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भोगांतराय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भोगांतराय संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह अंतराय जिसका उदय होने से मनुष्य केद भोगों की प्राप्ति में विध्न पड़ता है । वह पाप कर्म जिनके उदित होने पर मनुष्य भोगने योग्य पदार्थ पाकर भी उनका भोग नहीं कर सकता (जैन) ।