायसमूह, राशि, दम---समुदाय----समुदायमुसमुदायमु---समूगम्, समुदायम्----समुदायंकूट्टं---समुदाय, तंडराशि---
3033समुद्रपुंलिंग----सागर।----समुंदर----समन्दर----समंदर----समुंडु----समुद्र----समुद्र, दरियो----समुद्र, सागर----सागर----समुद्र, सागर----समुद्रमु----समुद्दिरम्, कडल्----समुद्रं----समुद्र----
3034समूहपुंलिंगपुंलिंग---ढेर, राशि ;झुँड, समुदाय।---समूहसमूह---अंबोह----डेर----ढेरु, मेड़ुझुंडु, मज्मूओ---रास, ढीग, समूहसमूह, समुदाय---समूह, टोपुंसमूह, समुदाय---राशि, गण॒ (न)दल, समुदाय---समूह, राशि, दमदल, समाज---समूह, समुदाय, राशि----समूहमुगुंपु---कुवियल्, कूट्टम्----समूहं, कूट्टं----राशिगुम्पु---
3035समृद्धविशेषण----सम्पन्न, धनवान।----खुशहाल, खांदा-पींदा----मुतमव्विल, ख़ुशहाल----दनवान, आसन वोल----शाहूकारु----समृद्ध, संपन्न----समृद्ध, धनवान----सम्पत्शाली, सम्पन्न, समृद्ध----समृद्ध, धनवान----समृद्ध, संपन्न, धनबान----समृद्धमु----वळमुळ्ळ्, शेल्वमुळ्ळ----संपन्नन्, समृद्धन्----श्रीमंत, साहुकार----
3036समृद्धिस्त्रीलिंग----बहुत अधिक सम्पन्नता, अमीरी, ऐश्वर्य।----खुशहाली----ख़ुशहाली, तमव्वुल----अ॑मीरी----शाहूकारी, वाधारी----श्रीमंती, समृद्धि----समृद्धि, ऐश्वर्य----समृद्धि, ऐश्वर्य॒, सम्पन्नता (ज)----समृद्धि----समृद्धि----समृद्धि----वळम् शेल्वम्----समृद्धि, ऐश्वर्यं----श्रीमंतिगॆ, ऐश्वर्य----
3037सम्मानपुंलिंग----इज्ज़त, आदर, प्रतिष्ठा।----सनमान----इज़्ज़त----यज़थ----मानु, इज्ज़त----प्रतिष्ठा, सन्मान----सन्मान, सत्कार----समादर, मर्या॒दा (ज)----सन्मान, मान----आदर, प्रतिष्ठा, सम्मान----सन्मानमु----मरियादै----बहुमानं----मर्यादॆ----
3038सम्मेलनपुंलिंगपुंलिंग---मनुष्यों का किसी विशेष उद्देश्य से अथवा किसी विषय पर विचार करने के लिए एकत्र होने वाला समाज ;कोई स्थायी बहुत बड़ी संस्था।---समेलन----इज्तिमाअ़कान्फ़रेंस---समनबल, समेलनकान्फरेंस---सम्मेलनु----सम्मेलन----सम्मेलनसंस्था---सम्मिलन/सम्मेलन, सभा, जनसमावेशस्थायी एवं बड़ संस्था---सन्मिलन(स्थायी) सभा, सन्मिलन---सम्मेळनसम्मेळन, संस्था---सम्मेळनमुसंस्थ---सम्मेळनम्, मानाडुनिलैयान निरु॒वनम---सम्मेळनंस्थापनं---सम्मेलनसंस्थॆ---
3039सम्मोहनपुंलिंगपुंलिंग---मुग्ध करना ;मुग्ध करने की शक्ति या गुण।---सम्मोहनमोहणी शक्ती---फ़रेफ़्ता करनाइ़श्वा---मूहित करु॑न----मोहिणुमोहिण जी ताकत या गुणु---मोहित करणेंसम्मोहन शक्ति---संमोहनमूर्छा, मोह---सम्मोहन, मुग्ध करण॒ (न)मुग्ध करिबार शक्ति व गुण॒ (न)---सन्मोहनमाहिनी शक्ति---सम्मोहनसम्मोहन---सम्मोहनमुसम्मोहनमु---मनदैक्कवर्दल्कवरुम्तिर॒न्---मोहिप्पिक्कल्सम्मोहन, शक्ति---मोहगाळिसुविकॆमोहिसुव सामर्थ्य---
3040सम्राटपुंलिंग----साम्राज्य का स्वामी।----शहनशाह, समराट----शहंशाह----सम्राट्, बादशाह----सम्राटु, महाराजा----सम्राट----सम्राट, शहेनशाह----सम्राट----सम्राट----सम्राट----सम्राट्टु----चक्करवर्त्ति----सम्राटु----चक्रवर्ति----
3041सरकनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---जमीन से सटे हुए आगे बढ़ना, रेंगना।धीरे-धीरे तथा थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना।---सरक्णा----सरकना----डलुन, खॊरवजि पेकुन----सिरिकणु, सुरणुरेढ़ियूं, पाइणु---सरपटणेंसरकणे---सरकवुं, खसवुंधीरे धीरे आगळ वधवुं---बुके भर दिया चला, हामागुडि देओयाआस्ते-आस्ते एगोनो---चोंचर, चुँचरि यालाहे लाहे आग बाढ़---(आगे) धुँचिबा----जरुगुटसागुट---नगर, तवऴमेळ्ळ मेळ्ळ मुन्नेर---वळुतुकइऴयुक---तॆवलुवुदुजरुगुवुदु---
3042सरकारस्त्रीलिंग----किसी देश के सम्राट, अधिनायक, राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री द्वारा चुने हुए मंत्रियों का वह दल जो सामूहिक रूप से संविधान के अनुसार उस देश का शासन करता है।----सरकार----सरकार, हुकूमत----सरकार----सरकारि----सरकार----सरकार----सरकार, राष्ट्रयशासनतंत्र----चरकार, प्रशासन----सरकार----प्रभुत्वमु, दॊरतनमु, पालकवर्गमु----सर्क्कार्, अरशु----सर॒कार॒, भरणकूटं----सरकार----
3043सरलविशेषणविशेषण---सीधा, भोला ;आसान, सहज।---सरल----सीधाआसान---आसानस॑ह॑ल---सिधो, बा॒लो भोलोसवलो---सरळ, भोळा-भावडासोपा---सरल, सादुं, सीधुं----सरल, सहज, सोजा, निरीह, सादसिधासहज---पोनसरल, सहज---सरळ----सरळमुसुलभमु---नेरानसुलबमान, ऎळिदान---शुद्धनऎळुप्पमाय---सरळसुलभ, सरळ---
3044सरसविशेषणविशेषण---रसयुक्त, रसीला ;रचना जो भावमयी और मोहक हो।---सरस, रसदारसरस, रसदार---रसीला (रसदार)पुरकेफ़---र॑स्युल----रसवारो, रसीलोरचना जेका वणंदड़ हुजे---रसाळसुरस---सरस, रसवाळुंरसपडे एवुं---सरस, रसयु॒क्त (ज)सरस, मनोरमा---सरस, रसालरसाल---सरस----सरसमुरसवंतमु---रसमुळ्ळशुवैयुळ्ळ---रसमुळ्ळसरसं---सरस, रसदुंबिदरसपूर्ण---
3045सराहनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---तारीफ, प्रशंसा।तारीफ करना, प्रशंसा करना।---सुलाहुणा----तारीफ़सराहना---ता॑रीफ़ता॑रीफ करु॑न्य---साराहसाराहिणु---प्रशंसाप्रशंसाकरणें---सराह, श्लांघा----प्रशंसा, सुख्यातिप्रशंसा करा---प्रशंसा, गुणवानप्रशंसा कर, गुण गा---प्रशंसा, गुणगानप्रशंसा करिबा---पोगड्तपोगडुत, कोनियाडुट---पुगऴ्दल्, मॆच्चुदल्पुगऴ, मॆच्च---प्रशंसप्रशंसिक्कुक, श्लाधिक्कुक---हॊगलिकॆहॊगलुवुदु---
3046सरोकारपुंलिंग----वास्ता, संबंध।----सरोकार----सरोकार----वाठ, वाबस्तगी----वास्तो----संबंध----संबंध----सम्बन्ध, सम्पर्क----सम्बन्ध, सम्पर्क----संबंध----संबंधमु----संबन्दम्----बंधं----संबंध----
3047सरोवरपुंलिंग----तालाब।----सरोवर----तालाब----तलाव----तलाउ, ढंढ----सरोवर----सरोवर----बड पुकुर, सरोवर----सरोवर, पुखुरी----सरोबरी, पोखरी----सरोवरमु----कुलम् पॊयगें----सरोवरं, कुळं----सरोवर----
3048सर्गपुंलिंग----किसी ग्रंथ विशेषत: काव्य ग्रंथ का अध्याय।----सरग----फ़स्ल----बाब, अद्याय----बाबु, अध्याउ----सर्ग, अध्याय----सर्ग, अध्याय----ग्रन्थादिर अध्याय वा परिच्छेद----(कितापर) खण्ड बा अध्याय----सर्ग----सर्ग----सरुक्कम् काप्पियत्तिन ओरु पगुदि----सर्गं----सर्ग, खंड----
3049सर्जनपुंलिंग----उत्पन्न करना या जन्म देना।----सिरजण----तख़्लीक (तक्वीन)----पादु॑ करुन----उत्पती----रचना, उत्पत्ति, सृजन----सर्जन----सृष्टि----सरजन, स्रजन----सर्जन----सृजन----शिरुष्टि, आक्कल----सृष्टि----जन्म कॊडुविकॆ----
3050सर्पपुंलिंग----सांप।----सप्प----सांप----सरुफ----नांगु, सपु----सांप, सर्प----सर्प, साप----सर्प, साप----साप----सर्प, साप----सर्पमु, पामु----सर्पम्, पांबु----सर्प, पाम्पु----हावु----
3051सर्वज्ञविशेषणपुंलिंग---सब कुछ जानने वाला।ईश्वर।---सरवग्ग----अ़लीम (हमादाँ)----सा॑रुय ज़ानन वोलबगवान---सभु कुछ जाणंदड़ु, सर्वज्ञईश्वरु---सर्वज्ञईश्वर---सर्वज्ञ, ईश्वर----सर्वज्ञईश्वर---सरबजानईश्वर---सर्वज्ञ----सर्वज्ञुडुईश्वरुडु---ऎल्लामरि॒न्दकडवुळ्---सर्वज्ञन्भगवान्---सर्वज्ञदेवरु---
3052सर्वत्रक्रिया विशेषण----सब जगह।----सरवत्त----हमाजा (हरजा)----हरजा, सरवतु॑र----हर हंधि----सर्वत्र----सर्वत्र----सर्वत्र----सर्बत्र, सकलोते----सर्बत्र----सर्वत्र----ऎल्ला इंडगाळिलुम्----सर्वत्र----ऎल्ला कडॆ----
3053सर्वव्यापकपुंलिंग----जो सब स्थानों और सब पदार्थों में व्याप्त हो।----सरबविआपक----मुहीते कुल (हाज़िरो नाज़िर)----सारिननियन जायन मूजूद----सर्वव्यापी----सर्वव्यापक----सर्वव्यापक----सर्वव्यापी----सर्बब्याप्त----सर्बब्यापक----सर्वव्यापकमु----ऎगुम निरैन्द----सर्वव्यापि----सर्वव्यापक----
3054सर्वसम्मतिस्त्रीलिंग----सबकी एक सम्मति या राय, मतैक्य।----सरबसमती----यकराई----यकराय----यकराइ----सर्व सम्मति, मतैक्य----सर्व संमंति----सर्वसम्मति, सकलेर अनुमोदन----ऐक्यमत, सर्बसन्मति----सर्बसम्मति----सर्वसम्मति----ऎल्लेरालुम् सम्मदिक्क प्पडल्----सर्वसम्मतं, ऐककंठ्यं----ऒम्मत----
3055सर्वांगीणविशेषणविशेषण---सब अंगो में व्याप्त होने वाला ;जो सभी अंगों से युक्त हो।---सरबंगीसरबंगी---हमागीर (जाम़े)जामेअ़---हमु॑गीरचॅपा॑र्य---समूरो, सभिनी अंगनि में समायलु----सर्वांगीण----सर्वांगीण----सर्वाङ्गीण॒, सर्वाङ्गव्यापी (न)पूर्णाङ्ग---सर्बांगीणसकलो अंगते थका---सर्बांगीण----सर्वांगीणमुसमग्रमु---ऎल्ला उरु॒प्पुगळिलुमऎल्ला उरु॒प्पुगळुम् उडैय, पूरणमान---सर्वांगीणंसर्वांगयुक्तं---सर्वांगीण----
3056सर्वेक्षणपुंलिंग----किसी विषय के सही तथ्यों की जानकारी के लिए उसके सभी अंगो का किया गया अधिकारिक निरीक्षण।----सरवेखण----जाइज़ा (सर्वे)----जाय॑जु----सर्वे, सरसरी जाइज़ो----सर्वेक्षण----सर्वेक्षण----परिमाप, जरिप, निरीक्षा॒ (क्ख)----जरीप, पूर्णांग जरीप----सर्बेक्षण----सर्वेक्षण विहंगावलोकनमु----मेर्पावैं, विंवरगळै आरि॒दल्----सर्वेक्षणं, सर्वे----मोजणि, सर्वेक्षण----
3057सर्वोदयपुंलिंगपुंलिंग---सभी का उदय या उन्नति ;सब लोगों के आर्थिक, नैतिक तथा सामाजिक उत्थान के लिए चलाया गया स्वतंत्र भारत का एक आन्दोलन।---सरबोदैसरबोदै---रिफ़ाहे आ़मसर्वोदय---सर्वोदयआम बॆहबूदी, रिफायि आम---सर्वोदय----सर्वोदय----सर्वोदय----सवाइर उन्नति, सर्वोदयसर्वोदय---सर्बोदयसर्बोदय आन्दोलन---सर्बोदय----सर्वोदयमुसर्वोदयमु---ऎल्लोरुडैय मुन्नेट॒ट॒म्सर्वोदय इयक्कम्---सर्वोदयंसर्वोदयं---सर्वर अभिवृद्धिसर्वोदय---
3058सलाहकारपुंलिंग----राय देने वाला, परामर्शदाता।----सलाहकार----मुशीर----सलाहकार----सलाहकारु----सल्लागार----सलाहकार----परामर्शदाता----उपदेष्टा----परामर्शदाता----सलहादारुडु----अरि॒वुरैयाळर्----उपदेष्टावु----सलहॆगार----
3059सस्तापुंलिंगपुंलिंग---कम मूल्य का ;घटिया।---ससता----सस्ता----श्रॊग, सस्तु॑----सस्तो----स्वस्तहलका---सस्तुहलकुं---सस्ताखेलो, निरेस---सस्ता, सस्तीयानिकृष्ट, बेया---शस्ता----चवुकचवुकरकमु---मलिवानकुरै॒न्दमदि-प्पुळ्ळ---विल कुरञ्ञतरं ताऴ्न्न---अग्गवादकीळु---
3060सहकारितास्त्रीलिंग----साथ मिल कर काम करना, मदद, सहायता।----सहकारता----तआ़वुन (इश्तिराके अ़मल)----रलिथ मीलिथ काम॑ करु॑न्य----सहकारु----सहकार्य, मदत----सहकारीपणुं----सहकारिता, साहाय्य सहाय॒ता (ज)----सहकारिता, सहायता, सहाय----सहकारिता----सहकारमु----कूट्टुर॒वु----सहकरणं----सहकार----
3061सहजविशेषणविशेषण---जन्मजात, प्राकृतिक ;आसान।---सहिज----पैदाइशी (ख़िल्क़ी)आसान---आसान, सहल----कुदिरती, सुभवीकुसविलो---जन्मजात, नैसर्गिकसहज, अनायास---सहज, स्वाभाविकअनायास---जन्मजात, प्राकृतिकसहज---सहज, जन्मजातसहज, सरल---सहज----सहजमुसुलभमु---इयर्क्कैयानऎळिदान---जन्मसहजंऎळुप्पमाय---सहजसुलभ---
3062सहन शक्तिस्त्रीलिंग----सहने की शक्ति, सहिष्णुता, सहनशीलता, सह्यता।----सहिनशकती----कुव्वते बरदाश्त----बरदाश करनुक ताकत----सहण जी ताकत, सहन शक्ती----सहनशक्ति----सहन शक्ति----सहिष्णुता, सहनशीलता सहनशक्ति (न)----सहनशक्ति, सहिष्णुता----सहनशक्ति----सहनशक्ति, ओर्पु----पॊरु॒त्तक्कोळ्ळम तिर॒मै----सहनशक्ति----सहनशक्ति----
3063सहनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---सहन करना, झेलना ;बर्दाश्त करना, कष्ट उठाना।---सहिणा----सहना----बरदाश करुन----सहणु----सहन करणें----सहेवुं----सह्य कराकष्ट सह्य करा, बरदास्त करा---सह, सह्य करकष्ट कर---सहिबा----सहिंचुटओर्चुकोनुट---पॊरु॒त्तुक्कोळ्ळ----सहिक्कुकपॊरु॒क्कुक---सहिसुवुदुताळुवुदु, तडॆयुवुदु---
3064सहमतविशेषण----जिसका मत दूसरे से मिलता हो। जो दूसरे के मत को मान कर उसकी पुष्टि करता हो।----सहिमत----मुत्तफ़िक़----मुतफ़िक----सहमति----सहमत----सहमत----सम्मत, एकमत----एकमत, ऐक्यमत----एकमत----अंगीकरिंचिन एकी भविंचिन----ऒरुमनदान, इणंगिय----योजिप्पुळ्ळ----ऒम्मतवाद----
3065सहमतिस्त्रीलिंग----सहमत होने का भाव या अवस्था, एक मत होना।----सहिमति----इत्तिफ़ाक़ (इतिफ़ाक़े राय)----राय----सहमती, पुठिभराई----सहमति----एकमतीए सहमती----सम्मति----सहमति, एकमति----सहमतिता, ऐकमत्य----अंगीकारमु एकीभावमु----ऒरुमनप्पडुदल इणक्कम्----अभिप्रायैक्यं योजिप्पु----सम्मति, ऒम्मत----
3066सहयोगपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--साथ मिलकर काम करना ;किसी के काम में हाथ बटाना ;सहायता देना।--सहियोग----तआ़वुन----अथु॑वास, मदद----सहयोगु----सहयोगसहकार्यसाहाय्य--सहकारसहकार्यमदद--सहयोग॒ (ज)सहयो॒ग (ज)साहाय्य॒ (ज्ज)--सहयोगसहायता, सहायसहायता--सहजोग----सहचर्यमुसहकारमुसहायमु--ऒत्तुऴैप्पुउदवि अऴिक्कउदवि अळिक्क--सहकरणंपंकॆटुक्कल्सहायं--सहयोगसहकारसहाय--
3067सहयोगीपुंलिंग----सहयोगी।----सहयोगी----रफ़ीक़ेकार (रफ़ीक)----सू॑त्य का॑म करन वा॑ल, रफीक----सहयोगी, साथी कमु कंदड़ु----सहयोगी----सहकार----सहयो॒गी, सहकर्मी (ज)----सहयोगी, सकहर्मी----सहजोगी----सहोद्योगि----ऒत्तुऴैप्पवर, ऒरेनिरुवनत्तिल् उऴैप्पवर्----सहप्रवर्तकन्----सहयोगि----
3068सहलानासकारात्मक क्रिया----धीरे-धीरे मलना या हाथ फेरना।----पलोसणा----सहलाना----फश-फश द्युन----नर्माईअ सां सहिरणु थधिड़ा कढणु----हात फिरवणें, कुरवाळणें----पंपालवुं----आस्ते-आस्ते, हात बुलानो----हातबुला, हातफुरा----आऊंशिबा----निमरुट----तडाविक्कोडुक्क----तटवुक----तडवुवुदु, सवरुवुदु----
3069सहानुभूतिस्त्रीलिंग----हमदर्दी।----हमदरदी----हमदर्दी----हमदरदी----हमदर्दी----सहानुभूति----सहानुभूति----सहानुभूति----सहानुभूति----सहानुभूति----सानुभूति----अनुताबम्----सहतापं----सहनुभूति----
3070सहायतास्त्रीलिंग----मदद।----सहाइता----मदद (तआ़वुन)----मदद----सहायता, मदद----सहायता----सहायता, मदद----साहाय्य॒ सहायता (ज)----सहायता, सहाय----साहाय्य----सहायमु, सायमु----उदवि----सहायं----सहाय----
3071सहिष्णुविशेषण----सहने वाला, बरदाश्त करने वाला।----सहिनशील----मुतहम्मिल (साबिर)----सा॑बिर----सहनशीलु, सबुर वारो----सहिष्णु----सहिष्णु----सहिष्णु----सहिष्णु, सहनशील----सहिष्णु----सहिष्णुवु----पॊरु॒त्तुक्कोळ्गिर॒----सहिक्कुन्न, सहनशक्तियुळ्ळ----सहिष्णु, सैरणॆयुळ्ळ----
3072सहिष्णुतास्त्रीलिंग----सहनशीलता।----सहिनशीलता----तहम्मुल, मादाए बरदाशत----सा॑बिरी, सबूर----सहनशीलता, सबुरु----सहिष्णुता----सहिष्णुता, सहनशीलता----सहिष्णुता----सहिष्णुता, सहनशीलता----सहिष्णुता----सहिष्णुत, सहनमु----पॊरु॒मै, पॊरु॒त्तुक्कोळ्ळुम् गुणम्----सहिष्णुत----सैरणॆ----
3073सहृदयतास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---दयालुता, करुणा ;रसज्ञता।---सहिरदता----दर्दमंदीज़ौक---दरु॑द मंदीचुक्यदेरी---रहमदिली----दयाळुपणा, सहृदयतागुणग्राहकता---सहृदयता, दयाळुता----सहृदयता, दयालुता, करुणा॒ (न), सदाशयतारसज्ञता, गुण॒ग्राहीता (न)---दया, करुणारसज्ञता, रसिकता, सहृदयता---सहृदयता----सौहार्दमुसहृदयत---कनिन्दमनम्, करुणै----करुणसहृदयत्वं---करुणॆरसिकतॆ---
3074सांकेतिकविशेषणविशेषण---संकेत संबंधी ;संकेत रूप में होने वाला।---संकेतक----अ़लामती----अलामती---------सांकेतिक----सांकेतिक----सांकेतिक, सङ्केतकारक, इशारा----सांकेतिक----सांकेतिक----सांकेतिकमु----अडैयाळमान----सांकेतिकं----संकेतद----
3075सांगोपांगविशेषण----सभी अंगो और उपांगों सहित।----संपूरन----मुकम्मल----सोंगूपांग----पूरो, समूरो----सांगोपांग----सांगोपांग----साङ्गोपाङ्ग----सांगोपांग----सांगोपांग, सर्बाङ्गीण----सांगोपांगमु----मुऴुमैयान----सांगोपांगं----सांगोपांग----
3076सांत्वनास्त्रीलिंग----शोकाकुल या संतप्त व्यक्ति को शांत करने या समझाने-बुझाने की क्रिया, तसल्ली।----धारस----तसल्ली----तसु॑ली----दिलासो, ड॒ढु----सांत्वन----सांत्वना, आश्वासन----सांत्वना, प्रबोध-दान----सांत्वना----सांत्वना----ओदार्पु, ऊरपिंडु सांत्वन----आरुदल्----सांत्वनं, आश्वासनं----समाधान----
3077साकारविशेषणविशेषण---मूर्त, आकारयुक्त ;बात या योजना जिसे क्रियात्मक रूप प्राप्त हुआ हो।---साकारसाकार---मुशक्कल (मुजस्मम)तश्कीलयाफ़ता---साकार----साकारु, रूपवारो----मूर्त, साकारसक्रिय योजना---साकार, मूर्तसक्रिय योजना---साकार, आकारयु॒क्त (ज)कायाकारी यो॒जना (ज)---साकार, मूर्तरूपायित---साकार----साकारमुकार्यरूपमु---उरुवमुळ्ळअमुलाक्कप्पट्ट---मूर्तं, साकारंसफलं---रूपवुळ्ळकार्यरूप गॊळिसिद---
3078साक्षरतास्त्रीलिंग----पढ़े-लिखे होने का भाव।----साखरता----ख़्वांदगी----खांदगी-लीखिमु॑त्य----तैलीम याफ़्ताई----साक्षरता----साक्षरता----साक्ष॒रता (क्ख)----साक्षरता----साख्यरता----अक्षरास्यत----ऎळुत्तरिवु----साक्षरत्वं----साक्षरतॆ----
3079साजनपुंलिंगपुंलिंग---पति, स्वामी ;प्रेमी।---सज्जण----शौहरआ़शिक़---रून, बरथायावनमॊत---साजनुसाजनु, प्रेमी---पति, स्वामीप्रियकर, साजन---साजन, पतिप्रेमी---स्वामीप्रेमी---पति, स्वामीप्रेमिक---पति, स्वामीप्रणयी, प्रेमिक---भर्तप्रियुडु---कणवन, ऎजमान्कादलन्---पति, भर्त्तावुकामुकन्---गंडप्रेमि---
3080साज-समानपुंलिंगपुंलिंग---सामग्री, उपकरण, असबाब ;ठाठ-बाट।---साज-समान----साज़ोसामान----साजु॑-सामानुअसबाबु॑---साजु-सामानु----साजसरंजामथाटमाट---साज-सामानठाठमाठ---साज-सरञ्जाम, जिनिसपत्र, उपकरणजाँकजमक, ठाटबाट, साज-सज्जा---साज-सरंजाम, सा-सजुलिजाक-जमक---जिनिस-पत्रसाज-सज्जा, जाक-जपक, चाक-चक्य---साधन सामग्रिपटाटोपमु---सादनंगळ्, दळवांडगळ्दडबुडल---उपकरणं, सामग्रिआडंबरं---सज्जु-सामानुआडंबर---
3081साझेदारीस्त्रीलिंग----हिस्सेदारी, शराकत!----भाईवाली----शिराकत----हिसु॑दा॑री----हिसेदारी, भाईवारी----भागीदारी----भागीदारी----साजा, भाग, अंश----आशीदारि----अंशीदारि, भाग----भागास्वाम्यमु----कूट्टु (वियाबारत्तिल्)----पंकाळित्तं, पंकु----पालुगारिकॆ----
3082सात्विकविशेषण----सतोगुणी, सत्वगुण-प्रधान, अनुभूति या भावनाजन्य।----सातविक----सालेह----सतूगुनी----सात्विकु----सात्विक----सात्त्विक----सात्विक, सत्त्वगुण सम्बन्धनीय, सत्त्वगुण बिशिष्ट मनोभावजन्य----सात्विक----सात्विक----सात्विकमयिन----अमैदियान इयल्बुळ्ळ----सात्विकं----सात्विक----
3083सादरक्रिया विशेषण----आदरपूर्वक, इज्जत से।----आदर सहित----मुअद्दबाना----यज़तु॑ सान----आदर सां, इज्ज़त सां----आदर पूर्वक, सादर----सादर----सादरे----सन्मानपूर्वक, ससन्माने----सादर----आदरपूर्वक, मुगा----मरियादैयुडन्----आदरपूर्वं----आदरपूर्वक----
3084सादाविशेषणविशेषण---खालिस, बिना मिलावट ;जिसमें किसी तरह की उलझन, पेंच की बात या बनावट न हो, सरल।---सादासादा---सादा----सादु॑----सादो, सविलोसिधो---विशुद्धसाधा, सरळ---विशुद्धसादुं, सरळ---खाँटिसोजा, सरल, सादा, सिधा---बिशुद्ध, खाँटिसरल---शुद्ध, सादासरल---निराडंबरमुसरळमु---कलप्पडमट॒ट॒सादा---कलर्प्पिल्लात्तनेर्वळिक्कुळ्ळ---बॆरकॆइल्लादसरळवाद---
3085सादृश्यपुंलिंग----समानता, तुल्यता, बराबरी।----समानता----मुमासलत----बराबरी, हिशर----सागि॒याई----समानता, बरोबरी, सादृश्य----सादृश्य, समानता----सादृश्य, एकरूपता, तुल्यता----सादृश्य, मिल----सादृश्य----सादृश्यमु----ऒरुमैप्पाडु----सादृश्यं----समानतॆ----
3086साधनपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--सामान, सामग्री, उपकरण ;कोई ऐसी चीज़ या वस्तु जिससे कुछ करने की शक्ति आती है (मीन्स);जिसके सहारे कोई काम पूरा होता है (रिसोर्सिस)।--साधनसाधनसाधन--सामानज़रीया (ज़रीआ़)वसीला--ज़रियि----साधनुउपाउ, वसीलोज़रीओ--साधन, सामग्रीसाधन, उपायसाधन संपत्ति--साधन, उपकरणउपाय, साधनसाधन संपत्ति--सामग्री, उपकरणउपाय, करण॒ (न)साधन, सहाय--सामग्री, उपकरणउपादान, सँजुलिसामग्री--साधन----साधनमुसाधनमुसाधनमु--सादनंगळ्, दळवाडंगळ्करुविगळ्बशादिगळ्--उपकरणंवऴिविभवं--सलकरणॆसाधनसाधन-सौळभ्य--
3087साधनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---कोई कार्य सिद्ध या सम्पन्न करना ;ऐसी आराधना या उपासना जो बहुत कष्ट सहते हुए मनोयोग-पूर्वक की जाती है अथवा किसी महत्वपूर्ण कार्य को सिद्ध करने के लिए त्याग तथा परिश्रम से किया गया प्रयत्न या प्रयास।---साधना----तक्मीलरियाज़त---सादनाअबादथ---साधना----साधना, पूर्त्तिसाधना, उपासना---साधवुं तेसाधना, उपासना---कार्य सम्पादन, साधनाआराधना वा उपासना (तांत्रिक साधना)---साधन, पूरणसाधना, तपस्या---साधना, पूरण, संपादनसधना, तपस्या---साधनसाधन---शादित्तल्उपासनै, पॆरुमुयर्चि---कार्यं नेटल्साधन, उपासन---सिद्धगॊळिसुवुदुसाधनॆ---
3088साधारणविशेषणविशेषण---जिसमें कोई विशेषता न हो, सामान्य, मामूली ;सहज, सुगम, सरल।---साधारण----आ़म----सादारनस्यॊद सादु॑---साधारणु, आमुसविलो, रवाजी---सामान्य, साधारणसुगम, सरल---साधारण, सामान्यसुगम, सरळ---विशिष्टता वर्जित साधारण॒ (न)सहज, सरल---साधारणसहज, सुगम, सरल---साधारणसहल, सुगम, सरळ---साधारणमुसाधारणमु, सामान्यमु---सादारणमानऎळिदान---साधारणसाधारण---साधारणवाद, सामान्यवादसहजवाद---
3089साधुपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--संत, महात्मा ;बढ़िया, उत्तम ;सज्जन, भला, आदमी।--साधूबधीआसाऊ--पारस (नेक)नेकशरीफ़मनिश--साद----साधू----साधु, संतउत्तमसज्जन, साधु--साधुसारुं, उत्तमसदाचरणी--साधु, महात्माउत्तम, उत्कृष्टसत् (व्यक्ति), शिष्ट, भद्र--सत, साधुभाल, उत्तमसत्पुरुष, भलमानुह--साधु, माहत्माउत्तम, उत्कृष्टसज्जन, भल-मणिस--साधुवुसाधुवुसाधुवु--सादु, महात्माशिर॒न्दनल्लवर्--महात्मावु, सन्यासिश्रेष्ठंसाधु--संत, महात्मऒळ्ळॆयसज्जन--
3090साध्यविशेषणविशेषणविशेषण--जो सिद्ध या पूरा किया जा सके;निष्पाप ;(रोग आदि) अच्छा करने योग्य।--साधण जोगसाधण जोगसाधण जोग--क़ाबिले अ़मल (मुम्किन)क़ाबिले त़ामीलक़ाबिले इ़लाज--स्यदठीख गछ़न वा॑लयलनाजस लायख--पूरो करण जोगो॒हासुलु करण जोगो॒घुटण जोगो॒--साध्यसाध्यचिकित्सा योग्य--साध्यसाध्यचिकित्सा योग्य--साध्य, साधनीयक्ष॒मतार सम्पादाय, आयत्त (ख)साधनयोग्य (चिकित्सा), साध्य--साध्यप्रमाण करिबर योग्य(रोग) भाल करिब पर--साध्य, साधनीयसाध्यसाध्य--साध्यमुसाध्यमुसाध्यमु--साद्दियमानसॆयदुमुडिक्क कूडियसरिप्पुडुत्तक्कूडिय--साध्यंनिष्पापंसाध्यं--साध्यनिष्पापगुणपडिसुव--
3091सान्निध्यपुंलिंग----निकटता, समीपता।----नेड़----कुर्बत----नखु॑----वेझाई----सान्निध्य, सामीप्य----सान्निध्य, समीपता----सान्निध्य, समीप्य, नैकट्य----सान्निध्य, समीपता----सान्निध्य----सान्निध्यमु----अरुगामै----सांन्निध्यं----सामीप्य----
3092साक्षेपविशेषण----जो किसी की अपेक्षा रखता हो, जो दूसरों पर अवलम्बित हो।----सापेख----मोहताज----का॑सि प्यठ अलोंद----निस्बती बि॒ए ते आधारु रखन्दड़ु----सापेक्ष----सापेक्ष----सापेक्ष, अपेक्षा॒युक्त (क्ख)----सापेक्ष----सापेख्य----आधारपडिन, सापेक्षमु----पिर॒रै नंबियिरुक्किर----सापेक्षं----सापेक्ष----
3093साफ़विशेषणविशेषणविशेषण--स्वच्छ, निर्मल ;जिसकी बनावट, रचना रूप आदि में कोई त्रुटि न हो या जो ऊबड़-खाबड़ न हो ;जिसमें किसी प्रकार का भ्रम या संदेह न रह गया हो।--साफसाफसाफ--साफ़----साफ़नॅकसु॑ वराय---साफु----स्वच्छ, निर्मळत्रुटिहीननिस्संदेह--साफ, निर्मलत्रूटिहीननिस्संदेह--परिष्कृत, स्वच्छ, निर्मल, साफसुडौल/सुड़ोल, सुगठितभ्रमहीन, निस्संदेह--चाफा, निमर्मलनिर्दोष, त्रुटीहीननि:स्संदेह--सफ़ा, निर्मळ, स्वच्छनिर्दोष, त्रुटिहीननि:संदेह, संदेह-रहित, असंदिग्ध--स्वच्छमुशुभमुस्पष्टमु--शुद्दमानअमैप्पिल् पिळैयट॒ट॒कुऴप्पमट॒ट॒ संदेहमट॒ट॒--वृत्तियुळ्ळ, निर्मलमायकुट॒मिल्लात्तसंशयरहितं--स्वच्छ, चॊक्कटवादत्रुटि इल्लदस्पष्टवाद--
3094साबुनपुंलिंग----सोडा तेल आदि के योग से बना हुआ एक पदार्थ जिससे शरीर और कपड़े साफ किए जाते हैं (सोप)।----साबण----साबुन----साबन----साबुणु----साबण----साबु----साबान----चाबोन----साबुन----सब्बु----सोप्पु----सोप्पु----साबूनु----
3095सामंजस्यपुंलिंग----वह स्थिति जिसमें परस्पर किसी प्रकार की विपरीतता या विषमता न हो, संगति, अनुकूलता।----अनुकूलता----मुताबक़त----मिलु॑च़ार----मुनासिबत, मौज़ूनियत----सामंजस्य----सामंजस्य----सामञ्जस्य, औचित्य, संगीत----सामंजस्य, संगति----सामंजस्य, संगति, अनुकूळता----सामंजस्यमु----पॊरुत्तम्----सामंजस्यं----सामंजस्य----
3096सामग्रीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---आवश्यक वस्तुओं का समूह, सामान ;किसी उत्पादन, निर्माण रचना आदि के सहायक अंग या तत्व।---समग्ग्रीसमग्ग्री---सामानमवाद (मसाला)---सामु॑ग्री----सामग्री, सामानुसामानु-सड़ो---सामग्री, सामानसामान, साहित्य---सामग्रीसामान, साहित्य---सामग्री, जिनिसपत्रउपादान, उत्पादकतत्त्व---सामग्री, संजलिउपादान---सामग्री----सामग्रिसामग्रि---सामान्गळ, पंडंगळ्तुणै-पॊरुळ्गळ्---सामग्रिसाधनं---सामानुगळुसामानु---
3097सामनेअव्ययअव्यय---आगे, समक्ष ;मुकाबले में।---साह्मणे, साह्वेंसाह्मणे, साह्वें---सामने----ब्रोहंकनि----साम्हूं----समोरतुलनेने---सामे, आगळ, रूबरूमुकाबले---आगे, सम्मुखे, सामनेअपेक्षा॒य (क्ख)---समुखतेमुखामुखिकै---सामनारे----मुंदुऍदुट---ऎदिरेमुन्---मुन्पिल्अपेक्षिच्चु---मुंदॆमुंदॆ---
3098सामर्थ्यपुंलिंग----कोई कार्य करने की योग्यता और शक्ति।----समरत्त्था----मक़्दूर (क़ुद्रत)----ताकथ, सामरथ----समर्थी, सघ ताकत----शक्ति, सामर्थ्य----सामर्थ्य, शक्ति----सामर्थ्य, क्षमता, योग्यता, शक्ति----सामर्थ्य----सामर्थ्य, जोग्यता----सामर्थ्यमु----सामर्त्तियम् तिर॒मै----सामर्थ्यं, कळिवु----सामर्थ्य----
3099सामयिकविशेषणविशेषण---समयोचित, ठीक समय में ;वर्तमान समय का।---समेसिरअजोका---बरवक़्तअ़सरी---वकतीअज़्युक---वक्ताइतोहलंदड़ वक्त जो---समयानुकूलवर्तमानकालीन---सामयिक----सामयिक, यमायोचितवर्तमान समय, सङ्काल---समयोचितसामयिक, बर्तमान समयर---सामयिक, समयोचित----समयानुगुणमुप्रस्तुतमु---नेरत्तिर्कुरियतर्पोदैय---समयोचितंतात्कालिकं---समयोचितइंदिन---
3100सामाजिकविशेषण----समाज का, समाज के संबंध रखने वाला।----समाजक----समाजी----समाजी----सामाजिक, पंगती----सामाजिक----सामाजिक, समाजनुं----सामाजिक, समाजसम्बन्धीय----सामाजिक----सामाजिक----सामाजिकमु, साधिकमु----समूगत्तिय----सामूह्यं----सामाजिक----
3101सामान्यविशेषणविशेषण---मामूली ;सार्वजनिक, आम।---मामूलीआम---आ़म----मोमूलीमोमूली---मामूली, रवाज़ीआमु---सर्वसाधारण, सामान्यसार्वजनिक---सामान्य, मामूलीसार्वजनिक---सामान्य, साधारणसर्वविषयक, सर्वजनीन---सामान्यसार्बजनिक---सामान्य----सामान्यमुसार्वजनीनमु---सादारणमानपॊंदुवान---साधारणपॊतु---सामान्य, साधारणसार्वजनिक---
3102साम्राज्यपुंलिंग----वे अनेक राष्ट्र या देश जिन पर कोई एक शासक-सत्ता राज्य करती हो।----सामराज----सामराज (सल्तनत)----साम्राज----साम्राजु, सुल्तनत----साम्राज्य----साम्राज्य----साम्राज्य----साम्राज्य----साम्राज्य----साम्राज्यमु----साम्राज्यम्----साम्राज्यं----साम्राज्य----
3103साम्राज्यवादपुंलिंग----वह सिद्धान्त जिसमें यह माना जाता है कि किसी देश को अपने अधिकृत देशों में वृद्धि करते हुए अपने साम्राज्य का विस्तार करते रहना चाहिए (इम्पीरियलिज़म)।----सामराजवाद----सामराजियत (मुलूकियत)----साम्राजी----साम्राजवादु, सुल्तनतशाही----साम्राज्यवाद----साम्राज्यवाद----साम्राज्यवाद----साम्राज्यबाद----साम्राज्यबाद----साम्राज्यवादमु----एकादिपत्तियम्----साम्राज्यवादं----साम्राज्यवाद----
3104सामुद्रिकविशेषण----समुद्र संबंधी, समुद्र से संबंध रखने वाला।----समुंदरी----बेह्री (समन्दरी)----समंदरस सू॑त्य वाबस्तु, समंदरुक----सामूंडी----सामुद्रिक, सागरी----सामुद्रिक----सामुद्रिक, समुद्र-सम्बन्धीय----सामुद्रिक----सामुदिरक----समुद्रसंबंधमयिन----कडल् संबन्दमान----समुद्रसंबधि----समुद्र संबन्धवाद----
3105सामुद्रिकपुंलिंग----फलित ज्योतिष की वह शाखा जिसमें मनुष्य की हस्त रेखाओं और शरीर के चिह्नों आदि के शुभ-अशुभ फल पर विचार होता है।----सामुद्रिक----इल्मुलयद् (इल्मेक़ियाफ़ा)----जा॑तिश फल----हथरेखा विद्या----सामुद्रिक शास्त्र, ज्योतिष----सामुद्रिकशास्त्र, ज्योतिष----कररेखा ओ देहस्थ अन्यान्य चिह्नद्वारा शुभाशुभ निर्ण॒येर शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र (न)----(फलित ज्योतिष) सामुद्रिक विचार----सामुद्रिक सामुद्र-शास्त्र----हस्तसामुद्रिकमु----कैरेगैशास्तिरम्----सामुद्रिक शास्त्रं----सामुद्रिक----
3106सामूहिकविशेषण----समूह से संबंध रखने वाला।----समूहक----इज्तिमाई़----मजमूही----गडि॒यलु, मज्मूए जे रूप में----सामुदियक----सामूहिक----सामूहिक----सामूहिक----सामूहिक----सामूहिकमु----समूगत्तिय----सामूह्यं----सामूहिक----
3107सारपुंलिंगपुंलिंग---मूल भाग, सत ;तात्पर्य या निष्कर्ष, सारांश।---सारसार---जौहरलुब्बे लुबाब---सारतात्परे---सारु----सत्त्व, सारसारांश, तात्पर्य---सार, सारुंसारांश, तात्पर्य---सार, मूल वा उत्कृष्ट अंशसारांश, तात्पर्य॒ निष्कर्ष (ज)---सार, मूलसारांश, सार---सार----सारमुसारांशमु, तात्पर्यमु---सारुकरुत्तु, सारांशम्---सारं, सत्तुआशयं, चुरुक्कं---मूलभागसारांश---
3108सारणीस्त्रीलिंग----आजकल कोई ऐसा कागज़ या फलक जिसमें बहुत से खाते होते हैं तथा जिन में विशेष प्रकार की गणना या विवेचन के लिए कुछ अंक शब्द आदि लिखे होते है (टेबल)।----सारणी----नक़्शा----लिस्ट----टेवुल, ख़ाको----तक्ता, पत्रक, टेबल, सारणी----सारणी, कोठो----सारणी/सारणि, तालिका, निर्घण्ट----तालिका, फलि----सूची, तालिका, सारणी----पट्टिक----अट्टवणै----पट्टिक----सारणि, पट्टि----
3109सारांशपुंलिंग----संक्षिप्तरूप, सार, निचोड़, उपसंहार।----निचोड़----ख़ुलासा----लुबिलुबाव----सारु, निचोड़ु----सारांश, तात्पर्य----सारांश, तात्पर्य----सारांश, सारांशरूप, उत्कृष्ट अंश, उपसंहार----सारांश----सारांश----सारांशमु----सारांशम्, शुरुक्कमान करुत्तु----सारांशं, पॊरूळ्----सारांश----
3110साराविशेषण----कुल, समस्त, पूरा, समय।----सारा----सारा----सोरुय----समरो, सजो॒, पूरो----समग्र, समस्त----सारुं, आखुं----सारा, समस्त, समग्र----समष्ट, सकलो----सारा, समस्त, पूरा, समग्र, सकळ, पूरापूरी----समस्तमु, अंता----मुळु, ऎल्ला----समस्तं, ऎल्लो----ऎल्ला----
3111सार्थकविशेषण----जिसका कुछ अर्थ हो अर्थवान।----सारथक----बाम़ानी----मानेदार----अर्थवारो----सार्थ, उपयोगी----सार्थक, उपयोगी----सार्थक, अर्थयु॒क्त (ज)----अर्थयुक्त----सार्थक----सार्थकमु, अर्थवंतमु----अर्त्तमुळ्ळ----अर्थवत्----अर्थवुळ्ळ----
3112सार्वजनिकविशेषणविशेषण---सर्वसाधारण-संबंधी।समान रूप से सब लोगों के काम आने वाला।---जंतकजंतक---आवामी----आमआम लूकनहुंद---सर्वसाधारणआमु---सर्वसाधारणसार्वजनिक----सार्वजनिक---सार्वजनिक, सम्बन्धीयसर्वहितकर---सार्बजनिकसाधारण, सकलोरे कामत अहा---सार्बजनिक----सार्वजनीनमुसार्वजनीनमु---पोदुमक्कळिन्ऎल्लोरुक्कुम् पयन् पडुगिर---सर्वसाधारणमायपॊतुतात्पर्यमुळ्ळ---सार्वजनिकऎल्लरिगू सेरिद---
3113सावधानविशेषण----सचेत, सतर्क, खबरदार।----साबधान----ख़बरदार----खबरदार----सावधानु----सावधान, सतर्क----सावधान, सावचेत----सावधान, सतर्क----सावधान, सतर्क----साबधान----हेच्चरिक----गवनत्तुडन् कूडिय----श्रद्धयुळ्ळ----ऎच्चरिकॆ----
3114साहित्यपुंलिंग----ग्रन्थों का समूह, किसी भाषा की समस्त गद्य तथा पद्यात्मक रचनाएं।----साहित्त----अदब----अदब----साहित्यु, अदबु----साहित्य, वाङ्मय----साहित्य----साहित्य----साहित्य----साहित्य----साहित्यमु, सारस्वतमु----इलक्कियम्----साहित्यं----साहित्य----
3115साहित्यकारपुंलिंग----साहित्य की रचना करने वाला।----साहित्तकार----अदीब----अदीब----साहित्यकारु----साहित्यकार, साहित्यिक----साहित्यकार----साहित्यिक----साहित्यकार----साहित्यकार, साहित्यिक----साहित्यवेत्त----इल्क्किय आशिरियर्----साहित्यकारन्----साहिति----
3116साहूकारपुंलिंग----बड़ा व्यापारी, महाजन।----शाहूकार----साहुकार----महाजन----शाहूकारु----सावकार----शाहुकार----साहुकार----सदागर, बर महाजन----साहुकार, बेचारी महाजन----षाहुकारु----पेरिय वियापारी, लेवादेविक्कारन्----उण्टियल् व्यापारि----साहुकार----
3117सिंगार (श्रृंगार)पुंलिंग----सजधज, सजावट।----शिंगार----सिंगार----सिंगार----सींगारु----श्रृंगार----शणगार----सज्जा, श्रृंगार----प्रसाधन, साजन-काचन, धुन-पेच----बेश-भूषा, प्रसाधन----सिंगारमु, अलंकारमु----ऒप्पनै, अलंगारम्----अलंकारं, चमयं----शृंगार----
3118सिंगारदानपुंलिंग----श्रृंगार की सामग्री रखने का छोटा संदूक।----शिंगारदान----सिंगारदान----सिंगारदान----सींगारदानु, सींगार जी पेती----फणी पेटी----शणगार पेटी----प्रसाधन-पेटिका----प्रसाधनर बस्त, रखा चन्दुक----प्रसाधन पेड़ी, सिंगार-दानी----सोम्मुलपेट्टे----ऒप्पनै पॆट्टि अळगु सादनप्पॆट्टि----आभरणप्पॆट्टि----वाचणिगॆ पॆट्टिगॆ----
3119सिंदूरपुंलिंग----एक प्रकार का लाल चूर्ण जिसे सौभाग्यवती स्त्रियाँ मांग में भरती हैं।----संधूर----सिंदूर----सयंदु॑र----सिंधुरु----शेंदूर----सिंदूर----सिन्दूर----सिन्दुर, सेन्दुर----सिंदूर----कुंकुम----कुंगुमम्----सिन्दूरं, कुंकुमं----कुंकुम----
3120सिंहनादपुंलिंगपुंलिंग---सिंह का गर्जन ;युद्ध आदि के समय गरज कर की जाने वाली ललकार, जोरदार शब्दों में ललकार कर कही जाने वाली बात।---सिंघनादसिंघनाद---दहाड़शद्दे मुख़ालिफ़---सु॑हु॑ग्रजुनजंगु॑क्रख---शींहं जी गजगोड़----सिंह गर्जनासिंहनाद, युद्धगर्जना---सिंह गर्जनासिंहनाद, युद्धगर्जना---सिंहनाद, सिंहेर गर्जनयु॒द्धेर आह्वान (ज)---सिंहर गर्जनरणहुंकार, रणनिनाद---सिंहनाद, सिंह-गर्जनासिंहनाद, रणहुँकार---सिंहगर्जनसिंहनादमु---शिंगत्तिन् गर्जनैअरै॒कूवलै-कुरिक्कुम् गर्जनै---सिंहगर्जनंसिंहनादं---सिंहगर्जनॆसिंहनाद---
3121सिंहासनपुंलिंगपुंलिंग---राजगद्दी।राजाओं के बैठने या देव मूर्तियों की स्थापना के लिए बना हुआ एक विशेष प्रकार चौकी के आकार का आसन जिसके दोनों ओर शेर के मुख की आकृति बनी होती है।---सिंघासनसिंघासन---तख़्तसिंघासन---राजुगद्यसिंगासन---राज॒गदीतख़्तु---सिंहासनसिंहासन---सिंहासन, राजगदीसिंहासन---राजासनसिंहमूर्तियु॒क्त आसन (ज)---(राज) सिंहासनसिंहासन---सिंहासन----सिंहासनमुसिंहासनमु---शिंगासनम्अरियणै---सिंहासनं----सिंहासनसिंहासन---
3122सितारापुंलिंगपुंलिंग---तारा, नक्षत्र ;भाग्य।---सितारासितारा---सितारा----तारुख----तारो, सितारोसितारो, नसीबु---तारा, नक्षत्रनशिब---सितारो, ग्रहभाग्य---तारका, नक्ष॒त्र (क्ख)भाग्य---तरा, नक्षत्रभाग्य, कपाल---तारा, नख्यत्रभाग्य, कपाळ---नक्षत्रमुअहष्टमु,---नक्षत्तिरम्, विण्मीन्अदिरुष्टम्---नक्षत्रंभाग्यं---नक्षत्रअदृष्ट---
3123सिद्धान्तपुंलिंगपुंलिंग---निश्चित मत जिसे सत्य के रूप में ग्रहण किया जाए, उसूल (प्रिंसिपल)।कला, विज्ञान आदि के संबंध में कोई ऐसी मूल बात जो किसी विद्वान द्वारा प्रतिपादित हो और जिसे बहुत से लोग ठीक मानते हों (थीअरी)।---असूल, सिद्धांतसिद्धांत---उसूलनज़्रिया---ऒसूलऒसूल---सिद्धान्त, उसूल-----सिद्धान्त---सिद्धान्तसिद्धान्त---सिद्धान्तसिद्धान्त---नीति, सूत्र, सिद्धान्तसिद्धान्त, तत्व, मतबाद---सिद्धान्त----सिद्धांतमुसिद्धांतमु---कॊळ्गै, कोट्पाडुतत्तुवम्---सिद्धांतं, तत्वंसिद्धांतं, वादं---तत्व, सिद्धांततत्व---
3124सिपाहीपुंलिंगपुंलिंग---फौजी आदमी, सैनिक ;पुलिस विभाग का साधारण कर्मचारी।---सिपाही----सिपाही----सिपाह, फूजी----सिपाही----सैनिक, शिपाईपोलिस, शिपाई---सिपाई, सैनिकपोलिस---सैनिक, सेपाईकनस्टेबल---सैनिक(पुलिचर) सिपाही---सिपाही----सिपायिपोलीसु---शिप्पाय्कावलर, टाणाक्कारन्---पट्टाळक्कारन्पोलीसुकारन्---सैनिकसिपायि---
3125सिफारिशस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी का कोई काम करने के लिए दूसरे से कहना ;किसी के गुण योग्यता आदि का परिचय देने वाली बात किसी दूसरे व्यक्ति से कहना जो उस पहले व्यक्ति का कोई उपकार कर सकता है, संस्तुति।---सिफारश----सिफ़ारिश----सुफा॑रिशसुफा॑रिश---सिफ़ारिश----शिफारस, बेशिलाशिफारस---लागपग, सिफारसभलामण---सुपारिशप्रशंसापत्र---अनुरोधअनुमोदन---सुपारिशसुनारिश, संस्तुति---सिफार्सुप्रशंस, प्रशंसा-पत्रमु---शिपारिशुशिपारिशु---शुपार्शशुपार्श---सिफारिसुप्रशंसापत्र---
3126सिर्फविशेषण----बस, इतना ही, केवल।----सिरफ----सिर्फ़----सिरिफ----सिर्फु, फ़कति----केवळ, फक्त----सिर्फ, फक्त, केवल----शुधु, केवल----केवल, मात्र----यथेष्ट----केवलमु, मात्रमु----मट्टुम्----मात्रं, केवलं----केवल, बरॆ----
3127सिलसिलापुंलिंग----क्रम, श्रृंखला।----सिलसिला----सिल्सिला----सिलसिलु॑----सिलसिलो----क्रम----सिलसिलो, क्रम----अनुक्रम, श्रृङ्खला----श्रृंखला, क्रम, अनुक्रम----क्रम, श्रृंखळा----बरुस, क्रममु----तोडर्चि----क्रमं, तुटर्च्च----क्रम----
3128सिलाईस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--सीने की क्रिया या भाव ;सिलने पर दिखाई पड़ने वाल टाँके;सिलने के बदले में मिलने वाली मजदूरी।--सुआईसुआईसुआई--सिलाई----सिला॑यसिला॑यसिला॑य--सिलाई, सेबोसिलाईसिलाई--शिलाई, शिवणेंशिवणशिलाई--सिलाईसीवण, टांकोसिलाई--सेलाइसेलाइयेर टाँकसेलाइयेर टाँक--चिलाइ, सियनिगाँथनि, चिलनिचिलाई-खरच बा मजुरि--सिलाइ----कुट्टुकुट्टुकुट्टुकूलि--तैयल्तैयल्तैयर॒कूलि--तुन्नुक, तय्क्कुकतय्यल्तय्यलक्कूलि--हॊलियुविकॆहॊलिगॆहॊलिगॆ कूलि--
3129सिवायअव्यय----जो है या हो उसको छोड़कर।----छुट, बगैर, बाझों----सिवा----सिवाय, रॊस----सवाई, बगैर----शिवाय----सिवाय, बगर----अधिकन्तु, ता छड़ा----तदुपरि, उपरि, बाहिरे----बिना, ताछड़ा----तप्प, काक----तविर----कूटातॆ----बिट्टु----
3130सींचनासकारात्मक क्रिया----खेत या पेड़ पौधों में पानी देना।----सिंजणा----सींचना----सग द्युन----पाणी डि॒यणु----पाणी लावणें----सींचवुं----सेचनकरा, सेचा----जल सिंचन कर, पानी दि----सिंचिबा----नीरुपोयुट----नीर्पाय्च्च----ननय्कुक----नीरॆयुवुदु----
3131सीखनासकारात्मक क्रिया----किसी विषय या कला का ज्ञान प्राप्त करना, पढ़ना।----सिक्खना----सीखना----हॆछुन----सिखणु----शिकणें----शीखवुं, भणवुं----शेखा----शिक, पढ़----शिखिबा----नेर्चुकोनुट----कर्क----पठिक्कुक----कलियुवुदु----
3132सीधाविशेषणविशेषणविशेषण--जिस में टेढ़ापन या घुमाव न हो ;जिस में छलकपट न हो ;सरल, सुगम, आसान।--सिद्धासिद्धासिद्धा--सीधा----स्यॊदशॊदस॑हंल--सिधो----सरळनिष्कपटसुलभ--सीधुं, सरळनिष्कपटसुलभ--सोजा, एकटानासरल, अकपटसरल, सहज, सोजा--पोन, सरलखोला, निष्कपटसरल, सहज--सिधानिष्कपट, अकपटसरळ, सहज--नेरुगाअमायिकमुसुलभमु--नेरान, कोणलट॒ट॒कपडमट॒ट॒सुलबमान--वळविल्लात्त नेरॆकपटमिल्लात्तऎळुप्पमाय--नॆट्टगिरुवनिष्कपटसरळ, सुलभ--
3133सीनासकारात्मक क्रियापुंलिंग---सिलाई करना।छाती, वक्षस्थल।---सीउणासीना---सीना----सुवुनसीनु॑---सिबणुसीनो, छाती---शिवणेंछाती---सीववुंसीनो, छाती---सेलाई कराछाति, वक्षस्थल---सि, चिलाई करवुकु बक्षस्थल---सिंइबा, सिलाई करिबा----कुट्टुटरोम्मु---तैक्कमार्बु---तय्क्कुक, तुन्नुकनॆचु, मारु॒---हॊलियुवुदुऎदॆ, वक्षस्थल---
3134सीमास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---हद, सरहद (फ्रंटियर)।वह अंतिम हद जहाँ तक कोई बात हो सकती हो या होनी उचित हो, नियम या मर्यादा की हद (लिमिट)।---सीमा, हदहद---सरहदहद---सरहदहद---हद----सीमा, सरहद्दपरिसीमा---सीमा, हद, सरहदपरिसीमा---सीमा, प्रांतसीमा, अवधि, शेष---सीमा, दाँतिसीमा, शेष---सीमा----सरिहददुऍल्ल, मेर---ऎल्लैमुडिविडम्---अतिरुसीम---गडिमिति, ऎल्लॆ---
3135सीमितविशेषणविशेषण---सीमाओं से बंधा हुआ ;जिसका प्रभाव या विस्तार एक निश्चित सीमा के अंतर्गत हो।---सीमितसीमित---मेहदूद----मेहदूदं----महदूदु----मर्यादित, सीमितपरिमित---सीमितपरिमित---सीमित, परिमितसीमाबद्ध---सीमित, सीमाबद्धसीमार भिमरते थका---सीमित----परिमितमुपरिमितमु---ऎल्लैक्कुट्पट्टबरैयरु॒त्त---सीमितंक्लृप्तं---सीमितमितवाद---
3136सुंदरविशेषण----जो आंखों को अच्छा लगे, खूबसूरत।----सोहणा, सुंदर----हसीन----सँदर----सुंदरु----सुंदर----सुंदर----सुन्दर----सुन्दर, धुनीया----सुन्दर----सुंदरमु, अंदमु----अऴगान----सुंदरं----सुन्दर, अंदवाद----
3137सुखपुंलिंग----वह अनुभूति जो तन मन को भाए, चैन, आराम।----सुख----सुख----सॅख----सुखु----सुख----सुख----सुख----सुख, आराम----सुख----सुखमु----सुगम् मनमगिऴ्च्चि, सौकरियम्----सुखं----सुख----
3138सुख-सुविधास्त्रीलिंग----ऐसी चीजें जिनके होने पर मनुष्य सुखपूर्वक जीवन बिता सके।----सुख-सौख----आसाइश----स॑ख तु॑ आराम----सुखु-आराम----सुख-सोय----सुख-सगवड----सुख-स्वाच्छन्द्य----सुख-सुविधा----सुख-सुविधा----सौकर्यमु----सौकरियंगळ्, वाळ्क्कै-वशादिगळ्----सुख-सौकर्यङ्ङळ्----सुखोपकरणगळु----
3139सुगंधस्त्रीलिंग----अच्छी गंध, खुशबू, प्रिय महक।----सुगंध----ख़ुशबू----खॅशबू----सुग़॒धि, खुशबू----सुवास, सुगंध----सुगंध, खुशबो----सुगन्ध----सुगन्ध, सुबास----सुगंध----सुवासन, सुगंधमु----नरु॒मणम्----सुगन्धं----परिमळ----
3140सुगमविशेषणविशेषण---सहज में आने या पाने योग्य ;आसान, सरल।---सुगम----सह्ल----आसान----आसानुसवलो---सुगमसोपे, सुलभ---सुगम, सरलसहेलुं---सुगम, सहज-लक्ष्यसहज, आसान---सुगम, सहज-लभ्यसहज, सरल---सुगम, सहज-लभ्यसरळ---सुगम्यमुसुलभमु---सुळबमागप्-पॆर॒क्कूडियऍळिदान---सुगमंऎळुप्पमुळ्ळ---सहजवागिसिगुवसुलभ---
3141सुघड़विशेषणविशेषण---जिसकी बनावट सुन्दर हो, सुडौल ;कुशल, निपुण, होशियार।---सुग्घड़----सुडोल (ख़ुशवज़्अ़)सलीक़ामंद---डोलदारमा॑हिर---ठाहूको, डौलाइतोसुघुडु, भड़ु---रेखीव, डौलदारकुशल, निपुण---सुघडचतुर, विवेकी---सुडोल, सुगठितकुशल, निपुण---सुगढ़ी, सुढामनिपुण, पाकैत---सुघट, सुढ़ळ, सुंदर----सोंपयिन चक्कनि----अऴ्गानशमर्त्तन---वटिवॊत्तसामर्थ्यमुळ्ळ---अंदवाद, चॆलुवादकुशल, बुद्धिवंत---
3142सुचारुविशेषण----अत्यंत सुंदर, मनोहर, बहुत खूबसूरत।----सुचज्जा----अह्सन----स्यठाह सँदर----सुहिणो, सुंदरु----मनोहर----सुचारु, मनोहर----सुचारु, अति सुंदर, मनोहर----अति सुंदर, मनोहर----सुचारु----रम्यययिन----मिग अऴगान----सुचारु, सुन्दरं----अत्यंत सुन्दर----
3143सुझावपुंलिंगपुंलिंग---सुझाने की क्रिया या भाव ;वह नई बात जो किसी को सुझाई गई हो या जिसकी ओर ध्यान आकृष्ट किया गया हो (सजेस्चन)।---सुझाउसुझाउ---राए----मशव॑रु॑मशव॑रु॑---रिथा, रिथसलाह---सूचना, योजनासूचना---सूचनसूचना---परामर्श-दानइङिगत वा संकेत, मतामत, वातलानो---सोंबरण, उपस्थापनपरामर्श, दिहा, उपदेश---ब्यंजना (व्यंजना)परामर्श, प्रस्ताब---सलहासूचन---योशनै, शूचनेकुरि॒प्पाग सॊल्लप्पट्ट विषयम्---पर॒ञ्ञुकोटुक्कल्अभिप्रायं---तिळिसुविकॆसलहॆ---
3144सुडौलविशेषण----सुंदर डीलडौल या आकार वाला।----सुडौल----सुडोल----सॅडोल----सुडोलु, ठाहूको----डौलदार, रेखीव----सुडोल----सुडौल/सुडोल----सुगढ़ी, सुढाम----सुढ़ळ----तीर्चि दिद्दिन----अळगान उडलमैप्पुळ्ळ----नल्ल आकृतियलुळ्ळ, सुन्दरं, वटिवॊत्त----सुंदराकारद----
3145सुध-बुधस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---होश-हवास, चेत ;याद।---सुध-बुध----होशोहवासयाद---सॊद बॊदहोश हवास---सुधि-बुधियादिगीरी---शुद्ध बुद्धआठवण---सूध-बूध, होशयादगिरि---चेतना शक्ति, संज्ञास्मृति शक्ति---संज्ञा, चेतना, ज्ञानस्मृति, स्मरण---चेता, होश, संज्ञास्मृति, स्मरण, शक्ति---स्पृहऍरुक---उणर्वुळ्ळ निलैञाबगम्---वोधंओर्म्म---प्रज्ञॆनॆन्पु---
3146सुधास्त्रीलिंग----अमृत, पीयूष।----अम्रित----आबेहयात----अमर्यथ----अमृतु----अमृत, सुधा----सुधा, अमृत----सुधा, अमृत----सुधा, अमृत----सुधा, अमृत, पीयूष----सुध, अमृतमु----अमिर्दम्, अमुदम्----अमृतं, सुध----अमृत----
3147सुधारपुंलिंगपुंलिंग---दोष को दूर करने या होने का भाव (इम्प्रूवमेंट)।वह कांट-छांट जो किसी रचना को अच्छा रूप देने के लिए की जाती है (मॉडिफिकेशन)।---सुधारसुधार---इस्लाह----सुदारशेरु॑च़ा॑र---सुधारु, सुधारो----सुधारणासुधारणा---सुधारफेरफार---शुधरा, दोष-त्रुटि दूर करा वा हओयासंशोधन---संशेधन, शुधरणिसंशोधन---संधारिबा, संशोधन, सुधुरिबासंशोधन---संस्कारमुमार्पु, परिणति---शीर्-तिरुत्तम्तिरुत्तल्---परिष्कारं, मॆच्चप्पॆटुत्तल्नन्नाक्कल्---सुधारणॆतिद्दुपडि---
3148सुधीरविशेषण----बहुत धैर्यवान, जिसमें यथेष्ट धैर्य हो।----धीरा----मुतहम्मिल----हा॑सलु॑मन्द----धीरजवानु----धैर्यवान----सुधीर----सुधीर----धीर, सुधीर----सुधीर----धीरुडु----दैरियशालि----सुधीरन्, धीरन्----ताळ्मॆयुळ्ळ----
3149सुननासकारात्मक क्रिया----कानों से शब्द या ध्वनि ग्रहण करना।----सुणना----सुनना----बोजुन----बधणु, सुणणु----ऐकणें----संणवुं----शोना----शुन----शुणिवा----विनुट----कदाल् केट्क, मनदिल् वागिक्कोळ्ळ----केळ्क्कुक----केळुबुदु----
3150सुनहरा (सुनहला)विशेषण----सोने के रंग का।----सुनहिरा----सुनेहरा----सॅनुहर्य----सोनहरी----सोनेरी----सोनेरी----सोनाली----सोणाली रं----सुनेली----पसिडि, मेलिमि----तंग निर॒मान----स्वर्ण वर्णमाय, पॊन्निर॒मुळ्ळ----हॊंबण्णद----
3151सुबोधविशेषण----जो आसानी से समझ आ जाए, सरल और बोधगम्य।----सुबोध----आसान फ़ह्म----आसान, स॑ह॑ल----सवलो, आसानु, आसानीअ सां समुझ में अचण जहिड़ो----सुबोध----सुबोध, सरळ----सुबोध, बोधगम्य----सुबोध, सहजे बुजिपोबा----सुबोध, बोधगम्य----बोधपड़ु----ऎळिदिल्, पुरिन्दुकोळ्ळ त्तक्क----बोधगम्यं----सुलभ----
3152सुमतिस्त्रीलिंग----अच्छी मति या बुद्धि।----सुमत----अ़क़्ले सलीम----स॑च़बॅद----सुठी मति----सुमति----सुमति, सद्बुद्धि----सुमति----सुमति, सुबुद्धि----सुमति----सुमति, सद्बुद्धि----नल्ल अरिवु----सद्बुद्धि----सुबुद्धि----
3153सुमनपुंलिंग----पुष्प, फूल।----फुल्ल----फूल (गुल)----पोश----गुलु, पुष्पु----फूल, सुमन----सुमन, पुष्प----फुल, सुमन----फुल----फुल, सुमन, पुष्प----सुमनमु, पुव्वु----पू, मलर्----पुष्पं पूवु----हूवु----
3154सुरंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---जमीन खोद कर उसके नीचे बनाया हुआ रास्ता (टनल);जमीन या समुद्र के नीचे बारूद की सहायता से बिछाया गया जाल अदि जिससे व्यक्ति या जहाज नष्ट हो जाते हैं (माइन)।---सुरंगसुरंग---सुरंग----श्रॊंगसुरंग---सुरंग----बोगदामाइन---बोगदुसुरंग---सुड़ङ्ग/सुरङ्गखनि, शत्रुर दुर्ग जाहाज प्रभृति उड़ाइया देओयार जन्यगर्त-मध्ये समुद्रवक्षे वा अनुरूप स्थाने रक्षित विस्फोटक द्रव्यविशेष, माइन---सुरंगमाइन बिस्फोटक---सुड़गसमुद्रांत बारूद जाल, माइन---सोरंगमुगनि---सुरंगप्पादैकण्णि वेडि---तुरङ्कंखनि---सुरंगसिडिमद्दिनजाल---
3155सुरपुंलिंगपुंलिंग---गले, बाजे आदि से निकलने वाला स्वर ;देवता।---सुरसुर---सुर (नग्म़ा)देवता---सॅरदिवताह---सुरुदेवता---स्वर, सूरदेव, सुर---सूर, स्वरदेव---सुरदेवता---सुर, स्वरसुर, देवता---सुर, स्वरदेवता---स्वरमुसुरुलु, देवतलु---स्वरम्देवर्गळ्---स्वरंदेवन्, सुरन्---स्वरदेवतॆ---
3156सुरक्षास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सम्यक, समुचित रक्षा ;आक्रमण, आघात आदि से बचने के लिए किया जाने वाला प्रबन्ध।---सुरखिआसुरखिआ---सलामतीदिफ़ाअ़ (तहफ़्फ्रुज़)---ह्याफाज़तह्यफाज़त---सलामती, बचाउरक्षा---संरक्षणसंरक्षण, व्यवस्था---संरक्षणसंरक्षण, व्यवस्था---सुर॒क्षा (रक्ख)आक्रमणादि हइते वाँचार व्यवस्था---सुरक्षा, संरक्षणरक्षणावेक्षण---सुरख्या----रक्षणभद्रत---पादुकाप्पुपादुकाप्पुएर्पाडु---सुरक्षप्रतिरोधं, राज्यरक्ष---सुरक्षॆसुरक्षॆय सिद्धतॆ---
3157सुरभिस्त्रीलिंग----सुगंध, खुशबू।----खुशबो----ख़ुशबू----खॅशबू----ख़ुशबू----सगंध, सुरभि----सुरभि, सुगंध----सुरभि सुगन्धि, सुवास----सुरभि, सुबास, सुगन्ध----सुरभि, सुबास, सुगंध----सुरभि, सुवासन----नरु॒मणम्----सुगन्धं, सौरभ्यं----परिमळ----
3158सुरमापुंलिंग----एक खनिज पदार्थ जिसका बारीक चूर्ण आंखों में अंजन की तरह लगाया जाता है।----सुरमा----सुर्मा----सॅरमु॑----सुरिमो----सुरमा----सुरमो----रसाञ्जन-चूर्ण, काजल----चुर्मा, चुरुमा चकुत लगोवा अंजन----सुरमा, सुर्मिि----सुर्मा काटुक----कण्-मै----सुरु॒म----काडिगॆ----
3159सुराहीस्त्रीलिंग----जल आदि रखने का मिट्टी का पात्र जिसका नीचे का भाग लोटे की तरह गोल और ऊपर का भाग लम्बे चोगे या नल की तरह होता है।----सुराही----सुराही----सुरय----सुराही, घुधी----सुरई----सुराही----सोराइ, कुँजा----चुराइ----सोरेइ----कूजा----कूजा----कूज----मण्णिन हूजि----
3160सुलगनाअकारात्मक क्रिया----इस प्रकार जलना कि उसमें से लपट न निकले, बल्कि धुंआ निकले, धीरे-धीरे जलना।----धुखणा, सुलगणा----सुलगना----सॊत-सॊत दजुन----दुखणु----पेटणें----सळगवुं, बळवुं----प्रज्व॒लित हओया (ज्जो)----उमि उमि ज्वल----(निंआ) कुहुळिबा----राजुट----ती मूळ----मङ्ङि कत्तुक----हॊत्तिकॊळ्ळुवुदु----
3161सुलझनाअकारात्मक क्रिया----उलझनों से मुक्त होना, किसी समस्या अथवा उलझी हुई डोर आदि की पेचीदगी का दूर होना।----सुलझना----सुलझना----खुरन॑रुन----सुलिझणु, मोंझारो लहणु----उलगडणें----ऊकलवुं----समाधा हओया----समाधान----समस्यायुक्त हेबा, संशय-मुक्त हेबा----चिक्कुविडुट, चिक्कुविडुट तीरुट----शिक्कल् नींग----कुरुक्कऴियुक----बगॆहरियुवुदु----
3162सुलभविशेषण----जो आसानी से मिल जाए।----सुलब्भ----सहलुल हुसूल----आसा॑नी सान मेलुन----सुलभु, जेको आसानीअ सां मिली सघे----सुलभ----सुलभ----सुलभ----सुलभ----सुलभ----सुलभमु----ऎळिदाग किडैक्किर----सुलभं----सुलभ्य----
3163सुवासस्त्रीलिंग----अच्छी महक, खुशबू, सुगन्ध।----महक----ख़ुशबू----सॅगंद, खॅशबू----खुशबू----सुगंध, सुवास----सुवास, सुगंधी----सुवास, सुगन्ध----सुबास, सुगन्ध----सुबास----सुवासन----वासनै नरु॒मणम्----सुगंधं----सुवासनॆ----
3164सुविधास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---आसानी ;आराम।---सौख----आसानीआसाइश---आसॊनीसुहूलियथ---आसानी, सहूलियतआरामु---सोयआराम---सुविधा, सगवडआराम---सहजसुख-स्वाच्छन्दय, सुविधा---सुबिधा, सुयोगआराम---सुबिधा----सुलुवुवसति---सुलबम्वशदि---सौकर्यंसौकर्यं---सौकर्यसुख---
3165सुसज्जितविशेषण----भली-भांति सजा या सजाया हुआ।----सज्जिआ----आरास्ता----शूबिदार----सींगार्यलु----सजलेला, सुसज्जित----सुसज्जित----साजानो, सुसज्जित----सुसज्जित, सज्जित----सुसज्जित----अलंकरिंचबडिन----नन्गु अलंगरिक्कप्पट्ट----समलंकृतं----सुसज्जित----
3166सुस्तानाअकारात्मक क्रिया----थकावट दूर करना, थोड़ी देर के लिए आराम करना।----सुसताउणा----सुस्ताना----थख कडुन----साहु पटणु----विश्रान्ति घेणें----आराम करवो----जिरानो----जिरा, जिरणिल, भागरमार----क्ळाति दूरकरिबा विश्राम करिबा----विश्रांति तीसिकोनुट विश्रमिंचुट----इळैप्पार॒----विश्रामिक्कुक----विश्रामगॊळ्ळुवुदु----
3167सुहागपुंलिंगपुंलिंग---विवाहिता स्त्री की वह स्थिति जिसमें उसका पति जीवित हो, सौभाग्य ;विवाह के समय कन्यापक्ष में गाए जाने वाले मांगलिक गीत।---सुहागसुहाग---सुहाग----ड्यकुबजरखांदर बो॑थ---सुहागुसुहाग॒ जो गीतु लाडो॒---सौभाग्यमंगळगीत---सधवावस्थामंगळगीत---सौभाग्यविवाहोत्सवे माङ्गलिक गानविशेष---सुहाग, सधवा अवस्थाबियार मांगलिकगीत, बियानाम---सुहाग, सधबापण, सौभाग्यबिबाह कालीन कन्यापक्षीय मांगळिक गीत---अयिदवतनमु, सौभाग्यमुवेडुक पाटलु---कणवनुडन, मगिळ्च्चियान वाऴुम् निळैतिरुमणत्तिल् पाडप्पडुम पाट्टु---मंगल्यंकल्याणप्पाट्टु, ऒप्पनप्पाट्टु---सौभाग्यमंगळगीतॆ---
3168सुहागापुंलिंग----एक क्षार द्रव्य जो सोना गलाने और दवा के काम आता है (बोरेक्स)।----सुहागा----सुहागा----वावथ----सुहागो, कंगणखारु----टांकणखार----टंकणखार----सोहागा----सुवगा----एक क्षर द्रव्य जाहा सुनातर-ळाइबारे लागे, (सोहागा)----वेलिगारमु----बोरैक्स्----पोन्कारं----बिळिगार----
3169सूक्ष्मदर्शीविशेषण----बारीकी से देखने वाला।----सूखमदरशी----बारीकबीं----बा॑रीकबीन----दूरदिशु----सूक्ष्मदर्शी----सूक्ष्मदर्शी----विचक्षण, सूक्ष्मदर्शी----सूक्ष्मदर्शी----सूख्यमदर्शी----सूक्ष्मदर्शि----कुर्मैयागपार्प्पवन्----सूक्ष्मदृक्----अत्यंत मेधावि----
3170सूखाविशेषणविशेषण---शुष्क, निर्जल ;"

जिसमें सरसता, भावुकता आदि कोमल गुणों का अभाव हो।" || - || - || - || सुक्का || शुशक || - || - || - || ख़ुश्क || - || - || - || - || हॊख || ख़शिख || - || - || - || खुश्कु || - || - || - || - || शुष्क, कोरडा || रुक्ष, नीरस || - || - || - || शुष्क, लूखुं || - || - || - || - || शुखा, शुका || नीरस, शुकनो || - || - || - || शुकान, नीरस || कर्कश, रुक्ष || - || - || - || शुखा, शुष्क || नीरस, रुख्य || - || - || - || शुष्कमु || एण्डिपोयिन || - || - || - || उलर्न्द || सत्तट॒ट॒ || - || - || - || उणक्क, वरण्ट || विरसन् || - || - || - || ऒणगिद || नीरस || - || - || -

3171सूचनास्त्रीलिंग----कुछ बताने या जताने के लिए कही या लिखी गई बात, इत्तिला।----सूचना----इत्तिलाअ़----खबर----सूचना----सूचना----सूचना, चेतवणी----सूचना----सूचना, जाननी, गोहारि----सूचना----गमनिक----अरि॒विप्पु----अरि॒यिप्पु----सूचनॆ----
3172सूचीस्त्रीलिंग----किसी प्रकार की वस्तुओं, नामों, बातों आदि का क्रमबद्ध लेखा या विवरण।----सूची----फ़ेहरिस्त----फिहरिस्त----सूची, लिस्ट, फहिरिस्त----अनुक्रमणिका, सूची----सूची----सूची, तालिका----सूची, तालिका----सूची----जाबिता----पट्टियल, जापिता----पट्टिक, सूचिक----सूचीपत्र----
3173सूजनाअकारात्मक क्रिया----रोग, चोट, वात आदि के कारण शरीर के किसी अंग का अधिक फूल या फैल जना।----सुज्जणा----सूजना----वरु॑म खसुन, हु॑नुन----सुज॒णु----सुजणें----सूजवुं----फुला, फोला----फिक, उरवह, ओफन्द----फुलिबा----वाचुट----वींग----वीर्कुक, वीङ्डुक----ऊदुदुदु----
3174सूझनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---दिमाग या ध्यान में आना ;दृष्टि में आना, दिखाई देना।---सुज्झणा----सूझना----खयाल युनद्यमागस मंज़ युन---सुझणु----सुचणेंदिसणे---सूझवुं, नजरे पडवुं----मने पड़ादेखा याओया दृष्टिगोचर हओया---मनत खेलाचकुत पर, दृष्टिगोचर ह---ध्यान रे आसिबा, मने पकाइबादृष्टि रे आसिबा देखा-देबा, दृष्टि-गोचर---तट्टुटतोचुट---मनदिल तोन्र॒तॆन्पड---तोन्नुकतोन्नुक---तोचुवुदुगोचर वागुवुदु---
3175सूत्रपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--पतला और महीन डोरा या तागा;गूढ़ अर्थ से युत्त संक्षिप्त वाक्य या पद;संकेत, पता सुराग।--सूतरसूतरसूह--सूतइमारती कलिमासूराग़--सु॑थु॑रछ़ॊटकथपय--सुटुसूत्रुहलु, निशानु, पतो, सगु--सुत, धागा, दोरा, सुत्रसूत्रसंकेत--सूत्र, दोरोसूत्रसंकेत--सूता/सुता/सुतोगूढ़ार्थ युक्त संक्षिप्त वाक्य वा पदसंकेत, सूत्र--सूतासूत्रसंकेत, इंगित--सूत्र----सूत्रमुसूत्रमुसूत्रमु--नूल्सूत्तिरम्अडैयाळम्--नूल्, चरटुसूत्रंप्रभाव स्थानं--दार, नूलुसूत्रसंकेत, पत्तॆ--
3176सूदपुंलिंग----ब्याज।----सूद----सूद----सूद----व्याजु----ब्याज----ब्याज----सुद----सुत, सुद----सुध----वड्डी----वड्डि----पलिश----वड्डि----
3177सूनाविशेषण----जनहीन, निर्जन।----उजाड़, सुन्ना----वीरान----शिन्याह----सुञो, सुन्सानु----ओसाड, सुने----सूनुं, उज्जड----निर्जन, जनसुन्य, निभृत----जनप्राणी हीन----शुन्य, निर्जन----शून्यमु----मनिद नडमाट्ट मिल्लाद----शुन्यमान, ऒळिञ्ञ----निर्जन----
3178सूराखपुंलिंग----छेद, छिद्र।----छेक----सूराख----गॊद, जॊद----सोराखु, टुंगु----भोक, छिद्र----छद, छिद्र----छेंदा, फुटो----छिद्र, फाँक----छिद्र----रंध्रमु----दुवारम्, तॊळै----ओट्ट, द्वारं----ततु, छिद्र----
3179सूर्यपुंलिंग----सौर जगत का सबसे उज्जवल और मुख्य ग्रह, जिसकी अन्य सब ग्रह परिक्रमा करते हैं और जिससे सब ग्रहों को ताप तथा प्रकाश प्राप्त होता है, रवि।----सूरज----सूरज----सिरियि, अफताब----सिजु----सूर्य----सूर्य, सूरज----सूर्य (ज)----बेलि----सूर्ज्य----सूर्युडु----सूरियन्----सूर्यन्----सूर्य----
3180सृजनपुंलिंग----सृष्टि करने अर्थात जन्म देने की क्रिया या भाव, रचना।----सिरजन----तख़्लीक़ (तक्वीन)----शुरुन, बनावुन----सिर्ज, रचना----सृजन----सर्जन, सृजन----सृजन----स्रजन, रचना----सृजन----सृष्टि----उंडाक्कुदल्, आक्कल्----सृष्टि, सर्ज्जनं----सृष्टि----
3181सृष्टिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---सारा विश्व तथा इसके सभी प्राणी एवं पदार्थ;निर्माण, रचना।---स्त्रिशटीरचना---ख़िल्क़त----थ्यथ----सृष्टी----सृष्टिसृजन, निर्माण---सृष्टिसृजन, निर्माण---सृष्टिसृजन, निर्माण---सृष्टि, ब्रह्माण्डसृष्टि, रचना, स्रजन---सृष्टि, ब्रह्माण्डसृजन---सृष्टिसृष्टि---पडैप्पुआक्कल्---सृष्टिसृष्टि---जगत्तुसृष्टि---
3182सेंकनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---आंच के पास या आग पर रख कर गरम करना अथवा पकाना;शरीर को गरमी या धूप देना।---सेकणा----सेंकना----ब॑दरावुनटका॑रु क॑रु॑न्य---सेकणु----भाजणें, शिजवणेंशेकणें---शेकवुं----सेका/सेंकारोद पोयानो---सेंक, भापत दि, तपता, सिजा(गात) सेंक दि---सेकिबा----वेयिंचुट, काल्चुटकापटपेटटुट काचुट---कुळिर् कायऒत्तडम् कोडुकक---चुटाक्कुककायुक---बिसिमाडुवुदुकावु कॊडुवुदु, कायुवुदु---
3183सेठपुंलिंग----बहुत धनवान या संपन्न व्यक्ति।----सेठ----सेठ----सेठ----सेठि----शेठ----शेठ, शाहुकार----धनी लोक----शैठ, धनी लोक----शेठ----सेट्टि, श्रेष्ठि----दनवान्, शेल्वन्द्न्----सेट्टु----साहुकार, शॆट्टि----
3184सेतुपुंलिंग----नदी आदि पार करने के लिए बनाया हुआ रास्ता, पुल।----पुल----पुल----कदु॑ल, सॊथ----पुलि----सेतु, पुल----सुतु, पुल----सेतु, सॉको, पुल----सेतु, दलं----सेतु----सेतुवु, वंतेन----पालम्----पालं----सेतुवॆ----
3185सेनास्त्रीलिंग----रण-शिक्षा प्राप्त सशस्त्र व्यक्तियों का दल, फौज।----सैना----फ़ौज (लश्कर)----फोज----सेना, फ़ौज----सेना, सैन्य----सेना----सेना, सैन्यदल----सेना, सैन्य----सेना----सैन्यमु----सेनै, पडै----सैन्यं, सेन----सैन्य----
3186सेनापतिपुंलिंग----सेना का नायक, फौज का अफ़सर।----सैनापति----सिपाहसालार----सिपाहसालार----सेनापती----सेनापति----सेनापति----सेनापति----सेनापति----सेनापति----सेनापति----सेनापति, पडैत्तलैवर्----सेनापति, सेनानायकन्----सेनापति----
3187सेवास्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--परिचर्या, टहल ;नौकरी ;पूजा, आराधना।--सेवानौकरीसेवा--ख़िदमत----सीवाख॑दमथ---सेवा/शेवानौकरीपूजा॒, शेवा--सेवा, परिचर्यानोकरीपूजा, आराधना--सेवाचाकरीपूजा--सेवा, परिचर्या॒, (ज)चाकरिपूजा, आराधना--सेवा, परिचर्याचाकरिसेवा, पूजा--सेबा, टहलचाकिरिसेबा, पूजा, आरधना--सेव, परिचर्यउद्योगमुकैकर्यमु, अर्चन--तॊण्डुशेवगम्आरादनै, वऴिपाडु--सेवनंजोलिसेव--सेवॆनौकरिपूजॆ--
3188सैकड़ापुंलिंग----सौ, शत की संख्या का सूचक जो इस (100) प्रकार लिखा जाता है।----सैंकड़ा----सैंकड़ा----हथ, शथ----सउ (100)----शेकडा----सैकडो----शतकरा----100, एश बुजोवा संख्या----शतकडा----शतमानमु, शातमु, शति, वंद----नूरु॒----नूरु॒----नूरु----
3189सैनिकविशेषणपुंलिंग---सेना-संबंधी, सेना का।सेना या फौज का सिपाही, फौजी।---सैनिकसैनिक---फ़ौजी----फूजी----सेना सां वास्तेदारुसैनकु---सैन्यासंबंधीसैनिक---सैनिकसंबंधीसैनिक---सेना सम्बन्धीय, सामरिकसैनिक, सेपाई---सेना संबंधीयसैनिक, सेना---सैनिक, सिपाहि----सैन्य, संबंधमुसैनिकुडु---सॆनै संबन्दमानशिप्पाय---सैनिकंपटयाळि, सैनिकन्---सेनॆयसैनिक---
3190सैरस्त्रीलिंग----मनोरंजन के लिए घूमना-फिरना, भ्रमण।----सैल-सपाटा, सैर----सैर----सार॑----सैरु, सैलु/शैलु----सहल, फेर-फटका----सहेल----परिभ्रमण, बेड़ानो (न)----बिहार, विचरण----भ्रमण----षिकारु, वाह्यळि बिहारमु----उलावुदल्----विनोदयात्र, पर्यटनं----तिरुगाट----
3191सोचनाअकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---चिंता या फिक्र में पड़ना।किसी विषय पर मन में विचार करना, कल्पना करना या अनुमान करना।---सोचणासोचणा---सोचना----सोंचुन----सोचणु----काळजी वाटणें, विचार करणेविचार करणें---शोचवुं, विचारवुं----चिन्तित हओयाचिंता करा, स्मरण॒ (न) कल्पना वा विचार करा---चिन्तित ह, चिन्तात परचिन्ता कर, बिबेचना कर---भाबिबा, चिन्तबा----आलोचिंचुटआलोचिंचुट---कवलैप्पडयोचिक्क---विचारिक्कुक----योचिसुवुदुचिंतनॆ माडुवुदु, ऊहिसुवुदु---
3192सोनापुंलिंगअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--स्वर्ण, कांचन।निद्रागस्त होना, नींद लेना ;एक ही स्थिति में रहने के कारण सुन्न होना।--सोनासोनासोणा--सोनासोना---सॅनशंगुन---सोनुसुम्हणु---साने, स्वर्णझोपणेंबधिर होणे--सोनुं, स्वर्णसूवुंबहेराधपु--स्वर्ण, सोनाघुमानो(अंग) झिमझिम करा, अवशता बोध--सोणशो, शयन करसारसुर नो होवा ह--सुना, स्वर्ण----बंगारमुनिदुरिंचुटतिम्मिरेक्कुट--तंगम्तूंगमरत्तुप्पोग--स्वर्ण, पॊन्नुउर॒ङ्ङुकमरविक्कुक--चिन्ननिद्रिसुवुदुजोमुहिडियुवुदु--
3193सोपानपुंलिंग----सीढ़ी, जीना।----पौड़ी----ज़ीना (सीढ़ी)----हेर----डा॒कणि, डा॒को----शिडी, सोपान----सोपान, सीडी----सिंडि, सोपान----जखला, सोपान----सोपान, शिढ़ि, पाबन्छ, आरोहणी----सोपानमु, मेट्टु----मडिप्पडि----सोपानं----एणि, मॆट्टिलु----
3194सौंपनासकारात्मक क्रिया----(कोई वस्तु आदि) किसी के जिम्मे या सुपुर्द करना, किसी के अधिकार में देना।----सौंपणा----सौंपना----हवालु॑ करुन----सौंपणु----सोपविणें----सोंपवुं----समर्पण् करा उत्सर्ग करा (न)----सँप, न्यस्त कर, गँटाई दि----न्यासरूपे देबा, समर्पिबा----अप्पगिंचुट----ऒप्पडैक्क----एल्पिक्कुक----ऒप्पिसुवुदु----
3195सौजन्यपुंलिंग----भलमनसत, सज्जनता।----सज्जणता, साऊपुणा, भलमाणसी----शराफ़त----शराफथ----भलामानसाइ----सौजन्य----सौजन्य----सौजन्य, भद्रता, शिष्टाचार----सौजन्य, सज्जनता, शिष्टता----सौजन्य----सौजन्यमु----इनिय इयल्बु----सन्मनस्सु----सौजन्य----
3196सौतेलाविशेषणविशेषण---सौत अथवा सपत्नी संबंधी ;सौत से उत्पन्न।---मतेआ, मत्रेआमतेआ, मत्रेआ---सौतेला----वोरु॑----माटेलो----सावत्रसावत्र---शोकनुं, शेका संबंधीसावकुं---सत्, सतिन-सम्पर्कितसौभाग्य सपत्नी-जात---सपत्नी सम्बन्धीयसँतीया---सपत्नी संबंधी----सवतिसवति---माट॒टा॒न्तायिन्माट्रान्तायक्कुप् पिर॒न्द---वैमात्रेय----सवतियसवतियिंद हुट्टिद---
3197सौभाग्यपुंलिंगपुंलिंग---अच्छा भाग्य, अच्छी किस्म्त ;सुहाग।---सुभागसुहाग---खुश़क़िस्मतीसुहाग---खॅश कु॑स्मती----सभागु, सुठो भागुसुहागु---सुदैवसौभाग्य---सौभाग्य, सारुंभाग्यसधवावस्था---सौभाग्य, अनुकूल भाग्यसौभाग्य---सौभाग्यसुहाग---सौभाग्य----अदृष्टमुसौभाग्यमु---नल्लदिरुष्टम्कणवनुडन् संदोषमान वाऴवु---सौभाग्यंमंगल्यं---अदृष्टमुत्तैदेंतन---
3198स्तंभपुंलिंगपुंलिंग---खंभा।पत्र-पत्रिका आदि में ऐसे विभाग जिनमें किसी विशेष विषय का प्रतिपादन अथवा निरूपण होता है।---खंबाकालम---सुतूनकालम---कूट, थंमकालम---थंमोकालमु---खांब, स्तंभविभाग, कॉलम---स्तभ, थाभलो, टेकोकटार, वर्तमान पत्रनुं कोलम---स्तंभ, थामखाम्भ, सम्बादपत्रेर विभाग---स्तम्भ, सुँटास्तम्भ, शितान---स्तम्भ----स्तंभमुकालम्---तूण्, कंबम्पत्तिरिगैयिन् पगुदि---तुणुपंक्ति, कोळम्---कंबकालम्---
3199स्तब्धविशेषण----जड़ीभूत, निश्चेष्ट, हक्का-बक्का।----हक्का-बक्का----मब्हूत----हय बुंगु॑----वाइड़ो, हैरत में पियलु----स्तब्ध, निश्चेष्ट----स्थब्ध, दिङमूढ़, निश्चेष्ट, स्तंभित----स्तब्ध, जड़, निस्पन्द, हतवाक----स्तब्ध, निश्चल----स्तब्ध----स्तब्धुडु----तिगैप्पडैन्द, बिरमित्त----स्तब्धं----जडवत् आद----
3200स्तुतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---आदर भाव से किसी के गुणों के कथन करने का भाव, बड़ाई, तारीफ ;वह पद या रचना जिसमें किसी देवता आदि के गुण का बखान हो, स्तोत्र।---उसततसतोतर---तारीफ़हम्द (सना)---तॅतापूज़ाह, तॅता---तारीफ़, साराहस्तुती---स्तुति, प्रशंसास्तोत्र---स्तुति, गुणगान, तारीफ, बखाणस्तोत्र, देव देवीनी स्तुति, प्रार्थना---प्रशंसा, सुख्यातिस्तुति, स्तोत्र---स्तुति, प्रशंसा, बखानस्तोत्र, भटिमा---स्तुति----स्तुतिस्तोत्रमु---तुदित्तल्तोत्तिरम्, पाशुरम्---स्तुति, प्रशंसस्तोत्रं---हॊगळिकॆस्तुति---
3201स्तोत्रपुंलिंग----वह रचना, विशेषत: पद्बद्ध रचना जिसमें किसी देवता आदि की स्तुति हो, स्तव, स्तुति।----सतोतर----हम्द----सुतोंत्र, हमुद----स्तोत्रु, महिमा जो गीतु----स्तवन, स्तोत्र----स्तोत्र, स्तवन----स्तोत्र, स्तव----स्त्रेत, स्तब स्तुति----स्तोत्र----स्तोत्रमु----तोत्तिरम तुदिपाडल्----स्तोत्रं----स्तोत्र, देवर नाम----
3202स्त्रीपुंलिंगस्त्रीलिंग---मनुष्य जाति की क्यस्क मादा, पुरुष का विपर्याय ;पत्नी, जोरू।---इसत्रीइसत्री---औ़रत----ज़नानु॑आशॆन्य---स्त्री, औरतज़ाल---स्त्रीपत्नी, बायको---स्त्री, ओरत बैरीपत्नी, बैथर, बहु---स्त्री, नारीपत्नी, बउ, स्त्री---स्त्री, तिरोता, माइकीपत्नी, धैनी---स्त्री----स्त्रीभार्य---मगळिरमनैवि---स्त्रीभार्य---हॆंगसुहॆंडति---
3203स्थगनपुंलिंग----सभा की बैठक, बात की सुनवाई या विचार अथवा कोई चलता हुआ काम कुछ समय के लिए रोक रखना।----मुलतवी----इल्तिवा----मुलत॑वी----महिमुली----तहकूबी, अडजर्नमेंट----मोकूफी, सभा मोकूफी----स्थगन, निवर्तन, क्षा॒न्ति (क्ख)----स्थगन, बन्धकार----स्थगन----आपुदल, वायिदा----ऒत्तिप्पोडल्----निर्त्तिवय्पु----मुंदूडूविकॆ----
3204स्थानपुंलिंगपुंलिंग---जगह, स्थल ;पद ओहदा।---थाँपद---मक़ाम----जायऒहदु॑---स्थानु, जग॒हदर्जो, उहिदो---स्थान, ठिकाण, स्थलपद, हुद्दा---स्थान, जगा, ठेकाणुं, स्थळ, रहेठाण, बेठक, आसनपदवी, दरज्जो---स्थान, जायगापद---स्थान, ठाइपद, पदबी---स्थानपद---स्थानमुपदवि---इडम्पदवि---स्थानंपदवि, स्थानं---जाग, स्थळहुद्दॆ, पदवि---
3205स्थानांतरणपुंलिंग----किसी वस्तु या व्यक्ति को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर पहुँचाना या भेजना, बदली, तबादला।----बदली, तबादला----तबादला----तबदीली----बदिली----बदली----बदली, स्थानांतर, स्थलांतर----बदलि, स्थानांतरण॒ (न)----स्थानांतर, बदलि----स्थानांतरण, बदलि----स्थलमुमापर्पु, बदिली----इडमाट॒ट॒म्----स्थलमाट॒ट॒म्----बदलि, वर्ग----
3206स्थानीयविशेषण----स्थान, विशेष का, मुकामी, स्थानिक।----सथानक----मक़ामी----मुका॑मी----मकानी----स्थानीय, स्थानिक----स्थानीय, स्थानिक----स्थानीय----स्थानीय----स्थानीय----स्थानीयकमु----उळ्ळूरै चेर्न्द----स्थलत्तुळ्ळ----स्थलीय----
3207स्थापनास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---स्थापित करने की क्रिया या भाव, स्थापन ;प्रतिपादन, निरूपण।---सथापणा, थापणासथापणा, थापणा---क़ियामइस्बात---कायिमीथापु॑ना--------स्थापनाप्रतिपादन, निरूपण---स्थापनाप्रतिपदान, निरूपण---स्थापन/स्थापनाप्रतिपादन, निरूपण॒ (न)---स्थापना, स्थापनप्रतिपादन, निरूपण---स्थापना----प्रतिष्ठापनमुप्रतिपादनमु---निरु॒वनम्निलैनाट्टल्---स्थापिक्कल्प्रतिपादनं---स्थापनॆनिरूपणॆ---
3208स्थायीविशेषणविशेषण---सदा स्थित रहने वाला, हमेशा बना रहने वाला, स्थिर, अटल, नियत ;टिकाऊ।---सथाईसथाई---मुस्तक़िल----मुस्तकु॑ल, रोजु॑वुनदरु॑वुन---पकोटिकाऊ---स्थायी, स्थिरटिकाऊ---स्थायी, स्थिर, कायमीटकाउ---स्थायी, स्थितिशील, स्थिर, अटलटेकसई, मजबुत---स्थायी, मित्यबहु दिन टिका, दिन यावा---स्थायी----खायमु, स्थिरमुनिलकडगल---शासुवदमान्, निलैयाननीडित्तुनिर्किर---स्थायियायउर॒प्पुळ्ळ---शाश्वतबाळिकॆ---
3209स्थितिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--दशा, हालत, अवस्था ;पद, मर्यादा आदि के विचार से समाज में स्थान ;किसी कार्य आदि की प्रगति की अवस्था, चरण।--सथितिसथितिसथिति--हालतहैसियतकैफ़ियत--हालथकू॑फियतहालथ--हालतिदर्जो, जाईहालति--दशा, अवस्था, स्थितिस्थानपरिस्थिति--स्थिति, दशा, अवस्थापद, दरज्जो, मर्य़ादापरिस्थिति, अवस्था, प्रगतिनुं चरण--स्थिति, अवस्था दशापद व मर्यादा हेतु समाज मध्ये प्राप्त प्रधान्यकार्यादिर अवस्था--दशा, अवस्थापदबी, मर्यादा, स्थानअवस्था, स्थिति, अवस्थिति--स्थिति----स्थितिहोदास्थिति--निलैमैसमूगत्तिल् किडैत्त इडम्निलै--स्थितिस्थानंनिलवारं, अवस्थ--स्थितिस्थानमट॒ट॒--
3210स्थिरविशेषणविशेषणविशेषण--अटल, निश्चल ;स्थायी ;धीर, शांत।--सथिर, थिरसथिर, थिरसथिर, थिर--साकिनमुस्तक़िलपुरसुकून--सा॑किन, थ्यर----अचलुदाइमुशांति, बिना हलचल--स्थिर, दृढ़, निश्चलस्थायीधीर, शांत--स्थिर, हालतुं चालतुं न होय तेवुं, दृढ़स्थायी, अटलधीर, शांत--स्थिर, अचलस्थायी, अक्ष॒य (क्ख)धीर, शान्त--स्थिर, अचलस्थायीधीर, स्थिर--स्थिर----स्थिरमुस्थिरमुस्थिरमु--अशैयादस्तिरमान, निलैयानअमैदियान--निश्चलंस्थिरंशांतं--निश्चलशाश्वतधीर--
3211स्नेहपुंलिंगपुंलिंग---प्रेमियों, हमजोलियों, बच्चों आदि के प्रति होनेवाला प्रेमभाव ;चिकना पदार्थ, चिकनाहट वाली चीज़।---पिआर, नेहुथिंधा---मुहब्बत (उंसीयत)दुहीन---श्रॆह----प्यारु, स्नेहु----प्रेम, स्नेहस्निग्ध पदार्थ---स्नेह, प्रेम, प्रीति, बहालचीकणों पदार्थ, तेल---प्रीति, प्रेम, भालवासातैल जातीय पदार्थ---प्रेम, प्रीति, चेनेह, स्नेहचर्बी, तेल्---स्नेहतैळ, चिकण---स्नेहमुस्नेहमु, तैलमु---अन्बुपळपळप्पान पॊरुळ्---स्नेहंकॊळुप्पु---स्नेहजिड्डु---
3212स्पंदनपुंलिंगपुंलिंग---धीने-धीरे हिलना या कांपना ;फकड़, प्रस्फुरण, गति।---कंबणीकंबणी---जुबिश (इर्तिआ़श)----थरु॑-थरु॑----सणिभी शइ----कंपन, स्पंदनप्रस्फुरण, गतिशीलता---स्पंदन, कंपस्फुरण---स्पंदन, कम्पनस्फुरण॒ गति (न)---स्पंदन, कँपनिगति, चलता---स्पंदन----स्पंदनमुस्पंदनमु---नडुक्कम्तुडिप्पु---स्पन्दनंतुटिक्कल्---अल्लाडुविकॆगतिशलतॆ, मिडियुवुकॆ---
3213स्पर्धास्त्रीलिंग----प्रतियोगिता आदि में किसी से होने वाली होड़।----बराबरी----रक़ाबत----मान-मान----चुरपुरि, हलचल----स्पर्धा, चढ़ाओढ़----स्पर्धा, हरीफाई----स्पर्धा, प्रतियोगिता----स्पर्द्धा, प्रतियोगिता----स्पर्धा----पोटी----पोट्टि----मत्सरं----स्पधॆ, पैपोटि----
3214स्पर्शपुंलिंगपुंलिंग--त्वचा का वह गुण जिससे छूने, दबने आदि का अनुभव होता है ;एक वस्तु के तल का दूसरी वस्तु के तल से सटना या छूना, संपर्क।---छोहछोह---लम्स----ज़ीर लगु॑न्य, छुहुनछिह---चटाभेटीहसदु, साड़ु---स्पर्शसंपर्क---स्पर्श, स्पर्शवुं, अडवुंतेसंसर्ग---स्पर्श, त्वगिन्द्रियग्राह्य गुण॒ (न)छोंया, ठेकाठेकि---स्पर्श, परशस्पर्श, संस्पर्श---स्पर्शस्पर्श, संपर्क---स्पर्शसंसर्गमु---तॊडुउणर्चितोडुदल्---स्पर्शंतॊटुक, संपर्क---स्पर्शसंसर्ग, सम्पर्क---
3215स्पष्टविशेषण----जिसे देखने, समझने, सुनने आदि में नाम मात्र भी कठिनता न हो, बिलकुल साफ।----सपशट----साफ़ (वाज़ेह)----वाज़ेह, साफ----साफु, चिटो----स्पष्ट----स्पष्ट----स्पष्ट, परिस्फुट, व्यक्त, प्रकाशित----स्पष्ट, ब्यक्त, परिष्कार----स्पष्ट, परिष्कार----स्पष्टमु----तॆळिवान----स्पष्टं----स्पष्ट----
3216स्फूर्तिस्त्रीलिंग----तेजी, फुर्ती।----फुरती----तेज़ी (फुर्ती)----ताकत, फुरती----फुड़िती, चुस्ती----स्फूति----स्फूर्ति (त्ति), तेजी----चटपट, तत्परता----बेग, तीब्रता, उलाह----स्फूर्ति----स्फूर्ति----उर्चागम् शुरु॒ शुरु॒प्पु----उत्साहं, चॊटि----वेग, स्फूर्ति----
3217स्मरणपुंलिंग----कोई बात फिर से याद आने की क्रिया या भाव, स्मृति, याद।----याद, सिमरन----याद----याद, सॅरुन----यादिगीरी, स्मरणु----स्मरण----स्मरण, याद, स्मृति, नाम जपवुते----स्म॒रण, स्मृति (सँ) (सिं)----स्मरण, स्मृति----स्मरण, स्मृति----स्मरणमु, ज्ञापकमु----निनैवु----स्मृति, ओर्म----नॆनपु----
3218स्मारकविशेषणपुंलिंग---स्मरण कराने वाला।स्मरण चिह्न, यादगार।---यादगार----याद अंगेज़यादगार---यादगार----यादि कंदड़ुयादिगारु---स्मरण करणारास्मारक---स्मारकस्मारक---स्मारक, स्मृतिकर, उद्बोधकस्मारक-चिह्न---स्मारकस्मृति-चिह्न---स्मारक----स्मारकमुज्ञापकार्थमु---निनैवु पडुत्तुगिर॒ञापगार्त्तम्---ओर्मिप्पिक्कुन्नस्मारकं---नॆनपु कॊडुववनुस्मारक---
3219स्मृतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग--स्मरण शक्ति ;याद, अनुस्मरण ;धर्म, आचार-व्यवहार आदि से संबंधित हिन्दू धर्मशास्त्र जिनकी रचना ऋषियों और मुनियों ने वेदों का स्मरण या चिंतन करके की थी।--हाफजा, सिमरतीसिमरतीसिमरती--हाफिजा (याददाश्त)यादस्मृति--यादाश्तयादस्मृति-ग्रंथ--यादिगीरीयादिस्मृति (धर्मी किताबु)--स्मृति, स्मरणशक्तिआठवणस्मृति, (शास्त्र)--स्मृति, स्मरणशक्तियादधर्मशास्त्र (प्रत्येक)--स्मारण शक्तिस्मृति अनुस्मरण॒ (न)स्मृति, शास्त्र--स्मृति, स्मरण शक्तिस्मरण, सोंवरणस्मृति (शास्त्र)--स्मृति----स्मरण शक्तिगुर्तुस्मृति--ञापग शक्तिनिनैवुहिन्दुसट्ट, तॊगुप्पु, स्मृति--ओर्म्मशक्तिओर्म्मस्मृति--ज्ञापक शक्तिनॆनपुस्मृति (ग्रन्थ)--
3220स्रष्टाविशेषणपुंलिंग---सृष्टि या रचना करने वाला, रचयिता, निर्माता।ब्रह्मा, सृष्टि का रचयिता।---सिरजनहारसिरजहार---ख़ालिक----बनावन वोल----सिर्जणहारुब्रह्मा---स्रष्टा, निर्माता, सृष्टि रचणाराब्रह्मा---स्रष्टा बनावनार, रचनारब्रह्मा, ईश्वर---स्रष्टा, निर्माताब्रह्मा, सृष्टिकर्ता---स्रष्टा, निर्माताब्रह्मा, बिधाता---स्रष्टा, बिधाताब्रह्मा, सृष्टिकर्ता---स्रष्टसृष्टिकर्त---शिरुष्टिकर्ता उण्डाक्कुबवरबिरम्म देवर्---स्रष्टावुब्रह्मावु---सृष्टिकर्तब्रह्म---
3221स्वचालितविशेषण----अपने आप चलने वाला, जिसके अंदर ऐसे कल-पुरजे लगे हों कि एक पुरजा चलाने से ही वह आपने आप चलने या कोई काम करने लगे।----स्वैचालत----ख़ुदकार----पानन चलन वोल, खॅदकार----खुदि हलदंडु, ओटोमेटिक----स्वयंचालित, ओटोमेटिक----स्वचालित----स्वयंचालित, स्वयक्रिय----स्वयंचालित, स्वयक्रिय----स्वयंचाळित----स्वचालितमु----ताने इयंगुगिर॒----स्वयं प्रवर्त्तिक्कुन्न----स्वयंचालित----
3222स्वजनपुंलिंगपुंलिंग---अपने परिवार के लोग, आत्मीय जन;सगे संबंधी, रिश्तेदार, बन्धु-बांधव।---साक----खेश----पनु॑न्य, नफरबंद-बांदव---कुटुंबीरिश्तेदारु, अज़ीजु---स्वजन, आप्तेष्ट जनबंधु-बांधव, नातेवाईक---स्वजन, पोतानुं माणससंगु, संबंधी, बंधु-बांधव---स्वजन, आत्मीयबन्धु-बान्धव परिजन---आत्मीय, स्वजनलगा-भगा, बन्धु-बान्धव---स्वजन, आत्मीय-जनबंधु-बांधव---स्वजनुलु, आत्मीयुलुबंधुवुलु---तन् कुडुंबत्तिनर्उर॒वनर्---स्वजनंबन्धक्कार॒---परिवारदवरु मनॆयवरुनॆंटरु---
3223स्वतंत्रविशेषणविशेषण---जिसका तंत्र अथवा शासन अपना हो, जो किसी के तंत्र या शासन में न हो, आजाद।किसी प्रकार के नियंत्रण दबाव या बंधन से रहित।---सुतंतरसुतंतर---आज़ाद----आज़ाद----आज़ादु, स्वतंत्रु----स्वतंत्र, मुक्तस्वतंत्र---स्वतंत्र, स्वाधीनमुक्त, आज़ाद---स्वतंत्र, स्वाधीन----स्वतन्त्र, स्वाधीन----स्वतंत्र, स्बाधीन----स्वतंत्रमु----पिर॒र् अदिगारत्तिल इल्लाद----स्वतंत्रं----स्वतंत्र, लंगुलगामिल्लद----
3224स्वतंत्रतास्त्रीलिंग----स्वतंत्र रहने या होने की अवस्था या भाव, आज़ादी, स्वातंत्र्य।----सुतंतरता----आज़ादी----आज़ा॑दी----आज़ादी, स्वतंत्रता----स्वातंत्र्य----स्वतंत्रता, स्वाधीनता, आज़ादी----स्वाधीनता----स्वतन्त्रता----स्वतंत्रता----स्वातंत्र्यमु----सुदन्दिरम् विडुदलै----स्वातंत्र्यं----स्वातंत्र्य----
3225स्वप्नपुंलिंगपुंलिंग---सपना, ख्वाब ;मन ही मन की जाने वाली बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ और बांधे जाने वाले मनसूबे।---सुफनासुफना---ख़्वाब (ख़ाब)----सॊपुनखया॑ली पॅलाव---सुपनो, ख़्वाबु----स्पप्नमनोरथ, कल्पना---स्पप्न, सपनुं, ऊंधमांमहत्त्वाकांक्षा---स्पप्नआकाश-कुसुम---स्पप्न, सपोनअलकी कल्पना, आलाचार चां---स्पप्न, सपनआकाश- कुसुम---स्पप्नमुमनोरथमु---कनवुकर्पनै---स्पप्नं----कनसुकल्पनॆ---
3226स्वभावपुंलिंगपुंलिंग---प्रकृति, ख़ासियत, मिजाज ;आदत, बान।---सुभासुभा---फ़ित्रत----सॅबावफितरथ---सुभाउ----स्वभावसंवय, ब्रीद---स्वभाव, प्रकृति, तासीरटेव, आदत---स्व॒भाव, प्रकृति (स)अभ्यास---स्वभाव, प्रकृतिअभ्यास, स्वभाव---स्वभाव, प्रकृति----स्वभावमुस्वभावमु---सुबावम्, इयर्कैयानगुणम्वळक्कम्---प्रत्येकतस्वभावं---स्वभावअभ्यास, वाडिकॆ---
3227स्वयंविशेषणक्रिया विशेषणपुंलिंग--(सर्वनाम) जिसके द्वारा वक्ता अपने व्यक्तित्व पर जोर देते हुए कोई बात कहता है।अपने आप करने या होने वाला अपनी इच्छा से, बिना किसी जोर या दबाव के।खुद (व्यक्ति)।--आपेआपेआपे--ख़ुद (आप)----खॅदपा॑न्य पानय, खॅदपानय, खॅद--खुदि, पाणपंहिंजो पाणपंहिंजो पाण--स्वयम्, स्वत:आपोआप होणारेंखुद्द (व्यक्ति)--स्वयं, हुं, पोतेजाते-पोते--स्व॒यं, निजे (स)स्वयंक्रिय, स्वइच्छाय (स)निजे--स्वयं, निजस्वयं, निज इच्छायतेस्वयं, निजे--स्वयं, निजेनिजे, निज इच्छायतेनिजे--तनंतट तानुस्वंतमु, स्वंतमुगातानु--तान्तानागवे/निगऴ्गिर/सॆय्गिर॒तान्--स्वयं, स्वतनियॆस्वयं, तान्--स्वत: स्वयं, तानुतानागियॆ आगुवतानॆ, स्वत:--
3228स्वरूपपुंलिंगपुंलिंग---आकृति, रूप, शक्ल ;प्रकृति, स्वभाव, गुण।---सरूपसरूप---माहीयत (हैअत)----हयथ, शकु॑ल----रूपु, शिकिलिसुभाउ, गुणु---स्वरूप, आकृतिस्वभाव, गुण---स्वरूप, आकृति रूप, घाट, आकारलक्षण, स्वभाव---स्वरूप, आकृतिप्रकृति, स्व॒भाव (स)---आकृति, आकर, गढ़प्रकृति, स्वभाव, स्वरूप---स्वरूप, आकृतिस्बभाव, प्रकृति---स्वरूपमुस्वरूपमु---उरुवम्तोट॒ट॒म्, इयल्बु---स्वरूपंस्वभावं---आकृति, रूपप्रकृति, स्वभाव---
3229स्वर्गपुंलिंगपुंलिंग---देवलोक ;ऐसा स्थान जहाँ सभी प्रकार के सुख प्राप्त हों और नाममात्र भी कष्ट या चिंता न हो।---सुरगसुरग---आ़लमे कुदुम (आ़लमे बाला)जन्नत (बिहिश्त)---सॅरु॑ग----सुर्ग/सर्गु----स्वर्ग, देवलोकस्वर्ग---स्वर्ग, देवोनो लोक----स्व॒र्ग देवलोक (स)चिरसुखमय स्थान---स्वर्ग, देवलोकसुखर ठाइ, स्वर्गपुरी---स्वर्ग----स्वर्गमुस्वर्गमु---सॊर्ग लोगम्सॊर्ग लोगम्---स्वर्गंस्वर्गं---स्वर्गस्वर्ग---
3230स्वर्ण-युगविशेषण----ऐश्वर्य, ललित कलाओं की समृद्धि एवं शासनिक रूप से शांतिपूर्ण काल।----सुनहिरी युग----अ़ह्दे जर्री----सॅनहरी दा॑र----सोनहरी ज़मानो----सुवर्णयुग----स्वर्णयुग, वहिवट----स्व॒र्ण॒युग, ऐश्वर्य॒ ओ समृद्धि काल (स) (न) (ज)----स्वर्णयुग, सोणालीयुग----स्वर्णजुग----स्वर्णयुगमु----पोर्-कालम----स्वर्णयुगं, पॊन्मयं----स्वर्णयुग----
3231स्वर्णिमविशेषण----सोने का, सुनहला।----सुनहिरा----ज़र्रीं----सॅनहर्य----सोनो----सोन्याचा, सोनेरी----स्वर्णिम, सोनेरी, सोनानुं----स्वर्णिम, सोनार, सोनाली----सोणाली----स्वर्णमय----स्वर्णाभमु----तंगमयमान----पॊन्मयं----चिन्नद, सुवर्ण----
3232स्वस्थविशेषण----रोग, विकार आदि से रहित।----सिहतमंद----सेहतमंद (तनदुरुस्त)----सॆहथमंद, तंदरुस----तंदुरुस्तु, चङोभलो----निरोगी----स्वस्थ, नीरोगी, तंदरुस्त----सुस्थ----सुस्थ, निरोग----स्वस्थ----अरोग्यमु----आरोग्गियमान, नोयट॒ट॒----आरोगदृढगात्रन्----स्वस्थ, आरोग्यकर----
3233स्वागतपुंलिंगपुंलिंग---किसी मान्य या प्रिय व्यक्ति के आने पर आगे बढ़कर आदरपूर्वक उसका अभिनंदन करने की क्रिया या भाव, अभ्यर्थना ;किसी के कथन, विचार आदि को अच्छा या अनुकूल समझकर ग्रहण अथवा मान्य करने की क्रिया या भाव।---जी-आइआं सुआगतजी-आइआं सुआगत---ख़ैरमक़्दम (इस्तिक़बाल)----स्वागत, इस्तॆकबालस्वागत, इस्तॆकबाल---स्वागतु, आजियां----स्वागत, सत्कारस्वीकार करणें, मान्य करणें---स्वागत, सत्कारस्वीकार करवुं, मान्य करवुं---स्वागत, सम्बर्धना----स्वागत, अभ्यर्थनाग्रहण, स्वीकार, मानिलोवा---स्वागत----स्वागतमुअभिनंदन---वरवेर॒पुनल्वरवु---स्वागतंस्वागतं चॆय्यल्, अंगीकरणं---स्वागतस्वीकार---
3234स्वादपुंलिंग----कोई चीज खाने चा पीने पर जबान या रसनेन्द्रिय को होने वाली अनुभूति, जायका।----सुआद----ज़ाइक़ा (लज्ज़त)----मजु॑, साद----सवादु----स्वाद, लज्जत----स्वाद, चाखवुं ते, चसको----स्वाद----स्वाद, सोवाद----स्वाद----रुचि----रुचि----स्वादु----रुचि----
3235स्वादिष्टविशेषण----जिसका जायका या स्वाद बहुत अच्छा हो, जो खाने में बहुत अच्छा जान पड़े।----सुआदी----जाइक़ादार (लज़ीज)----मजु॑दार----सवादी----स्वदिष्ट----स्वदिष्ट, स्वाद, स्वादवाळुं, स्वादिष्ठ, रोचक----स्वदिष्ट----सुस्वादु----स्वदिष्ट----रुचिकरमु----रुचिकरमान, शवैयुळ्ळ----स्वादुळ्ळ, स्वादिष्ठं----रुचिकर----
3236स्वाभाविकविशेषणविशेषण---प्राकृतिक, कुदरती ;जो या जैसा प्रकृति के या स्वभाव के अनुसार साधारणत: हुआ करता है, सहज।---सुभावक----फित्री----कॅदरतीफितु॑रती---सुभावीकु----नैसर्गिकस्वाभाविक, सहज---स्वाभाविक, प्राकृतिककुदरती अकृत्रिम, सहज---प्राकृतिक, नैसर्गिकस्वाभाविक, प्रकृतिगत---स्वाभाविकसहज, स्वाभाविक---स्वाभाविक----सहजमुस्वाभावसिद्धमु---इयर्क्कैयानइयलबाग, नडक्किर॒---स्वाभाविकंस्वाभाविकमाय, प्रकृतियाउळ्ळ---प्राकृतिकस्वाभाविक, सहजवाद---
3237स्वामित्वपुंलिंगपुंलिंग---मालिक अथवा स्वामी होने की अवस्था या भाव, मालिकी ;प्रभुता, आधिपत्य।---मालकीमालकी---मिल्कीयत----मा॑ल्यकियथमा॑ल्यकियथ---मालिकीहकु, अधिकारु---स्वामित्व, मालकीप्रभुता, आधिपत्य---स्वामित्व, मालिकीधणीपणुं प्रभुता---स्वामीत्व, मालिकानाप्रभुत्व, आधिपत्य॒ (त)---स्वामित्व, मालिकी स्वत्वप्रभुत्व, अधिकार---स्वामित्व----स्वाम्यमुअधिकारमु---तन्उटैमै, सॊन्दमआदिक्कम्---उटम, उटमस्थावकाशंअधिकारं, आधिपत्यं---स्वामित्व, ऒडॆतनप्रभुत्व---
3238स्वामीपुंलिंगपुंलिंग---वह व्यक्ति जिसे किसी वस्तु पर पूरे और सब प्रकार के अधिकार प्राप्त हों, मालिक ;पति शौहर।---मालकमालक---मालिकखाविंद---मा॑लिखरून, सा॑मी---स्वामीस्वामी---स्वामी, मालकपति, नवरा---स्वामी, मालिकपति---अधिकारी, मालिक, प्रभुस्वामी, पति---गराकी, मालिकपति, स्वामी---स्वामी----यजमानि, दोरस्वामी, भर्त---ऎजमान, उरिमैयाळरकणवन्---उटमस्थन्भर्तावु---यजमानगंड---
3239स्वार्थपुंलिंग----अपना अर्थ या उद्देश्य, अपना मतलब।----गरज़, मतलब----ख़ुदग़रज़ी, ख़ुदकामी (ख़ुदमत्लबी)----मतलब----स्वार्थु----स्वार्थ----स्वार्थ----स्वार्थ----स्वार्थ----स्वार्थ----स्वार्थमु----सुयनलम्----स्वार्थं----स्वार्थ----
3240स्वार्थीविशेषण----मात्र अपने उद्देश्य कही सिद्धि चाहने वाला, खुदगर्ज।----खुदगरज, मतलबी----खुदग़रज़ (मत्लबी)----मतल॑बी, खॅदगरज़----स्वार्थी----स्वार्थी----स्वार्थी, आप मतलबी, स्वार्थीलु, स्वार्थवाळुं, एकलपेटुं----स्वार्थी----स्वार्थी, स्वार्थपर----स्वार्थी, स्वार्थपर----स्वार्थपरुडु----सुयनलम् कॊण्ड----स्वार्थक्कारन्----स्वार्थि----
3241स्वावलंबनपुंलिंग----अपने पर ही भरोसा रखने और दूसरे से सहायता न लेने की अवस्था, गुण या भाव, आत्मनिर्भरता।----आतम निरभरता----खुदकफ़ालत----पन॑न्युत ज़ंगन प्यठ इस्तादु॑ रोजन वोल, खॅदक॑फील----खुदियावरी पाण ते भाड़णु----स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता----स्वावलंबन, स्वाश्रय, आत्मनिर्भरता----स्वा॒वलंबन, आत्मनिर्भरता (सा)----स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता----स्वाबलंबन----स्वाबलंबनमु, स्वशक्ति----सुयतेवैप्पूर्त्ति कॊळ्गै, तनकैयेतनक्कु-दवि ऎनरकाळ्गै----स्वाश्रयशीलं----स्वावलंबनॆ----
3242स्वावलंबीविशेषण----अपने ही बल पर काम करने वाला, दूसरे की सहायता न लेने वाला, आत्मनिर्भर।----आतमनिरभर----खुदकफ़ील----पन॑न्यवन जंगन, प्यठ इस्तादु॑, खॅदक॑फील----पाण ते भाड़ीदंड़ु----स्वावलंबी, आत्मनिर्भर----स्वावलंबी, स्वाश्रयी, आत्मनिर्भर----स्वा॒वलंबी (सा)----स्वावलम्बी, आत्मनिर्भरशील----स्वाबलंबी----स्वावलंबनपरुडु----तन्नंबिक्कयुळ्ळ----स्वाश्रयशीलन्----स्वावलंबि----
3243स्वास्थ्यपुंलिंग----स्वस्थ अर्थात निरोग होने की अवस्था, गुण या भाव, निरोगता, आरोग्यता, तन्दरुस्ती।----तंदरुसती, अरोगता----सेहत (तनुदुरुस्ती)----सहॆथ----तंदरुस्ती, चङ भलाई----आरोग्य, स्वास्थ्य----स्वास्थ्य, स्वस्थता, तंदुरस्ती----स्वा॒स्थ्य (सा)----स्वास्थ्य, नीरोगता----स्वास्थ्य----आरोग्यमु----आरोग्गियम्, उडलनलम्----आरोग्यं----आरोग्य, क्षेम----
3244स्वीकारपुंलिंगपुंलिंग---अपना बनाने, ग्रहण करने या लेने या अपनाने की क्रिया या भाव ;कोई बात मान लेने की क्रिया या भाव।---सवीकार, परवानसवीकार, परवान---क़बूल----मानुन, कॊबूल----स्वीकारु, कबूल----स्वीकारमान्य---स्वीकार, स्वीकारवुं तेमानवुं ते, कबूल करवुं ते---ग्रहण, अंगीकारस्वीकार---स्वीकार, स्वीकृतिग्रहण, मानि लोवा---स्वीकार----स्वीकारमुअंगीकारमु---एट॒ट॒क्कोळ्ळल्ऒप्पुक्कोळ्ळल्---स्वीकरिक्कल्अंगीकरिक्कल्---स्वीकारऒप्पुविकॆ---
3245स्वीकृतिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---स्वीकार करने की क्रिया या भाव सहमति ;प्रस्ताव, शर्त आदि मान लेने अथवा ग्रहण करने की क्रिया या भाव।---परवानगी, रज़ामदीपरवानगी, रज़ामदी---मंज़ूरी----मंज़ूरी----कबूलियत, मञता----सम्मति, स्वीकृतिस्वीकृति, मान्यता---स्वीकृति, स्वीकार, संमतिमान्यता, स्वीकृति---स्वी॒कृति, सम्पति (शी)अंगीकार, ग्रहण॒ (न)---स्वीकृतिग्रहण, स्वीकार---स्वीकृति, सम्मतिस्वीकार, ग्रहण---स्वीकृतिअंगीकृति---ऒप्पुदल्एरपु---स्वीकृति, सम्मतंअंगीकारं---सम्मति, ऒप्पिगॆअंगीकार---
3246हँसनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---आनन्द, तृप्ति आदि प्रकट कने की एक क्रिया, जिसमें चेहरा खिल उठता है, आंखें कुछ फैल जाती हैं, मुँह ,सुल जाता है और गले में से ध्वनियाँ निकलने लगती हैं, प्रसन्न होना ;दिल्लगी, माजक या परिहास करना।---हस्सणा----हंसना----असुन----खिलणु----हंसणेंथट्टा करणें, चेष्टा करणें---हसवुं, दाँत काढ़वाहांसी करवी---हासापरिहास, हासि-ठट्टा---हाँह, हाँहि मारहाँहि तामचा कर---हसिबामजा करिबा, परिहास-करिबा---नव्वुटपरिहसिंचुट---शिरिक्कपरिगसिक्क, केलि सॆय्य---चिरिक्कुकपरिहसिक्कुक---नगुवुदुहास्यमाडुवुदु---
3247हँसमुखविशेषण----जिसका मुख सदा हँसता हुआ सा रहता हो, विनोदी।----हस्समुख----हंसमुख (ख़ंदापेशानी)----असवुन----हसिमुखु, खिलिणो----हसरा----हसमुखुं, हसता मुखवाळुं, आनंदी----हासिमुख, विनोद, विनोदकारी----हाँहिमूखीया, फुर्तिबाज----हसमुख----नव्वुमुखमु, नगुमोमु----शिरित्तमुगमुडैय, इनिय सुबावमुळ्ळ----प्रसन्नन्----नगुमुख----
3248हँसलीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---गले के नीचे और छाती के ऊपर के धनुषाकार हड्डी ;स्त्रियों का गले में पहनने का एक गहना जो प्राय: उक्त हड्डी के समानांतर रहता है।---हस्सहस्स---हंसली----अहरनन्यकु॑लिस---हसिली----गळ्याचे हाडगऴयातला एक अलंकार---हांसडीगळानुं एक घरेणुं---कण्ठाहाँसुलि---गला-हाड़गलपता---धनुहाड़ (गळार)हंसुली---मेडनरमुहारमु, कंटे---तोळ्पट्टै ऎलुंबुअड्डिगै---अक्षकास्तिअड्डियल् नॆक्लेस्---कुत्तिगॆय ऎलुवुकंठाभरण---
3249हँसीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---हंसने की क्रिया, ध्वनि या भाव ;परिहास, दिल्लगी, मज़ाक, ठट्ठा।---हासाहासा---हंसी----असुन, मज़ाख----खिल----हासूं, हास्यथट्टा, चेष्टा---हास्य, हसी, हासहांसी, मज़ाक, मश्करी---हासिपरिहास, हासि ठाट्टा---हाँहिहाँहि-घेमालि, ठाट्टा-मस्करा---हास, हसपरिहास, मज़ा, थटा---नव्वुपरिहासमु---शिरिप्पुपरिगासम्, केलि---चिरि----नगुहास्य, गेलि---
3250हकलानाअकारात्मक क्रिया----स्वर नाली के ठीक काम न करने या जीभ के तेजी से न चलने के कारण बोलने के समय बीच-बीच में अटकना, रुक-रुक कर बोलना (स्टैमरिंग)।----थथलाउणा----हकलाना----अडु॑कजर----बा॒ताइणु----तोतरे बोलणें----तोतडावुं----तोतलानो----खोना, खोनाइ, खोनाइ कथा क----खनेइ खनेइ कहिबा----नत्तिगा माटाडुट----तिक्किप्पेश----विक्कुक----उग्गुवुदु, विक्कुवुदु----
3251हटनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया--किसी स्थान से चल कर खिसक कर या सरक कर दूसरी जगह जाना ;किसी काम या बात से दूर होना बचना या विमुख होना, मुँह मोड़ना।किसी काम या बात का समय टलना, स्थगित होना।--हटणाहटणाहटणा--हटना----हटुन, दूर रोजुनफॆरुननॆरुन--हटणु-टरणु--हटणें, सरकणेंबाजूला होणेंटळणें--दूर खसवुंखसी जवुंटाळवुं--सराविमुख हओयास्थगित हओया, टाला, मुलतबि राखा--आँतर, दूर हपिच होंहक, बिमुख हस्थगित ह--हटिबा, हटि जिबाहटिजिबा, विमुखहबास्थगितहबा--तोलगुटतप्पि पोवुटआगि पोवुट--नगरन्दु पोगपिन्वांगनेरम् कऴिन्दु पोग, निन्रु॒ पोग--मारु॒कपिन्तिरियुकऒळिवाकुक--सरियुवुदु, जरुगुवुदुहिंजरुगुवुदुकळॆदु हॊगुवुदु--
3252हड़तालस्त्रीलिंग----दु:ख, रोष-विरोध या असंतोष प्रकट करने के लिए कल-कारखानों, कार्यालायों आदि के कर्मचारियों का सब कारोबार, दूकाने आदि बंद कर देना (स्ट्राइक)।----हड़ताल----हड़ताल (स्ट्राइक)----हरताल, तम्बु॑----हडिताल, हटताड़----हरताळ----हड़ताल (ळ)----धर्मघट, हरताल----हरताल, धर्मघट, बन्धा----हरताळ----सम्मे----वेलेनिरु॒त्तम् कडैयडैप्पु----हर्त्ताल्, पणिमुटक्कु----मुष्कर----
3253हड़पनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---मुँह में डाल कर निगलना या पेट में उतारना ;किसी चीज अनुचित रूप से लेकर दबा बैठना।---हड़प्पणाहड़प्पणा---हड़पना----ग्रॅख वालुन----गी॒हणु, हड़पु करणुहड़प करणु, खाई वञणु---गिळणेंगिळंकृत करणें---हडपवुं, हडप करवुं----गिले नेओयाहातानो---गिलआत्मसात कर---गिळिबाहस्तगत करिबा---म्रिंगिवेयुटअपहरिंचुट---विळांगिविडकबळीगरम् सॆय्य---विळुङ्ङुकतट्टियॆटुक्कुक---नुंगुवुदुदक्किसिकॊळ्ळुवुदु---
3254हत्थापुंलिंग----हाथ से चलाये जाने वाले बड़े औजारों और छोटी कलों का वह हिस्सा, जिसे हाथ से पकड़ कर घुमाने या चलाने से वे चलते हैं, दस्ता।----हत्था, दसता----दस्ता----दन----हथियों----मूठ----हाथो----हाता----मुठि, बस्तुर हातेरे, मुठि मारि, धरा अंश----हस्ता, दस्ता----पिडि----कैप्पिडि----कैप्पिटि----हिडि----
3255हथ-करघा (हाथ-करघा)पुंलिंग----कपड़ा बुनने का वह करघा जो हाथ से चलाया जाता है (हैंडलूम)।----खड्डी----हथकरघा----यंदु॑र----आडा॒णो----हाथमाग----हाथसाल----ताँत, हैण्डलुम----ताँतशाल----हस्त तंत उपकरण----चेनेत मग्गमु----कैत्तरि----कैत्तरि॒----कैमग्ग----
3256हथियानासकारात्मक क्रिया----अपने प्रभुत्व या अधिकार में कर लेना।----हथियाना----हथियाना (क़ब्ज़े में करना)----जबरदस्ती, न्युन----हथ में करणु, कब्ज़े में करणु----हस्तगत करणें----कबजामां लेवुं----हातानो, हात करा----हातकर, हातलै आन, हातकरिल----आयत्त करिबा----लागु कोनुट, अपहरिंचुट----तन्वशमाक्कि कॊळ्ळ, कैप्पटट----कैवशप्पॆटुत्तुक----कैवशपडिसिकॊळ्ळुवुदु----
3257हथियारपुंलिंग----अस्त्र-शस्त्र।----हथिआर----अस्लिहा (हथ्यार)----हथियार, अवज़ार----हथियारु----हत्यार, अस्त्र-शस्त्र----हथियार, शस्त्र, आयुध----हातियार, अस्त्र-शस्त्र----अस्त्र-शस्त्र----हतिआर----आयुधमु----आयुद्म्----आयुधं----शस्त्रास्त्र----
3258हथौड़ापुंलिंग----धातु, पत्थर, ईंट आदि ठोकने-पीटने वाला लोहे का एक औजार (हैमर)।----हथौड़ा----हतौड़ा----डॅकुर----हथोड़ो, मुतिर्को----हातोडा----हथोडो----हातुड़ि, हातुड़ि----हातुरी----हातुड़ी----सम्मेट----शुत्तियल्----कोंट्टुर्वाट, चुटिरक कूटम्----सुत्तिगॆ----
3259हदबंदीस्त्रीलिंग----दो खेतों, प्रदेशों, राज्यों, देशों की सीमा निर्धारण करना।----हदबंदी----हदबंदी----हदबंदी----हदबंदी----हद्द ठरविणें----हदबंधी----जमि-ग्राम-राज्य देशादिर सीमा निर्धारण॒ (न)----सीमा निर्धारण----सीमा----हद्दु पेट्टुट----ऎल्लैयै वरैयरु॒त्तल्----अतिरु तिरिक्कल्----एल्लॆ कट्टुविकॆ----
3260हमसर्वनाम----उत्तम पुरुष बहुवचन सूचक सर्वनाम 'मैं' का बहुवचन।----असीं----हम----अस्य----असीं----आम्ही----अमे, आपणे----आमरा----आमि----आमे, आंभे----मेमु, मनमु (हमलोग)----नाम् नांगळ्----नां, नम्मळ्, ञङ्ङळु----नावु----
3261हमाराविशेषण, सर्वनाम----'हम' का संबंधकारक रूप।----साडा----हमारा----सोन----असांजो----आमचे----अमारुं, आपणुं----आमोदेर----आमार----आमर----मायोक्क, मनयोक्क----नम्मुडैय, ऎगळुडैय----नम्मुटॆ, ञङ्ङळुटॆ----एम्म----
3262हमेशाअव्यय----सदा, सर्वदा, सदैव।----हमेशा----हमेशा----हमेशु॑----हमेशह/हमेशा, सदाईं----नेहमी, सर्वदा, सदैव----हमेशां, हमेश, नित्य, रोज----सदा, सर्वदा, हमेशा----सदाय, नितौ----सर्बदा, सदा----ऍल्लप्पुड----ऎप्पोळुदुम्----ऎल्लाय्पोळुं, सदा----यावागलू----
3263हरणपुंलिंग----छीनना या लूटना, उठा ले जाना।----लुट्ट, हरण----दस्तबुर्द----ज़ोर-जबरदस्ती न्युन----फुरणु, भजा॒ए वञणु----हरण करणें, लुटणें----हरण, हरवुं, हरी जवुं----हरण॒, लुण्ठन, (न)----हरण, लुट----हरण----हरणमु----पिडुंगिक्कोळ्ळल्----अपहरिक्कल्----कसिदु कॊळ्ळुविकॆ----
3264हराविशेषणविशेषणविशेषण--ताजी उगी हुई घास या पत्तों के रंग का, हरित सब्ज़ ;हरियाली से भरा हुआ ;हरा रंग।--हरिआ, हराहरिआ, हराहरिआ, हरा--हरा (सब्ज़)----सरसबु॑ज----साओ----हिरवा, हरितहिरवळयुक्तहिरवा रंग--हरुं, लीलुं, हरितहिरयाळीलीलो रंग--सबुज----सेउजीआसेउजीया, घॉहनिउउजीय रं--सबुज रंग, सागुआ----पच्चनिकळकळ-लाडुआकुपच्च--पच्चै निर॒मानपशुमैयान---पच्चनिर॒मुळ्ळपच्चप्पटर्पायपच्चनिरं॒, हरितवर्णं--हसिरादहसिरादहसिरु--
3265हरितविशेषण----हरे रंग का, हरा।----हरिआ----सब्ज़----सबु॑ज़ा----साओ----हिरवा----हरित, लीला रंगनुं, लीलुं----सबुज रङ्गेर----सेउजीया रङर----हरित----आकुपच्च़नि----पच्चैनिर॒मान----पच्च----हसिराद----
3266हरित-क्रांतिस्त्रीलिंग----फल-फूल, पौधे आदि को लगाए जाने के लिए किया जाने वाला आन्दोलन।----हऱी क्रांती----सब्ज़ इन्क़िलाब----सबु॑ज़ इन्क॑लाब----सब्ज्रु क्रांती----हरित क्रांती----हरित क्रांती----सबुज-क्रांती----बनमहोत्सव, बृक्षरोपण आन्दोलन----सबुजविप्लव----सस्यविप्लवमु----विऴैच्चलिल्, मुन्नेट॒ट॒म्----हरितविप्ळवं----हरित क्रान्ति----
3267हरियालीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---हरे-भरे पेड़ पौधों आदि का विस्तृत फैलाव या समूह ;आनन्द, प्रसन्नता।---हरिआवल----सब्ज़ा (सबज़ाज़ार)सरसब्ज़ी---सबु॑ज़ार----सावकखुशी, आनंदु---हिरवळआनन्द, प्रसन्नता---हरियाळी, लीलोतरीलीलोतरीनी शोभा---हरीतिमाआनन्द, प्रसन्नता---घाँहनिआनन्द, प्रसन्नता---सबुजिया, हरीतिमाआनन्द, प्रसन्नता---पंट पैरुलुकळकळ---पशुमै, मरम् शेडिगळ् परवियिरुत्तल्महिऴ्च्चि---पच्चनिरं॒, पच्चप्पटर्प्पुआनंदम्---हुल्लुगावलुआनंद---
3268हर्षपुंलिंग----प्रसन्नता, आनंद, खुशी।----खेड़ा----ख़ुशी (मसर्रत)----खॅशी----सुखु, खुशी----हर्ष, आनन्द----हर्ष, प्रसन्नता, आनन्द, खुशी, हरख----हर्ष, आनन्द खुशि----हर्ष, आनन्द----हर्ष----हर्षमु, संतोषमु----महिऴ्च्चि, आनंदम्----हर्षं----प्रसन्नतॆ, हर्ष, आनंद----
3269हलपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--खेत जोतने का एक प्रसिद्ध यंत्र ;गणित के प्रश्न का उत्तर ;किसी विषय या समस्या का समाधान।--हल----हल----अंलु॑बा॑न्यहलवॅपाय--हरुहलुहलु--नांगरगणिताच्या प्रश्नाचें उत्तरसमस्येचे समाधान--हल (ळ)गणीतना प्रश्नोउत्तरसमाधान--हल, लाङ्गलगणितेर प्रश्नेर उत्तरसमस्या, समाधान--नाङल, हालअंकर प्रश्नोत्तरसमाधान, निराकरण--हळ, लंगळअंकर उत्तरसमाधान, निराकरण--नागालिसामाधानमुसमाधानमु--एर्केळ्विक्कु विडैपिरच्नैयिन् तीर्वु--कलप्पउत्तरंसमाधानं--नेगिलुउत्तर बिडिसुव बगॆपरिहार--
3270हलचलस्त्रीलिंग----वह अवस्था या स्थिति जिसमें किसी स्थान पर लोगों का चलना-फिरना लगा रहता हो, शोरगुल।----हलचल----हलचल (हंगामा)----वॅसु॑द्रॅस----हलचल----खळखळ, गोंधळ, गडबड----हलचल, खळखळ, उपद्रव----हइचइ, शोरगोल----उखल-माखल, हुलस्थूल----हलचल, चहळ, हुल-स्थूल----संदडि अलजडि----किळर्चि----ऒच्चयुं अनक्कवुं----गलाटॆ----
3271हवनपुंलिंग----देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अग्नि में घी, जौ आदि की आहुति देने की क्रिया, होम।----होम, हवन----होम----हवन----हवनु----हवन----हवन, होम, यश, यशमां आहुति होमबी ते----होम, हवन----होम, आहुति, दाम----हबन----होममु----वेळ्वित्तीयिल् अविस् पोडुदल, होमम्----होमम्----होम----
3272हवाई-अड्डापुंलिंग----वायुयानों के उतरने, रुकने या उड़ान भरने का स्थान।----हवाई अड्डा----हवाई अड्डा----हवा॑यी अडु॑----हवाई अडो॒----विमानतळ----हवाई-मथक, विमान-मथक----विमान-घॉटि----बिमान बन्दर, बिमान कोठ----बिमानघाटी----विमानाश्रयमु----विमान तळम्----विमानत्तावळं----विमान निल्दाण----
3273हवाई जहाज़स्त्रीलिंग----हवा में उड़ने वाला यान, वायुयान, विमान।----हवाई जहाज़----हवाई जहाज----हवा॑यी जहाज़----हवाई जहाजु----विमान----हवाई-जहाज, विमान, एरोप्लेन----विमान, वायुया॒न (ज)----बिमान, उरा जाहाज----उड़ाजाहाज----विमानमु----आगाय विमानम्----विमानं----विमान----
3274हवाई-डाकस्त्रीलिंग----वायुयान द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जाने वाली डाक, चिट्ठियाँ आदि।----हवाई डाक----हवाई डाक----हवा॑यी डाख----हवाई, टपाल, एयरमेल----हवाईडाक----हवाई डाक, एर-मेल----विमान वाहित डाक----बिमान-डाक----हावाइ डाक, आकाश पथ डाक----विमान तपाला----विमानत्तपाल्----विमानत्तपाल्----विमान तपालु----
3275हस्तकलास्त्रीलिंग----हाथों के कौशल द्वारा किया जाने वाला काम।----हत्थकला, हसतकला----दस्तकारी----अंथु॑ हॅनर, अथु॑ का॑म----हथ जो हुनुरु, हथ जो कमु----हस्तकला----हस्तकला, (ळा), हाथनी कारीगरी----हस्तशिल्प, कारिगरि----हस्तशिल्प, हस्तकला----हस्तकला, हस्तशिळ्प----चेति पनि----कै वेलै----करकौशलं----कैगारिकॆ----
3276हस्तक्षेपपुंलिंग----किसी दूसरे काम के में अनावश्यक रूप से तथा बिना अधिकार दखल देना।----दखल अंदाज़ी----मुदाख़लत (दख़्लअंदाज़ी)----मुदा॑खलत----दस्तअंदाज़ी----ढबळाढवळ, हस्तक्षेप----हस्तक्षेप----हस्तक्षे॒प (क्ख)----हस्तक्षेप----हस्तख्येप----हस्तक्षेपमु----तलैइडुदल्----इटपॆटल्----हस्तक्षेप----
3277हस्तांतरणपुंलिंग----सम्पत्ति, स्वत्व आदि का एक के हाथ से दुसरे के हाथ में जाना या दिया जाना, अंतरण (ट्रांसफ़रेन्स)।----हसतांतरण----इंतिक़ाल----हवालु॑ करुन----तबदील, बदिली हथ मट----हस्तांतरित, बदल करणें----हवालो, कबजो, सोंपणी, सुपरत----हस्तान्तर----हस्तान्तर----हस्तांतर----चेतुलु मारुट मार्पु----कै मारु॒दल्----कैमाट॒टं॒----हस्तांतरण----
3278हस्ताक्षरपुंलिंग----किसी व्यक्ति द्वारा लिखा जाने वाला अपना नाम जो इस बात का सूचक होता है कि ऊपर लिखी हई बातें मैंने लिखी हैं और उनका दायित्व मुझ पर है, दस्तखत (सिगनेचर)।----हसताखर----दस्तख़त----दसखथ----सही, दस्तख़तु----सही, हस्ताक्षर----हस्ताक्षर, सही, दस्कत----हस्ताक्ष॒र (क्ख)----स्वाक्षर, हस्ताक्षर----हस्ताख्यर----संतकमु, चेव्रालु----कैयॆळुत्तु, ऒप्पम्----कैयोप्पु----रुजु----
3279हांअव्ययस्त्रीलिंग---स्वीकृति, सहमति, समर्थन, निश्चय, आत्मतोष, स्मृति आदि का सूचक शब्द।स्वीकृति देने या हां करने का कार्य।---हां, आहोहां, आहो---हां----आ, अवु॑---हाँ----होयस्वीकृति---हा, संमतिसूचक उद्गारहा कहेवी ते, स्वीकार---हाँ/ह्यांस्वीकृति-दान (सी)---हय, अँ, एराहय, अँ---हंहें---अवुनुअंगीकारमु---आम्, आमाम्ऒप्पुदल्---अतॆसम्मतं मूळल्, शरि वॆक्कल्---हौदु, सरिसरि---
3280हांकनासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---जानवरों को आगे बढ़ाने के लिए मुंह से कुछ कहते हुए चाबुक आदि लगाना, पशु वाली गाड़ी चलाना ;बहुत बढ़-चढ़ कर बातें करना।---हिक्कणाहिक्कणा---हांकना----होकि पकु॑नावुन, हांकुन----हकिलणु----हांकणेंबढ़ाई मारणें---हांकवुंगप मारवी---हाँकाहाँका---(जीव-जन्तु) खेददांकोप मार---हांकिबा----तोलुटगोप्पचेप्पुट---ओट्टजंबम्पेश---तॆळिक्कुकवीम्पु पर॒युक---अट्टुवुदु, ओडिसुवुदुजंभ कॊच्चुवुदु---
3281हांफनाअकारात्मक क्रिया----थकावट, भय आदि के कारण फेफड़ों का जल्दी-जल्दी और लंबे सांस लेना।----हफणा----हांपना----फ्रख खसुन----ब॒टाक हणणु, सहिकणु----धापा टाकणें----हांफवुं, हांफ चडवी----हाँफानो----हँफा फोंफा----धकेइबा, हाँफिबा----आयासपडुट, रोप्पुट----मेल् मूच्चुवांग----कितक्कुक----मेलुसिरुबिडुविदु----
3282हाथापाईस्त्रीलिंग----वह लड़ाई जिसमें एक-दूसरे के हाथ पकड़ कर खींचते और ढकेलते हैं।----हत्थोपाई----हाथापाई----अथु मिलु॑वुन शलख----छिकताण धकु-बुजो, मारकुट----मारामारी----मारामारी----हाताहाति----हताहति----हाताहाति----तगादा, कोट्लाट----कै कलप्पु, आडि तडि----कैयांकळि, अटिपिटि----जगळ, हॊडॆदाडुवुदु----
3283हाथी दांतपुंलिंग----हाथी के मुंह के दोनों ओर निकले हुए सफेद दांत।----हाथी-दंद----हाथीदांत (आ़ज)----ह॑स्य दंद----हाथीअ जा बा॒हिरि निकितल ड॒न्द----हस्तीदंत----हाथी दांत हाथीनो दंतशूल----हाती, हातिर दाँत----हातीर दाँत----हाती-दाँत----एनुगु दंतमुलु----यानै दन्दम्----आनक्कॊम्पु, दन्तं----दंत----
3284हानिस्त्रीलिंग----क्षति, नुकसान।----नुकसान, हानि----नुक़सान, ख़सारा----नॅसखान----हाञी, नुकसानु----हानि, नुकसान----हानि, नुकसान हाण, पायमाली, नाश----क्षति, लोकसान, हानि (ख)----हानि, क्षति, लोकचान----हानि----हानि, नष्टमु----तींगु, नष्टम्----दोषं, नष्टं----हानि----
3285हारस्त्रीलिंगपुंलिंग---पराजय, जीत का विपर्याय।फूलों मोतियों आदि की माला।---हारहार---हार----हारमाल, हार---हारहार---हार, पराजयहार (फुलांचा)---हार, फूलमालाहार, पंक्ति---हार, पराजयहार, माला---पराजय, हारहार, माला---हार, पराजयहार, माळा---ओटमि, पराजयमुहारमु, माल---तोल्विमालै---तोल्वि, पराजयंहारं, माल---सोलुहार---
3286हारनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---युद्ध, खेल, आदि में पराजित होना, गंवाना, खोना;विफल होना।---हारनाहारना---हारना----हारुन----हाराइणुथकिजणु, ढिलो थियणु---हारणेंनिष्फल होणें---हारवुं, पराजित थवुंनिष्फल थवुं---हारा, हारानोंविफल---हार, पराजय हबिफल ह---हारिबा----ओडि पोवुटनिरिश चेंदुट---तोल्वि, अडैयतोट॒ट॒प्पोग---तोल्कुकनिष्फलं आकुक---सोलुवदुविफलवागुवुदु---
3287हार्दिकविशेषण----हृदय में रहने या होने वाला, हृदय का।----दिली, हारदिक----दिली (क़ल्बी)----दिली----हिर्दे सां, दिल सां, दिली----हार्दिक----हार्दिक, अंतरनुं----हार्दिक , आन्तरिक----हार्दिक, आत्तरिक----हार्दिक----हृदय पूर्वकमु, हार्दिकमु----मनमुवन्द, मनम्कनिन्द----हृदयंगममाय----हार्दिक----
3288हालचालपुंलिंग----अवस्था, दशा, वृत्तांत, समाचार।----हालचाल----हालचाल (कैफ़ियत)----हालचाल----हालुचालु----समाचार----हालचाल----वृत्तांत, समाचार, हाल-चाल----अवस्था, दश, खबर----हालचाल----विशेषमुलु संगतुलु----निलवरम्----अवस्थ----समाचार----
3289हालांकिअव्ययअव्यय---यद्यपि ;अगरचे।---भविं----हालांकि----हालांकि----जेतोणीकि----यद्यपिजरी---जो के----सत्त्वेओ----यदिओयदिओ---जद्यपि, जदि----अयिनप्पटिकी----आयिनुम्इरुन्दपोदिलुम्---ऎकिलुं----आदाग्यू, आदरूआदाग्यू, आदरू---
3290हास्यपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--हंसने की क्रिया या भाव, हंसी, हास ;दिल्लगी, मज़ाक ;साहित्यक में नौ स्थायी भावों या रसों में से एक।--हासीहासीहास--हंसीमिज़ाक़ (हंसी)मिज़ाह--मज़ाख, असुन----खिलमज़ाकुसाहित्य में हिकिड़ो भावु--हास्यथट्टा, विनोद, मस्करीहास्य रस--हास्यहास्य, विनोद---हास्य, हासिहासि-ठाट्टा, परिहास---हाँहि, हास्यरंतामाचा, फुचुरिहास्य (रस)--हास्य, हसथटा, परिहासहास्य-रस--हासमु, नव्वुपरिहासमुहास्यरसमु--शिरिप्पुपरिगासम्, केलिनगैच्चुवै--चिरिनेरंपोक्कुहास्यं--हास्य, नगुतमाषॆहास्यरस--
3291हिंसास्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---हत्या, वध ;किसी प्रकार की हानि पहुंचाने, अनिष्ट या अपकार करने, कष्ट या दुख देने की क्रिया या भाव।---हिंसाहिंसा---क़त्लतशद्दुद---मारु॑मारयतशदुद---हिंसा----हत्या, वधहिंसा---हिंसाहिंसा---हिंसाअपरेर अनिष्ठ/अंपकार---हत्या, बधहिंसा---हिंसा----हिंसहिंस---कॊंलैइम्मित्तल् तुन्बुरुत्तल---वधंहिंस---कॊलॆहिंसॆ---
3292हिचकीस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---खांसी, छींक, डकार आदि की तरह का एक शारीरिक व्यापार जिसमें सांस लेने के समय क्षण भर के लिए फेफड़े का मुंह बंद होकर पेट की वायु कुछ रुक कर हल्का शब्द करती हुई बाहर निकलती है (हिकप);उक्त के फलस्वरूप झटके सें होने वाला तीव्र शब्द जो कंठ से निकलता है।---हिचकीहिचकी---हिचकी----ह्युकह्युक---हिडिकी----उचकी----हेडकी, वाधणी----हेंचकि----हिकटि----हाकुटि----ऍक्किळ्ळुतेपु---विक्कल्----एंङ्ङल, इक्किळ्----विक्कळिकॆबिक्कु---
3293हितैषीविशेषण----भला चाहने वाला, कल्याण मानने वाला, हितचिंतक।----हितू----ख़ैरख़्वाह (ख़ैरख़ाह)----रुत कांछन वोल----भलो चाहदिंडु.----शुभेच्छु----हितैषी----हितैषी, हिताकांक्षी----हितैषी, हितकारी----हितैषी----श्रेयोभिलाषि----नलम् विरुंबुबवर्----अभ्युदयकांक्षी, शुभकांक्षी----हितचिंतक----
3294हिनहिनानाअकारात्मक क्रिया----घोड़े का हिन-हिन शब्द करना, हींसना।----हिडहिड़ाउणा----हिनहिनाना----हिनु॑ररय करु॑न्य----हिणिकणु, हिणिकार करणु----खिंकाळणें----हणहणवुं----हेषा, अश्व्ध्वनि----(घोराँह) हिं-हिं-हिं कर----हेषारब----सकिलिंचुट----कनैक्क----करयुक----कॆनॆयुवुदु----
3295हिरासतस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---किसी को इस प्रकार अपने बंधन या देख-रेख में रखना कि वह भाग कर कहीं जाने न पाए, अभिरक्षा, परिरक्षा (कस्टडी)।वह स्थान जहां उक्त प्रकार के लोग बंद करके रखे जाते हैं (लाक-अप)।---हिरासतहिरातस---हिरासत----हिरासतहिरासत---हिरासत, पहिरे हेठिलाकपु---कच्ची कैदहवालात, लॉकअप---नजर कैद, पोलीस कस्टडीकाची जेल, लोक-अप---तत्वावधान, रक्षणोवेक्षण (न)हाजत---दायित्व, न्यास, तत्त्वाधानहानोत---गिरफहाजत---स्वाधीनमु, कट्टुबाटुलाकम्पु---शिरै॒कावल्कावर्कूडम्---कस्टडि, अधीनम्लोक्अप्---कावलु, सॆरॆसॆरॆमनॆ---
3296हिलानासकारात्मक क्रियासकारात्मक क्रिया---किसी को हिलने में प्रवृत करना, झुलाना ;बच्चे को प्यार करके अपने साथ हिलाना, हेल-मेल में लाना, परचाना।---हिलाउणा----हिलाना----हिलावुनअलरावुन---लोड॒णु----झुलविणेंमाया लावणें---हलाववुंमाया लगाडवी---नडानो, दोलानो----लरा, लरचर करचा-चिनाकी कर---हलाइबा, झुलाइबा, दौळाइबाहलाइबा, दोहलाइबा, झुलाइबा---कदिलिंचुटआडिंचुट---अशैक्ककुळ्न्दैयै, अनबूडन् आट्ट---इळाक्कुकइणक्कुक---अळ्ळाडिसुवुदुतूगाडिसुवुदु---
3297हिसाब-किताबपुंलिंगपुंलिंग---आय-व्यय आदि का विवरण, लेखा जोखा ;व्यापारिक लेन-देन या व्यवहार।---हिसाब-किताबहिसाब-किताब---हिसाब-किताबहिसाब-किताब---हिसाब-किताब----हिसाबु-किताबु----जमाखर्चा चा हिशोबदेवाण-घेवाण---हिसाब-किताबलेणदेण---जमा-खरच निर्धारण (न)हिस्सा, अंश, भाग---हिचाब-पत्रभाग, अंश---हिसाब- कितापहिसा, भाग, अंश---लेक्कलुखाता---वरवु-शिलवु, कणक्कुबागम्---कणक्कुभागं---लॆक्काचारव्यापार-व्यवहार---
3298हिस्सापुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--भाग, विभाग, अंश, खंड ;वह धन जो किसी साझे की वस्तु या व्यवसाय में कोई एक या हर एक साझेदार लगाए हो (शेयर)।साझेदार को मिलने वाला अनुपातिक लाभ या अंश।--हिस्साहिस्साहिस्सा--हिस्सा----हिसु॑हिसु॑हिसु॑--हिसो----भाग, अंशहिस्सा, भागनफ्याचा वाटा--भाग, अंशहिस्सो, भागनफानी वहेंचणी-------अंश-लाभांश--हिसा-हिसा (लाभांश)--भागमुपालु, वंतुभागधनमु--पंगु-पंगळिक्कु किडैक्कुम् लावम्--पंकु, षॆयर॒, ओहरि-ओहरि विहितं--भाग, अंशपालुपालु, लाभांश--
3299हुंडिस्त्रीलिंगस्त्रीलिंग---अपना प्राप्य धन पाने के लिए किसी के नाम लिखा हुआ वह पत्र जिस पर लिखा रहता है कि इतने रुपये अमुक व्यक्ति, महाजन या बैंक को दे दिए जांए (बिल आफ एक्सचेंज ड्राफ्ट) ;भारतीय महाजनी क्षेत्र में वह पत्र जो कोई महाजन किसी से ऋण लेने के समय उसके प्रमाण स्वरूप ऋण देने वाले को लिख कर देता है और जिस पर लिखा रहता है कि वह धन इतने दिनों में ब्याज समेंत चुका दिया जाएगा (बांड, डिबेंचर)।---हुंडिहुंडि---हुंडी----हॊंडहॊंड---हुंडी----हुंडीहुंडी---हूंडी, विनियम पत्रहुंडि, बंधणी, बंधनी, खत, लेणा-खत, खातुं---हुण्डि----हुण्डीऋण-पत्र---हुंडीहुंडी---हुंडी, चेक्कुबांडु, डिबेंचरु---केट्पु, वरै ओलैकडन्, पत्तिरम्---हुंडी, उण्डियल्बोण्ड्, प्रमाणं---हुण्डि कागदबाण्डु, सालपत्र डिबॆंचर् पत्र---
3300हृदयपुंलिंगपुंलिंगपुंलिंग--कलेजा, दिल (हार्ट);उक्त के पास छाती के मध्य भाग में माना जाने वाला वह अंग जिसमें प्रेम, हर्ष, शोक, क्रोध आदि मनोविकार उत्पन्न होते रहते हैं ;अंत: करण, विवेक।--दिल, हिरदादिल, हिरदादिल, हिरदा--दिल (क़ल्ब)-ज़मीर (दिल)--दिलदिलिजिगरअंत: करु॑न, ज़ेमीर--दिल, हिर्दो----हृदयहृदय, मनअंत: करण--हृदय, दिल, हैयुंहृदय, मनअंत: करण--हृद्पिण्ड, हृदय----कालिजाहृदयम् अन्तर---हृदय----हृदयमुहृदयमुहृदयमु--इरुदयम्, नेञ्जुमनदु अन्बु, कोबम्, मुदलिय, उणर्चिगळ् इरुक्कुमिडम्मनदु--हृदयंहृदयंअंत: करणं, विवेकं--हृदय, ऎदॆमनस्सुअंत: करण--
3301हृष्ट-पुष्टविशेषण----मोटा-ताजा।----रिशट-पुशट----तनोमंद----ह्श्ट पॅश्ट, व्यॊठ-पूठ----हृष्टु-पुष्टु, थुल्हो मतारो----हृष्ट-पुष्ट----हृष्ट-पुष्ट----हृष्ट-पुष्ट, मोटा-सोटा----हृष्ट-पुष्ट----हृष्ट-पुष्ट----बलिष्ठमु----वाट्ट शाट्टमान----तटिच्चु कॊळुत्त----हृष्ट-पुष्ट----
3302हेरा-फेरीस्त्रीलिंग----चालबाजी, दांव-पेंच, गड़बड़।----हेरा-फेरी----हेराफेरी----हेराफेरी----हेरा-फेरी----फेर-फार, गडबड----हेरा-फेरी----चालबाजि----चालाकि, चालबाजी----हेरा-फेर, गड़बड़----मोसमु, गल्लतु----तन्दिरम्----तिरिमरि॒, कुऴप्प----अदलु-बदलु, कुतंत्र----
3303होनाअकारात्मक क्रियाअकारात्मक क्रिया---अस्तित्व में आना ;कार्य या घटना का क्रियात्मक या वास्तविक रूप में सामने आना।---होणाहोणा---होना----सपदुन, आसुनबनुन, शुदुन---थियणु-हअणु----होणेंघडणें---होवुं, थंवुंघडवुं---अस्तित्वे थाका (त्ते)----ह, आछघट ह---हेबाघटिबा---उंडुतअगुट---इरुक्कनिगऴ, उण्डाग---उण्डाकुकसंभाविक्कुक---इरुवुदुआगुवुदु---
3304होनीस्त्रीलिंग----ऐसी घटना या बात, जिसका घटित होना अनिवार्य हो।----होणी----होनी (शुदनी)----बा॑वी----हुअणी, थियणी----भवितव्य----होनहार----अवश्यम्भावी घटना----भवितब्य, होब लगा----भबितब्यता----भवितव्यमु, कानुन्नदि----कट्टायम्- नडक्क वेण्डिय निगऴ्च्चि----विधि----भाग्य, हॊणॆ बरह----
3305होशपुंलिंगपुंलिंग---चेतना, संज्ञा ;याद, स्मृति।---होश----होश----होश----होशु----शुद्ध, संज्ञास्मृति---होशस्मृति---चेतना, संज्ञास्मृति---हुच, चेतना, संज्ञास्मरण, स्मृति---होश, संज्ञा, चेतनास्मृति---स्पृहज्ञापकमु---पिरज्ञै, उणर्चिनिनैवु---बोधंओर्म---ज्ञान, प्रज्ञॆनॆनपु---
3306होशियारविशेषणविशेषणविशेषण--सावधान, सतर्क, सजग, चौकस ;चतुर, चालाक ;माहिर, कुशल, दक्ष।--हुशिआरहुशियारहुशिआर--होशियार----हुशारचालाखत्रुक--होशियारु----सावध, जागरुकचतुर, चलाखहुशार, निपुण--साधव, जागरुकचतुर, चालाकहोशियार, निपुण--हुँशियार----सावधान, सतर्कचतुर, दक्षदक्ष--साबाधान, सतर्क, सजग, हुशिआरचतुर्, कुशळ, दख्यचालाक--जागरूकुडुतोलिविगलचुरुकयिन--जाग्गिरदैयानसामर्तिय-शालियान---जाग्रतयुळ्ळकौशलक्कारन्विदग्धन्--ऎच्चरजाण, बुद्धिवंतचतुर--
3307ह्रासपुंलिंगपुंलिंग---क्षय, क्षीणता, नाश, अपव्यय, अभाव, कमी, घटती ;पतन, अवनति, अपकर्ष।---नास, पतननास, पतन---इन्हिताततनज़्जुल (ज़वाल)---गिरुन, गटुनज़॑वाल, वॅजाल---कमी, घटिताईज़वालियत, गिरावट---क्षय, ह्रासअवनति, अपकर्ष---ह्रास----ह्रास----ह्रास----ह्रास, क्खीठापतन, अबनति, अपकर्ष---क्षयमुपतनमु---कुलैदल, अऴिवुवीऴ्च्चि---क्षीणं, कुर॒वुपतनं, अपकर्षं, अधं:पतनं---कुग्गुचिकॆ क्षीणतॆ, अपव्यय, अभावअवनति, कीळ्तन---