भिक्षा
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संज्ञा
[सम्पादित करें]भिक्षा
- दान में दी जाने वाली खाद्य या अन्य वस्तुएँ, विशेषतः संन्यासियों, भिक्षुओं या जरूरतमंदों को।
- हिन्दू और बौद्ध परंपराओं में आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में किया जाने वाला अन्न संग्रह।
उच्चारण
[सम्पादित करें](दिल्ली हिंदी) अ॰ध॰व॰/आई॰पी॰ए॰(कुंजी): /bʱɪk.ʂɑː/, [bʱɪk.ʃäː]
उदाहरण वाक्य
[सम्पादित करें]- संन्यासी गाँव-गाँव जाकर भिक्षा माँगते थे।
- उसने भिक्षा में मिला अन्न स्वीकार किया।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भिक्षा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. याचना । माँगना । जैसे,—मैं आपसे यह भिक्षा माँगता हूँ कि आप इसे छोड़ दें ।
२. दीनता दिखलाते हुए अपने उदरनिर्वाह के लिये धूम धूमकर अन्न, धन आदि माँगने का काम । भीख । क्रि॰ प्र॰—माँगना ।
३. इस प्रकार माँगने से मिली हुई वस्तु । भीख ।
४. सेवा । नौकरी ।
५. मजदूरी । वेतन । भृति (को॰) । यौ॰—भिक्षाकरण = भीख माँगना । भिक्षाचर = भिक्षुक । फकीर । भिक्षाचरण, भिक्षाचर्य, भिक्षाचर्या = दे॰ 'भिक्षाकरण' । भिक्षाजीवी । भीक्षापात्र । भिक्षाभांड । भिक्षाभाजन = दे॰ 'भिक्षापात्र' । भिक्षाभुज् = दे॰ 'भिक्षाजीवी' । भिक्षावास । भिक्षावृत्ति = भिक्षा द्वारा जीविका करना । भिक्षुक का जीवन ।