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भूँजना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भूँजना † ^१ क्रि॰ सं॰ [हिं॰ भुनना]

१. किसी वस्तु को आग में ड़ालकर या और किसी प्रकार गर्मी पहुँचाकर पकाना ।

२. तलना । पकाना । उ॰— ऐं परि जो मो इच्छा होई । भुँज्यो बीज तियजि परै स्रोई ।—नंद॰, ग्रं, पृ॰, २९९ ।

३. दुःख देना । सताना ।

भूँजना क्रि॰ स॰ [सं॰ भोग] भोगना । भोग करना ।उ॰—(क) राज कि भुँजब भरतपुर नृप कि जियहि बिन राम ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) कीन्हेसि राजा भूँजहि राजू । कीन्हेसि हस्ति घोर तिन्ह साजू । —जायसी (शब्द॰) ।