सामग्री पर जाएँ

भासना

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

भासना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ भासन]

१. प्रकाशित होना । चमकना ।

२. मालूम होना । प्रतीत होना ।

३. देख पड़ना ।

४. फँसना । लिप्त होना । उ॰—अपने भुजदंडन कर गहिए बिरह सलिल में भीसी ।—सूर (शब्द॰) ।

५. भसना । डूबना । घँसना॰ उ॰— यह मत दै गोपिन कौं आवहु बिरह नदी मैं भासत । —सूर॰, १० । ३४२६ ।

भासना ^२ क्रि॰ स॰ [सं॰ भाषण] कहना । बोलना । उ॰— सुमिल सुगीतनि गावैं निपट रसीलौ भासनि ।—घनानंद, पृ॰ ४५३ ।