भैँसि
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भैँसि † संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ महिपी] दे॰ 'भैस' । उ॰—(क) अब श्री गुसाई जो के सेवक एक गुजर के बेटा की बहु, आन्यारे में रहती जाकी भैसि श्री गोबर्धननाथ जी आप मिलाइ दिए तिनकी वार्ता कौ भाव कहत है । —दो सौ बावन॰, भा॰ २, पृ॰ १ । (ख) ओर जब तें वह बहु घर में आई ताके थोरेइ दिन पाछे वा ब्रजवासी की एक भँसि खोइ गई । —दो सो बावन॰, भा॰,
२. पृ॰ २ ।