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भेदभरे

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भेदभरे तथ्य की झलक । उ॰—योग भोग; जप तप, धन संचय गार्हस्थाश्रम, दृढ़ संन्यास । त्याग तपस्या, व्रत सब देखा पाया है जो मर्माभास ।—अनामिका, पृ॰ १६६ ।