भैरू
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भैरू संज्ञा पुं॰ [सं॰ भैरव] दे॰ भैरव । उ॰— हिसा बहुत करै, अपस्वास्थ स्वाद लग्यौ मद माँसे । महामाइ भैरू को सिर दै आपुहि बैठी ग्रासै ।—सूंदर॰ ग्रं॰ भा॰, २, पृ॰ ५१६ ।
भैरू संज्ञा पुं॰ [सं॰ भैरव] दे॰ भैरव । उ॰— हिसा बहुत करै, अपस्वास्थ स्वाद लग्यौ मद माँसे । महामाइ भैरू को सिर दै आपुहि बैठी ग्रासै ।—सूंदर॰ ग्रं॰ भा॰, २, पृ॰ ५१६ ।