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भैरवीचक्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भैरवीचक्र संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. तांत्रिकों या, वाममागियों का वह समुह जो विशिष्ट तिथियों नक्षत्रों और समयों में देवी का पूजन करने के लिये एकत्र होता है । बिशेष— इसमें सब लोग चक्र में बैठकर पूजन और मद्यपान आदि करते है । इसमें दीक्षित लोग ही सम्मिलित होते है और वर्णाश्रम आदि का कोई बिचार नहीं रखा जाता है । यथा— संप्रप्ति भैरवी चक्र सर्वे वर्णा द्बिजोत्तमा । निवृत्ते भैरवी चक्र सर्वें वर्णाः पृथक् पृथक् । (उत्पत्ति तंत्र) ।

२. मद्यपों और अनाचारियों आदि का समुह ।