सामग्री पर जाएँ

भोगभूमि

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

भोगभूमि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. भोग का स्थान । उपभोग का क्षेत्र । स्वर्ग । आंनंद करने की जगह । उ॰— आनंद की सिद्धावस्था या उपभोग पक्ष का प्रदर्शन करनेवाली काव्यभूमि दीप्ति, माधुर्य और कोमलता की भूमि है जिसमें प्रवर्तक या बीज भाव प्रेम है । काव्य की इस भोगभूमि में दुःखात्मक भावों को वेधड़क चले आने की इजाजत नहीं ।— रस॰, पृ॰ ८१ ।

२. विष्णुपुराण के अनुसार भारतवर्ष के अतिरिक्त अन्य वर्ष क्योंकि भारतवर्ष को कर्मभूमि कहा गया है ।

३. जैनों के अनुसार वह लोक जिसमें किसी प्रकार का कर्म नहीं करना पड़ता और सब प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति केवल कल्पवृक्ष के द्बारा हो जाता है ।