भुरवना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भुरवना पु क्रि॰ सं॰ [सं॰ भ्रमण, हिं॰ भरमना का प्रे॰ रूप] भूलवाना । भ्रम में ड़ालना । फुसलाना । उ॰—(क) सूरदास प्रभु रसिक सिरोमणि बातन भुरई राधिका भोरी । सूर— (शब्द॰) । (ख) ऊधी अब यह समझि भई । नंदनँदन के अंग अंग प्रति उपमा न्याइ दई । कुंतल कुटिल भँवर भामिनि वर मालति भुरै लई । तजत न गहरु कियो तिन कपटी जानि निराश भई ।—सूर (शब्द॰) । संयो॰ क्रि—देना ।—लेना ।—रखना ।