सामग्री पर जाएँ

भुरकना

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

भुरकना क्रि॰ अं॰ [सं॰ भुरण (=गति) या हिं॰ भुरका]

१. सुखकर भुरभुरा हो जाना ।

२. भूलना । उ॰— थोरिए बैस बैथोरी भटू ब्रजभोरी सी बानन में भुरकी है ।— देव (शब्द॰) । संयो॰ क्रि—जाना ।

३. चूर्णा के रूप के किसी पदार्थ को छिड़कना । भुरभुराना । बुरकना । उ॰— जहाँ तहँ लसत महा मदमत । वर बानर कारन दल दत्त । अंग अंग चरचे अति चदन । मुंडन भुरके देखिय बंदन ।—केवश (शब्द॰) । संयो॰ क्रि—देना ।