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भाषासम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भाषासम संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकार का शब्दालंकार । काव्य मे केवल ऐसे शब्दों की योजना जो कई भाषाओं में समान रुप से प्रयुक्त होते हैं । उ॰—मंजुल मणि मंजीरे कलगंभीरे विहार सरसी तीरे । विरसासि केलि कीरे किमालि धीरे च गंधसार समीरे । यह श्लोक संस्कृत, प्राकृत, शौरसेनी, नागर अपभ्रंश, अवंती आदि अनेक भाषाओं में इसी रुप में होगा ।