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भारशिव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भारशिव संज्ञा पुं॰ [सं॰ भार + शिव] भारतवर्ष का एक प्राचीन राजवंश । उ॰—भारशिव नाम इसलिये पड़ा कि ये शिव के परम भक्त थे और अपनी पीठ पर शिवलिंग का भार वहन करते थे ।—आ॰ भा॰, पृ॰ ३४५ । विशेष—चतुर्थ शती के आरंभ में, कुषाणों से पूर्व, प्रयाग से बनारस तक भारशिव राजवंश का उल्लेख मिलता है । संभवतः बुंदेलखड अंचल से इस राजवंश का उदय हुआ । इस राजवंश में भवनाथ तथा वीरसेन आदि प्रमुख शासक हुए हैं । नागवश के रूप के भो इसका उल्लेख मिलता है । नागपूजक होने के साथ ही ये शिवभक्त थे ओर शिवभक्ति का भार वहन करने के कारण इनका नाम भारशिव पड़ा । कुछ शिलालेखों में भी इनका उल्लेख पाया जाता है । इन्होने काशी में अश्वमेध यज्ञ भी किया था ।