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भृङ्गी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भृंगी ^१ सज्ञा पुं॰ [सं॰ भृंङ्गिन्]

१. शिव जो का एक परिषद वा गण । उ॰— अति प्रेय वचन सुनत प्रिय केरे । भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे ।—मानस, १ । ९३ ।

२. बड़ या उदुंबर का पेड़ ।

भृंगी ^२ सज्ञा स्त्री॰ [सं॰ भृङ्गी]

१. भौंरी ।

२. बिलनी नामक कीड़ा जो और कीड़ों को भी अपने समान रूपवाला बना लेता है । उ॰—उरियतु भृंगी कीट लौ मत बहई ह्वै जाहि —बिहारी (शब्द॰) ।

३. अतिविषा । अतीस ।

४. भाँग ।