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भावस्तय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भावस्तय वि॰ [सं॰] जैनों के अनुसार ऐसा सत्य जो ध्रुव न होने पर भी भाव की दृष्टि से सत्य हो । जैसे,—यद्यपि तोते कई रंग के होते हैं, तथापि साधारणतः वे हरे कहे जाते हैं । अतः तोतों को हरा करना 'भावसत्य' है ।